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Budaun News: पैरावेट्स बनकर आत्मनिर्भर हो रहीं महिलाएं, पशु स्वास्थ्य की संभाल रही जिम्मेदारी

Tue, 20 Jan 2026 01:45 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Updated Tue, 20 Jan 2026 01:45 AM IST
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Women are becoming self-reliant by becoming paravets and taking responsibility for animal health.
बदायूं। पशु चिकित्सा विभाग की ओर से लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने और पशु स्वास्थ्य सेवाओं को गांव तक पहुंचाने के उद्देश्य से पैरावेट्स (पशु चिकित्सा सहायक) का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस योजना के तहत महिला और पुरुष दोनों को कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण, प्राथमिक पशु चिकित्सा और पशुपालकों को परामर्श देने का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद ये पैरावेट्स अपने-अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं।
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जिले में वर्तमान समय में पैरावेट्स और वैक्सीनेटर के रूप में दो महिलाएं सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं, जो न सिर्फ पशुओं का उपचार कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बन रही हैं। पशुपालन विभाग का भी मानना है कि इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से पशुपालकों को बेहतर और संवेदनशील सेवाएं मिल सकेंगी। ग्राम मरूआ निवासी संतोष यादव पैरावेट्स के रूप में कृत्रिम गर्भाधान के साथ-साथ टीकाकरण का कार्य कर रही हैं। उन्होंने जनता पशु कृत्रिम गर्भाधान केंद्र के नाम से अपना सेंटर भी स्थापित किया है। संतोष की मेहनत और कार्य के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें बिल्सी विधायक हरीश शाक्य और दातागंज विधायक राजीव कुमार सिंह द्वारा प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित भी किया जा चुका है।
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पैरोवेट्स ये होता है

पैरोवेट्स यानी पशु चिकित्सा सहायक। ये पूरी तरह डॉक्टर नहीं होते, लेकिन पशु चिकित्सा विभाग से प्रशिक्षित होकर गांवों में पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण, प्राथमिक उपचार, पशुपालकों को परामर्श जैसे कार्य करते हैं। गंभीर मामलों में ये पशु चिकित्सक को सूचना देते हैं।

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कितनी पढ़ाई जरूरी

पैरावेट्स बनने के लिए आमतौर पर न्यूनतम योग्यता इंटरमीडिएट जीव विज्ञान वर्ग से होना जरूरी है। पशु चिकित्सा विभाग द्वारा 6 माह से 1 वर्ष तक का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रमाणपत्र दिया जाता है, जिसके आधार पर गांवों में कार्य की अनुमति मिलती है। एक पैरावेट 8 हजार से 15 हजार रुपये प्रतिमाह, जबकि सक्रिय क्षेत्र में कार्य करने पर इससे अधिक भी कमा सकता है।
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जिले में अभी कम ही महिला पैरावेट्स कार्य कर रही हैं। इसमें संतोष नाम की पैरावेट्स के साथ अन्य महिला वैक्सीनेटर मेहनत से कार्य कर रही है। जल्द ही इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी।

डा. समदर्शी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी,
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