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शराब असली है या नकली खुद जांच सकेंगे खरीदने वाले
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बदायूं। जिले में कच्ची शराब का कारोबार जमकर होता है, तो वहीं नकली शराब भी धड़्ल्ले से बिक रही है। ऐसे में अब शराब असली है या नकली इसे खरीदने वाले अब खुद जांच सकेंगे। इसके लिए सभी शराब की दुकानों को प्वाइंट ऑफ सेल (पॉस) मशीनों से लैस किया जाएगा। नई व्यवस्था में शराब के दुकानदार को ग्राहक के लिए बिल भी देना होगा। अगर शराब नकली है तो पीओएस से बिल नहीं निकलेगा। यह व्यवस्था इसी वर्ष अक्टूबर तक शुरू हो जानी थी, लेकिन लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण के कारण शराब की दुकानें पीओएस से लैस नहीं हो सकीं थीं।
जिले में सरकारी शराब की कुल 362 दुकानें हैं। इनमें देशी और अंग्रेजी शराब और बीयर की दुकानें शामिल हैं। इसके अलावा दो मॉडल शॉप भी हैं। शराब की ओवररेटिंग के साथ कालाबाजारी का खेल किसी से छिपा नहीं है। शहर में ही कई दुकानों पर निर्धारित समय के बाद शराब बेंची जाती है। पिछली साल गद्दीचौक स्थित दुकान पर शटर में खिड़की बनाकर आधी रात में शराब बेंचे जाने के कई वीडियो वायरल हुए थे। इसके अलावा जिले के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर कच्ची शराब बनाने और बेचने का धंधा भी होता है। अवैध शराब पीने से कई बार लोगों की जान तक चली जाती है।
इसे देखते हुए अब शराब की ओवररेटिंग, नकली और मिलावटी शराब की बिक्री, कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने लाइसेंसी दुकानों पर पीओएस मशीनें अनिवार्य कर दी हैं। शराब की बोतल पर बार कोड को पीओएस मशीन से स्कैन करते ही शराब का ब्रांड, मात्रा, गुणवत्ता आदि जानकारियां स्क्रीन पर होंगी। ऑनलाइन व्यवस्था के चलते इसका पूरा ब्योरा मुख्यालय पर भी रहेगा। इससे शराब में मिलावट के साथ कालाबाजारी पर अंकुश लगेगा। नई व्यवस्था में शराब की सभी दुकानों के साथ भांग की सरकारी दुकानों की भी जियो फेसिंग भी की जाएगी। इसके बाद शराब की सभी दुकानें चौबीस घंटे अधिकारियों की नजर में रहेंगी। शराब के थोक या फिर फुटकर विक्रेता किसी तरह का खेल नहीं कर सकेंगे। शराब के ठेके चलाने वालों को ग्राहक को बिल भी देना होगा।
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डिजिटल अल्कोहल मीटर बताएंगे गुणवत्ता और तीव्रता
आबकारी विभाग के अधिकारियों और निरीक्षकों के वाहनों को जीपीएस सिस्टम से लैस किया जाएगा। नई व्यवस्था में आबकारी निरीक्षकों को डिजिटल अल्कोहल मीटर उपलब्ध कराए जाएंगे। किसी भी दुकान पर जांच के दौरान इस डिजिटल अल्कोहल मीटर से शराब की तीव्रता और गुणवत्ता का पता मिनटों में चल जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि आबकारी विभाग के पूरी तरह से डिजिटल और ऑनलाइन होने के बाद अवैध शराब की बिक्री, ओवर रेटिंग समेत कई खेलों पर अंकुश लग जाएगा।
हर माह 22 करोड़ की मदिरा का सेवन
जिले में अंग्रेजी, देशी शराब और बीयर की कुल 362 सरकारी दुकानें हैं। इसके अलावा कई इलाकों में बड़े पैमाने पर कच्ची का धंधा भी होता है। आबकारी विभाग के आंकड़ों को देखे तो हर महीने जिले में औसतन 22 करोड़ रुपये की शराब की बिक्री होती है। सरकार को इससे मोटा राजस्व मिलता है। सहालग और त्योहार के सीजन में शराब की बिक्री और भी बढ़ जाती है। गौर करने वाली बात यह है कि शराब की बिक्री का यह सरकारी आंकड़ा है। अवैध रूप से बिकने वाली दूसरे राज्यों की शराब की कच्ची शराब इसमें शामिल नहीं है।
फैक्ट फाइल-
जिले में शराब की कुल दुकानें- 362
देशी शराब की दुकानें- 255
अंग्रेजी शराब की दुकानें-61
बीयर की दुुकानें- 46
मॉडल शॉप- 02
शराब की प्रति माह खपत-
देशी शराब- 6.75 लाख लीटर
अंग्रेजी शराब- 1.10 लाख बोतल
बीयर-60 हजार लीटर
शराब की दुकानों पर नए वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल से पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनों को अनिवार्य कर दिया गया है। सभी दुकानों की जियो फेसिंग कराई जा रही है। एक अप्रैल से शराब की बिक्री पीओएस के जरिए ही होगी। इससे शराब की ओवर रेटिंग के साथ मिलावटी शराब की बिक्री पर भी रोक लगेगी। हालांकि, पीओएस सिस्टम अब तक चालू हो जाना था, लेकिन कोरोना काल के कारण इसमें कुछ देरी हुई है।
- सुशील कुमार मिश्रा, जिला आबकारी अधिकारी
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जिले में सरकारी शराब की कुल 362 दुकानें हैं। इनमें देशी और अंग्रेजी शराब और बीयर की दुकानें शामिल हैं। इसके अलावा दो मॉडल शॉप भी हैं। शराब की ओवररेटिंग के साथ कालाबाजारी का खेल किसी से छिपा नहीं है। शहर में ही कई दुकानों पर निर्धारित समय के बाद शराब बेंची जाती है। पिछली साल गद्दीचौक स्थित दुकान पर शटर में खिड़की बनाकर आधी रात में शराब बेंचे जाने के कई वीडियो वायरल हुए थे। इसके अलावा जिले के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर कच्ची शराब बनाने और बेचने का धंधा भी होता है। अवैध शराब पीने से कई बार लोगों की जान तक चली जाती है।
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इसे देखते हुए अब शराब की ओवररेटिंग, नकली और मिलावटी शराब की बिक्री, कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने लाइसेंसी दुकानों पर पीओएस मशीनें अनिवार्य कर दी हैं। शराब की बोतल पर बार कोड को पीओएस मशीन से स्कैन करते ही शराब का ब्रांड, मात्रा, गुणवत्ता आदि जानकारियां स्क्रीन पर होंगी। ऑनलाइन व्यवस्था के चलते इसका पूरा ब्योरा मुख्यालय पर भी रहेगा। इससे शराब में मिलावट के साथ कालाबाजारी पर अंकुश लगेगा। नई व्यवस्था में शराब की सभी दुकानों के साथ भांग की सरकारी दुकानों की भी जियो फेसिंग भी की जाएगी। इसके बाद शराब की सभी दुकानें चौबीस घंटे अधिकारियों की नजर में रहेंगी। शराब के थोक या फिर फुटकर विक्रेता किसी तरह का खेल नहीं कर सकेंगे। शराब के ठेके चलाने वालों को ग्राहक को बिल भी देना होगा।
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डिजिटल अल्कोहल मीटर बताएंगे गुणवत्ता और तीव्रता
आबकारी विभाग के अधिकारियों और निरीक्षकों के वाहनों को जीपीएस सिस्टम से लैस किया जाएगा। नई व्यवस्था में आबकारी निरीक्षकों को डिजिटल अल्कोहल मीटर उपलब्ध कराए जाएंगे। किसी भी दुकान पर जांच के दौरान इस डिजिटल अल्कोहल मीटर से शराब की तीव्रता और गुणवत्ता का पता मिनटों में चल जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि आबकारी विभाग के पूरी तरह से डिजिटल और ऑनलाइन होने के बाद अवैध शराब की बिक्री, ओवर रेटिंग समेत कई खेलों पर अंकुश लग जाएगा।
हर माह 22 करोड़ की मदिरा का सेवन
जिले में अंग्रेजी, देशी शराब और बीयर की कुल 362 सरकारी दुकानें हैं। इसके अलावा कई इलाकों में बड़े पैमाने पर कच्ची का धंधा भी होता है। आबकारी विभाग के आंकड़ों को देखे तो हर महीने जिले में औसतन 22 करोड़ रुपये की शराब की बिक्री होती है। सरकार को इससे मोटा राजस्व मिलता है। सहालग और त्योहार के सीजन में शराब की बिक्री और भी बढ़ जाती है। गौर करने वाली बात यह है कि शराब की बिक्री का यह सरकारी आंकड़ा है। अवैध रूप से बिकने वाली दूसरे राज्यों की शराब की कच्ची शराब इसमें शामिल नहीं है।
फैक्ट फाइल-
जिले में शराब की कुल दुकानें- 362
देशी शराब की दुकानें- 255
अंग्रेजी शराब की दुकानें-61
बीयर की दुुकानें- 46
मॉडल शॉप- 02
शराब की प्रति माह खपत-
देशी शराब- 6.75 लाख लीटर
अंग्रेजी शराब- 1.10 लाख बोतल
बीयर-60 हजार लीटर
शराब की दुकानों पर नए वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल से पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनों को अनिवार्य कर दिया गया है। सभी दुकानों की जियो फेसिंग कराई जा रही है। एक अप्रैल से शराब की बिक्री पीओएस के जरिए ही होगी। इससे शराब की ओवर रेटिंग के साथ मिलावटी शराब की बिक्री पर भी रोक लगेगी। हालांकि, पीओएस सिस्टम अब तक चालू हो जाना था, लेकिन कोरोना काल के कारण इसमें कुछ देरी हुई है।
- सुशील कुमार मिश्रा, जिला आबकारी अधिकारी