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जब पुलिस ही नहीं तो कैसे रुकें अपराध

Mon, 19 Jun 2017 12:22 AM IST
रजनीश रिंकू पांडेय बदायूं।
रजनीश रिंकू पांडेय बदायूं। Updated Mon, 19 Jun 2017 12:22 AM IST
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When the police do not stop, then how to stop crime
up police - फोटो : अमर उजाला
27 इंस्पेक्टर, 61 एसआई की कमी से जूझ रहा पुलिस महकमा
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जिले में 181 हेड कांस्टेबल और 100 कांस्टेबल भी कम
मानक के अनुरूप स्टाफ नहीं होने से व्यवस्थाएं प्रभावित

जिले में अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। इसके मूल में कई वजह हैं। इनमें खास कारण है कि अपर्याप्त पुलिस बल। इस जिले में शासन स्तर से जितने पद सृजित हैं उतने पुलिस कर्मी भी तैनात नहीं हैं। 
जिसका सीधा असर कानून व्यवस्था पर पड़ रहा है। मानक के लिहाज से जिले में करीब तीन सौ पुलिस कर्मियों की कमी है। हालांकि, यह पुराना मानक है। बढ़ी आबादी के लिहाज से गौर किया जाए तो स्थिति ज्यादा खराब होगी। महकमा सृजित पदों की संख्या में इजाफा के लिए भी शासन स्तर पर लिखा-पढ़ी कर रहा है। 
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अपराध के बढ़ते ग्राफ को लेकर बदायूं की जब तब किरकिरी होती रहती है। पुलिस महकमा लाख कोशिश के बावजूद अपराध नियंत्रण में नाकाम रहता है। स्टाफ की कमी के वजह से विवेचनाएं भी लंबित रहती हैं। गौर करने वाली बात यह है कि जिले में महिला थाना समेत 22 थाने हैं। किसी भी थाने में मानक के अनुरूप सब इंस्पेक्टर और हेड कांस्टेबल की तैनाती नहीं है। जिले में 27 इंस्पेक्टर, 61 सब इंस्पेक्टर और 181 हेड कांस्टेबल के साथ कांस्टेबल की भी करीब 100 पद खाली हैं। छोटे-मोटे मामलों में विवेचना हेड कांस्टेबल भी कर सकता है, लेकिन जिले में 334 में सिर्फ 151 हेड कांस्टेबलों की ही तैनाती है। ऐसे में छोटे मामलों में विवेचना भी सब इंस्पेक्टर को ही करती है। इससे विवेचना के निस्तारण में भी देरी होती है। कुल कांस्टेबल और एसआई में 195 महिला कांस्टेबल और चार महिला सब इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। उम्मीद की जा रही है कि नई सरकार में पुलिस भर्ती होने के बाद यह पद भर जाएंगे। 
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काफी पद चल रहे हैं खाली
इस जनपद में 48 इंस्पेक्टर के पद सृजित हैं जबकि केवल 21 की तैनाती है।
इसी तरह यहां 230 सबइंस्पेक्टर की जगह 170 सबइंस्पेक्टर तैनात हैं।
334 हेडकांस्टेबलों की जगह जिले में 151 की पोस्टिंग है। इसके अलावा
1401 कांस्टेबलों के स्थान पर 1301 सिपाही पोस्ट हैं।
 
यातायात पुलिस के नाम पर कोई तैनाती नहीं
बदायूं। गौर करने वाली एक बात यह भी है कि जिले में ट्रैफिक पुलिस के नाम पर कोई भी तैनाती नहीं है। यहां ट्रैफिक व्यवस्था की बेहतरीर के लिए नागरिक पुलिस से ही कर्मियों को लगाया गया है। कहने को सीओ ट्रैफिक का पद सृजित है, लेकिन सीओ ट्रैफिक की भी तैनाती नहीं है। ऐसे में यह जिम्मेदारी सीओ सिटी देखते हैं। 
 
रसूखदारों की सुरक्षा में भी लगे हैं पुलिसकर्मी
बदायूं। रसूखदारों की सुरक्षा में भी जिले में काफी पुलिसकर्मी लगे हुए हैं। मौजूदा विधायकों को सरकारी की ओर से सुरक्षा दी गई है। जबकि कुछ रसूखदार लोगों ने अपने खर्च पर पुलिसकर्मियों को रख रखा है। सत्तारूढ़ पार्टियों के बड़े पदाधिकारियों के साथ जिले में कुछ पूर्व विधायकों को भी सुरक्षा हासिल है। 

 
पुलिस महकमे में सृजित पदों के हिसाब से स्टाफ की किल्लत नई भर्तियां होने के बाद यह किल्लत दूर होगी। स्टाफ की कमी का कोई खास असर व्यवस्थाओं पर नहीं पड़ने दिया जा रहा है।
 चंद्रप्रकाश, एसएसपी
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