{"_id":"58f4fbd24f1c1ba346470a8d","slug":"women-come-forward-to-give-direction-to-society","type":"story","status":"publish","title_hn":"समाज को दिशा देने के लिए आगे आएं महिलाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
समाज को दिशा देने के लिए आगे आएं महिलाएं
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
Updated Mon, 17 Apr 2017 11:19 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- संत निरंकारी मंडल का महिला समागम
संत निरंकारी सत्संग भवन में लखीमपुर खीरी जोन स्तरीय महिला समागम आयोजित किया गया। जिसमें महिला संत सारिका नारंग ने कहा कि दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में आज महिलाएं नई ऊंचाइयां हासिल कर रही हैं। उनकी प्रगति देखकर खुशी होती है। जहां महिलाएं सांसारिक उपलब्धियों के लिए कठिन परिश्रम कर रही हैं, वहीं उन्हें अपना समय आध्यात्म के मार्ग पर चलते हुए सेवा, सत्संग और सुमरण में भी लगाना चाहिए। समाज को नई दिशा देने के लिए आगे आना चाहिए।
सारिका ने कहा कि आत्मा के कल्याण के लिए अति महत्वपूर्ण क्षेत्र में भी महिलाओं को किसी भी रूप में पीछे नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के उत्थान में महिलाओं की भूमिका को स्वीकार कर पुरुषों को महिलाओं के योगदान और समाज में उनके महत्व के पहलू का आदर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण व्यक्तिगत, सामाजिक और आध्यात्मिक स्तर पर होना चाहिए। नारी शक्ति जननी है। मां है, मां होने के कारण सर्वश्रेष्ठ और पूजनीय है। संसार का बड़े से बड़ा इंसान चाहे योद्धा हो, दानी राजा, संत हो मां के सामने नतमस्तक होता आया है। उन्होंने बताया कि मां के बिना सृष्टि की कल्पना अधूरी है। मां के चरणों में स्वर्ग है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सद्गुरु माता विश्व में प्रभु परमात्मा की जानकारी करा रही हैं। प्रभु की प्राप्ति करना जीवन का लक्ष्य है और महिला समागमों के माध्यम से अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाना है। समागम में क्षेत्रीय संचालक संजीव अग्रवाल, प्रवेश कुमार साहनी, संयोजक डॉ. एके चौहान और तिलकचंद्र आदि ने भी विचार रखे।
विज्ञापन
संत निरंकारी सत्संग भवन में लखीमपुर खीरी जोन स्तरीय महिला समागम आयोजित किया गया। जिसमें महिला संत सारिका नारंग ने कहा कि दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में आज महिलाएं नई ऊंचाइयां हासिल कर रही हैं। उनकी प्रगति देखकर खुशी होती है। जहां महिलाएं सांसारिक उपलब्धियों के लिए कठिन परिश्रम कर रही हैं, वहीं उन्हें अपना समय आध्यात्म के मार्ग पर चलते हुए सेवा, सत्संग और सुमरण में भी लगाना चाहिए। समाज को नई दिशा देने के लिए आगे आना चाहिए।
सारिका ने कहा कि आत्मा के कल्याण के लिए अति महत्वपूर्ण क्षेत्र में भी महिलाओं को किसी भी रूप में पीछे नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के उत्थान में महिलाओं की भूमिका को स्वीकार कर पुरुषों को महिलाओं के योगदान और समाज में उनके महत्व के पहलू का आदर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण व्यक्तिगत, सामाजिक और आध्यात्मिक स्तर पर होना चाहिए। नारी शक्ति जननी है। मां है, मां होने के कारण सर्वश्रेष्ठ और पूजनीय है। संसार का बड़े से बड़ा इंसान चाहे योद्धा हो, दानी राजा, संत हो मां के सामने नतमस्तक होता आया है। उन्होंने बताया कि मां के बिना सृष्टि की कल्पना अधूरी है। मां के चरणों में स्वर्ग है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सद्गुरु माता विश्व में प्रभु परमात्मा की जानकारी करा रही हैं। प्रभु की प्राप्ति करना जीवन का लक्ष्य है और महिला समागमों के माध्यम से अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाना है। समागम में क्षेत्रीय संचालक संजीव अग्रवाल, प्रवेश कुमार साहनी, संयोजक डॉ. एके चौहान और तिलकचंद्र आदि ने भी विचार रखे।
विज्ञापन