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वेब सीरीज फैला रहीं हिंसा और फूहड़ता, नाटक हमारी सांस्कृतिक विरासत
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बदायूं। नानाजी देशमुख के साथ संस्कार भारती की स्थापना करने वाले संस्थापक सदस्य 98 साल के बाबा योगेंद्र रविवार को आगरा से बदायूं पहुंचे। संस्कार भारती के कार्यक्रम में आए बाबा ने खास बातचीत में संस्था के सफर का सिलसिला सुनाया। कहा कि कलाकारों व कला को पहचान देने के लिए बनाया गया यह मंच आज भी बेहतर काम कर रहा है। नाटक हमारी सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं, वहीं फिल्मों से भी आगे निकली वेब सीरीज ने युवाओं को हिंसा और फूहड़ता की ओर धकेलने का काम किया है।
आगरा से जोगीपुरा गुरुद्वारा सभाकक्ष पहुंचे बाबा योगेंद्र ने बताया कि नानाजी देशमुख, सर संघ चालक रहे रज्जू भैया, मशहूर नाटककार रामकुमार वर्मा के साथ उन्होंने 1981 में संस्कार भारती की स्थापना की। आगरा से शुरू हुआ संस्था का सफर आज छह देशों में फैल चुका है। संस्था की स्थापना का उद्देश्य भारतीय कला व संस्कृति को उसका उचित स्थान देना था। नवोदित कलाकारों को मंच देकर उनकी प्रतिभा को निखारने में संस्था पूरे मनोयोग से लगी है। आठ महीने पहले ही गुजरात में 650 कलाकारों को जोड़कर भव्य कार्यक्रम संस्था करा चुकी है। अब दिल्ली में नया भवन बन गया है। अधिकांश नीति निर्देश वहीं से जारी किए जाते हैं।
बाबा योगेंद्र ने बताया कि नाटक हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं। इनके जरिये भारतीय समाज की समस्याओं, कुरीतियों, आदर्शों का मंचन करके समाज को जगाने का काम किया जाता है। कुछ मामलों में नाटकों की जगह फिल्मों ने ली। अब वेब सीरीज फिल्मों से भी आगे जा रही हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने स्वीकारा किया कि फिल्मों में सेंसरशिप से फिर भी आपत्तिजनक चीजें निकाल दी जाती हैं पर वेब सीरीज पर कोई अंकुश न होने से यहां हिंसा व आपत्तिजनक चीजें बिना कांट छांट दिखा दी जाती हैं। सभ्य समाज और युवा पीढ़ी के लिए यह घातक है। सरकार को भी इस बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने वादा किया कि बदायूं में नाटकों को बढ़ावा देने का प्रयास करेंगे। नुक्कड़ नाटकों से इसका शुभारंभ किया जाएगा। स्वीकार किया कि बदायूं से पुराना जुड़ाव है। वर्ष 1971 में यहां संघ के जिला प्रचारक रहे। बरेली, लखीमपुर खीरी में भी संघ के लिए काम किया और साइकिल के जरिये सैकड़ों किमी तक यात्रा की।
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इन्होंने किया स्वागत
संस्कार भारती की ओर से अशोक खुराना, डॉ. विष्णु प्रकाश मिश्रा, डॉ. लता मिश्रा, राहुल चौबे, आर्येंद्र कुमार, डॉ. मदन मोहन लाल आदि ने बाबा योगेंद्र का स्वागत किया।
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आगरा से जोगीपुरा गुरुद्वारा सभाकक्ष पहुंचे बाबा योगेंद्र ने बताया कि नानाजी देशमुख, सर संघ चालक रहे रज्जू भैया, मशहूर नाटककार रामकुमार वर्मा के साथ उन्होंने 1981 में संस्कार भारती की स्थापना की। आगरा से शुरू हुआ संस्था का सफर आज छह देशों में फैल चुका है। संस्था की स्थापना का उद्देश्य भारतीय कला व संस्कृति को उसका उचित स्थान देना था। नवोदित कलाकारों को मंच देकर उनकी प्रतिभा को निखारने में संस्था पूरे मनोयोग से लगी है। आठ महीने पहले ही गुजरात में 650 कलाकारों को जोड़कर भव्य कार्यक्रम संस्था करा चुकी है। अब दिल्ली में नया भवन बन गया है। अधिकांश नीति निर्देश वहीं से जारी किए जाते हैं।
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बाबा योगेंद्र ने बताया कि नाटक हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं। इनके जरिये भारतीय समाज की समस्याओं, कुरीतियों, आदर्शों का मंचन करके समाज को जगाने का काम किया जाता है। कुछ मामलों में नाटकों की जगह फिल्मों ने ली। अब वेब सीरीज फिल्मों से भी आगे जा रही हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने स्वीकारा किया कि फिल्मों में सेंसरशिप से फिर भी आपत्तिजनक चीजें निकाल दी जाती हैं पर वेब सीरीज पर कोई अंकुश न होने से यहां हिंसा व आपत्तिजनक चीजें बिना कांट छांट दिखा दी जाती हैं। सभ्य समाज और युवा पीढ़ी के लिए यह घातक है। सरकार को भी इस बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने वादा किया कि बदायूं में नाटकों को बढ़ावा देने का प्रयास करेंगे। नुक्कड़ नाटकों से इसका शुभारंभ किया जाएगा। स्वीकार किया कि बदायूं से पुराना जुड़ाव है। वर्ष 1971 में यहां संघ के जिला प्रचारक रहे। बरेली, लखीमपुर खीरी में भी संघ के लिए काम किया और साइकिल के जरिये सैकड़ों किमी तक यात्रा की।
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इन्होंने किया स्वागत
संस्कार भारती की ओर से अशोक खुराना, डॉ. विष्णु प्रकाश मिश्रा, डॉ. लता मिश्रा, राहुल चौबे, आर्येंद्र कुमार, डॉ. मदन मोहन लाल आदि ने बाबा योगेंद्र का स्वागत किया।