बदायूं: मीरापुर गांव में डेंगू पीड़ित महिला की मौत, दहशत में आए बुखार पीड़ित; हर घर में मरीज
बदायूं के वजीरगंज क्षेत्र के मीरापुर गांव में डेंगू का प्रकोप जारी है। शुक्रवार को पूजा नामक महिला की निजी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। वह कई दिनों से बुखार से पीड़ित थीं। गांव में सौ से अधिक लोग बुखार से ग्रस्त हैं। इनमें दस से पंद्रह मरीजों को दूसरे जिलों में भर्ती कराया गया है।
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मीरापुर निवासी जितेंद्र कुमार की पत्नी पूजा पिछले कई दिन से बुखार से पीड़ित थीं। हालत में सुधार न होने पर उन्हें बिसौली के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया। वहां पिछले दो दिनों से उनका इलाज चल रहा था। 17 सितंबर को डॉक्टर ने निजी लैब से उनकी जांच कराई, रिपोर्ट में डेंगू और टाइफाइड की पुष्टि हुई।
हर परिवार में एक बीमार
शुक्रवार को अस्पताल में ही महिला की मौत हो गई। महिला की मौत के बाद गांव में बीमारी को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है। अजय, रोहित, मोहन के मुताबिक, मीरापुर में कई दिनों से बुखार के मरीज लगातार सामने आ रहे हैं। किसी घर में एक तो कहीं परिवार के एक से अधिक सदस्य बीमार हैं। कुछ लोग आर्थिक स्थिति और बीमारी की गंभीरता के अनुसार घर पर ही दवा ले रहे हैं, जबकि कई परिवार निजी अस्पतालों और जांच केंद्रों का सहारा ले रहे हैं। करीब 10 से 15 मरीज दूसरे जिलों में उपचार कराने गए हैं।
सीएमओ डॉ. विकास शर्मा ने बताया कि इस संबंध में संबंधित एमओआईसी से जानकारी ली गई है। महिला की मौत कैसे हुई है यह डेथ ऑडिट पूर होने के बाद ही पता चल सकेगा।
जिले में अब तक 34 डेंगू पॉजिटिव मिले
जिले में डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। अब तक 34 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। सबसे अधिक 22 मामले जगत ब्लॉक के बीबीपुर गांव में सामने आए हैं। इसके अलावा अलग-अलग क्षेत्रों में डेंगू के मरीज मिल चुके हैं। वहीं उसावां में भी बृहस्पतिवार को एक पॉजिटिव मिला था।
बीबीपुर गांव में डेंगू के सबसे अधिक मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से यहां जांच और बचाव कार्य कराए गए। यहां तक कि बरेली मंडल से भी टीमों ने आकर गांव का निरीक्षण किया। गांव में बुखार से पीड़ित लोगों की जांच के साथ मच्छरों की रोकथाम के लिए भी कदम उठाए गए, लेकिन अन्य जगहों पर ध्यान नहीं दिया।
डेंगू के साथ जिले में मलेरिया और वायरल बुखार के मरीज भी सामने आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बुखार होने पर कई लोग पहले स्थानीय स्तर पर उपचार करा रहे हैं। कुछ मरीज निजी चिकित्सकों और जांच केंद्रों का सहारा ले रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आने वाले आंकड़ों के अलावा निजी स्तर पर कराई जा रही जांच की स्थिति भी बीमारी के वास्तविक फैलाव को समझने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
जिले में अब तक मिले 34 डेंगू मरीजों में सबसे अधिक 22 बीबीपुर के हैं। नसीरपुर टप्पा में पांच मरीज मिले हैं। इसके अलावा उझानी, वजीरगंज और मुजाहिदपुर में एक-एक मरीज की पुष्टि हुई है। बाकी मरीज जिले के अन्य क्षेत्रों से सामने आए हैं।
जिला मलेरिया अधिकारी अमित तिवारी ने बताया कि लोगों को घरों के आसपास सफाई रखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। गांव में एंटी लार्वा का छिड़काव कराया गया। साथ ही फॉगिंग की कराई गई है।
तीन दिन कैंप लगाकर टीम ने की जांच, नहीं मिला एक भी डेंगू-मलेरिया पीड़ित
मीरापुर गांव में स्वास्थ्य विभाग की ओर से 13, 14 व 15 सितंबर को लगाए गए स्वास्थ्य शिविर की जांच पर अब सवाल उठने लगे हैं। तीन दिन तक गांव में टीम मौजूद रही और बुखार से पीड़ित लोगों की जांच की गई, लेकिन विभाग की जांच में एक भी डेंगू या मलेरिया पॉजिटिव मरीज नहीं मिला। टीम को कुछ लोग बुखार से पीड़ित मिले, जिन्हें दवाएं देकर शिविर समाप्त कर दिया गया। इसके बाद गांव में दोबारा जांच या स्वास्थ्य टीम भेजने की जरूरत नहीं समझी गई।
गांव मीरापुर में शिविर समाप्त होने के बाद भी गांव में बुखार का सिलसिला जारी है। ग्रामीण मोहित, सोहन के अनुसार कई लोग अब भी बुखार से पीड़ित हैं और कुछ मरीजों का इलाज घर पर चल रहा है, जबकि कई लोग निजी अस्पतालों और दूसरे जिलों में इलाज करा रहे हैं। निजी लैब में कराई गई जांच में कुछ मरीजों में डेंगू और मलेरिया की पुष्टि होने की बात सामने आ रही है।
जब गांव में संक्रमण के लक्षण मौजूद थे और बुखार से पीड़ित लोग भी मिले थे तो स्वास्थ्य विभाग की जांच में एक भी डेंगू-मलेरिया मरीज क्यों नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से केवल खानापूर्ति की गई थी। इसकी वजह से महिला की मौत हुई है। अगर स्वास्थ्य विभाग इसको गंभीरता से ले लेता, तो महिला की मौत नहीं होती।
गांव में बुखार फैला हुआ है। कोई भी परिवार ऐसा नहीं बचा है, जिसके घर में बुखार पीड़ित न हों। मेरे घर में ही छह लोगों को डेंगू हुआ था। अब वह सही हैं। गांव की स्थिति बेहद खराब है। -राजू, ग्रामीण
गांव की स्थिति बेहद खराब है। हर घर में दो-चार लोग बीमार हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने खानापूरी की और चली गई। उनको गांव वालों से कोई लेना देना नहीं है। इसकी वजह से महिला की मौत हुई है। -अनेकपाल, ग्रामीण
गांव में लगातार तीन दिन तक स्वास्थ्य शिविर लगाया गया था, जो लोग बुखार पीड़ित थे, जांच कर उन्हें दवाएं दी गई थीं। इस दौरान कोई भी डेंगू या मलेरिया पॉजिटिव नहीं आया था। -जुनैद महेंदी, एमओआईसीए, सैदपुर