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शानो-शौकत के साथ चल रहा बड़े सरकार का उर्स

Mon, 13 Jul 2015 12:06 AM IST
बदायूं
बदायूं Updated Mon, 13 Jul 2015 12:06 AM IST
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With its flashy running Big Government's Urs
बड़े सरकार ख्वाजा सुल्तान आरफीन साहब (बड़े सरकार) का 746वां उर्स शान-ओ-शौकत के साथ जारी रहा। 13 जुलाई को सुबह कुल के साथ उर्स का समापन हो जाएगा। उर्स के दौरान बड़े सरकार की दरगाह पर आम जायरीनों के साथ ओहदेदारों ने भी सिर झुकाया। लोबान और अगरबत्तियों की खुशबू से दरगाह महक उठी। गुल और चारदपोशी का सिलसिला जारी रहा।  
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कव्वालियों के दौर से शुरू हुआ बड़े सरकार का उर्स महफिलों से जवां रहा। दिल्ली ओर मुंबई की कव्वाली पार्टियों ने समां बांध दिया। जायरीन बड़े सरकार की खिदमत में लगे रहे। जहां जिसको जगह मिली वहां बड़े सरकार के साये में पड़े रहे। इंतजामिया कमेटी की ओर से जायरीनों को पीने के पानी आदि को खास व्यवस्था की गई।  
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इंतजामिया कमेटी के सचिव पीरजादा अशरफ ने बताया कि नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष फात्मा रजा की ओर से रोजा इफ्तार किया गया। इसमें दर्जा राज्यमंत्री आबिद रजा के साथ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। दर्जा राज्यमंत्री आबिद खां और डॉ. आरए उस्मानी ने भी उर्स में शिरकत की ओर मुल्क और कौम की दुआ की। सुबह कुरान ख्वानी के बाद कव्वालियों को दौर चला। दुआएं करने और हाजिरी लगाने वालों को सुबह से शाम तक तांता लगा रहा। उन्होंने बताया कि 13 जुलाई को सुबह उर्स का कुल के साथ समापन हो जाएगा। मन्नते मांगने का सिलसिला जारी रहा। बड़े सरकार उन सूफी संतों में गिने जाते हैं, जिन्होंने पूरी जमात को अमनोअमान और भाईचारे का पैगाम दिया।
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बारिश के बाद भी गुलजार रहा उर्स पर लगा मेला
बदायूं। बड़े सरकार के दर पर लगा उर्स का मेला शनिवार रात को हुई बारिश के बाद भी गुलजार रहा। सुदूर स्थानों से आए जायरीनों ने जियारत करने के साथ मेला में खरीदारी की और खानपान का सामान खरीदा। खान-पान की चीजों में हलवा-पराठा, खाजा और मीठे नमकीन शक्करपारे की खूब बिक्री हुई। महिलाओं ने रसोई से जुड़ा सामान अधिक खरीदा तो बच्चों ने खिलौने लिए। उर्स के मेले में भीड़ ही भीड़ नजर आई।

छोटे-बड़े सरकार के उर्स के कुल से जुड़ा है शफी का नाता
 बदायूं।
शहर के मोहल्ला कामगरान निवासी मोहम्मद शफीक अहमद हुनरदार लोगों में जाने जाते हैं। शेरो-शायरी के साथ उनकी पेंटिंग हुनर में शामिल हैं। अन्य लोगों से कुछ अलग इनका छोटे-बड़े सरकार से नाता है। इन्होंने बताया कि दोनों सरकार के उर्स के कुल में उनके यहां चादरें जरूर चढ़ती हैं। उन्होंने बताया कि यमन के बादशाह छोटे बड़े सरकार जब यहां आए और सूफी संतों में उनकी शुमारी हुई, तो वहां उनके पूर्वज जो छोटे-बड़े सरकार की खिदमत में रहा करते थे। वह भी बदायूं शरीफ चले आए। शफीक ने बताया कि उनके पुरखे बादशाह के तीर-कमान बनाते थे। बादशाह से बेपनाह मोहब्बत करते थे। जब उनके पुरखे यहां आए तो शहर में एक जगह बस गए। इस मोहल्ले का नाम कामगरान उनके पुरखों के काम के आधार पर ही रखा गया। उन्होंने बताया हर वर्ष की तरह इस बार भी उनके यहां से चादर जाएगी। इस बावत शफीक ने कहा है कि तुम अपने शहर को अगर जन्नत निशां बना लो, जहां भी जन्नत यह दर रसूल का है।

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