{"_id":"64c41d978bfcedec0e045fb2","slug":"walls-left-no-roof-living-by-putting-foil-badaun-news-c-123-1-sbly1001-1719-2023-07-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: दीवारें बचीं न छत... पन्नी डालकर हो रहा गुजारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: दीवारें बचीं न छत... पन्नी डालकर हो रहा गुजारा
विज्ञापन
कुंवरपाल, ग्राम सकुर्रा।
बाढ़ का कहर : गांवों में पानी और कीचड़ के बीच ग्रामीणों का रहना हो रहा दूभर
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। बाढ़ की वजह से गांवों के हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। शुक्रवार को कुछ लोग मजबूरी में अपने जानवराें को चराने के लिए खेतों की ओर ले गए, जहां पर पानी कम था लेकिन कमलू नगला में एक भैंस दलदल में फंस गई। उसे काफी मुश्किल के बाद निकाला गया। वहीं गांवों में कहीं पर पानी भर गया है तो कहीं कीचड़ के बीच ग्रामीणों का रहना दूभर हो गया है। स्थिति इतनी खराब है कि ग्रामीण पन्नी डालकर रह रहें हैं।
गंगा के घटते-बढ़ते जलस्तर से ग्रामीणों को काफी परेशानी हो रही है। पिछले दिनों सहसवान व उसहैत क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ का पानी भर गया था। बाद में गंगा का जलस्तर कम होने पर लोगाें ने गांव की ओर फिर रुख किया। अधिकतर लोग फिर गांवों में रहने लगे हैं। इधर, सहसवान क्षेत्र के गांव खागी नगला, परशुराम नगला, वीर सहाय नगला, टोटपु्र करसरी, सकुर्रा, धापड़ गांवों से अब भी पानी नहीं निकला है।
ग्रामीण रामभरोसे, सत्यपाल, कुंवरसेन, श्याम बिहारी आदि का कहना है कि गांव में पानी भरा हुआ है, इसलिए बच्चों पर निगाह रखनी पड़ती है। अकेले कहीं पर नहीं भेजते। धूप पड़ने पर गांव में उमस बढ़ जाती है, इससे काफी दिक्कत होती है। वहीं उसहैत क्षेत्र के कमलू नगला का भी यही हाल है।
विज्ञापन
शुक्रवार को ग्रामीण अपने जानवरों को चराने के लिए खेत पर ले गए। जहां पर पानी औसतन कम था, ऐसे में ग्रामीणों के जानवर चर रहे थे। इस बीच एक भैंस वहां पर दलदल में फंस गई। ग्रामीणों को उसे निकलने में बहुत दिक्कत हुई। ठाकुरी नगला में मिट्टी के बने कई घरों की दीवारें बह गईं हैं तो छत भी नहीं बची है। लकड़ियों के सहारे पिन्नी डालकर जैसे-तैसे ग्रामीण जीवन-यापन कर रहे हैं।
-
डर के साए में जी रहे ग्रामीण
उसहैत। ग्रामीणों के पास कोई काम नहीं रहा गया है, ऐसे में उनका अधिकांश समय गांव में खाली कट रहा है, उनके आगे यह भी मजबूरी है कि वह काम के लिए आसपास के गांवों में नहीं जा सकते, क्योंकि वहां पर भी ऐसे ही हालात है। ऐसे में वह जैसे-तैसे गुजारा कर रहे हैं।
-
प्रशासन नहीं कर रहा मदद
बाढ़ के दौरान होने वाली दिक्कतें किसी से भी नहीं छिपी है और न हम लोगों के हालात, ऐसे में प्रशासन को हम लोगों को इस समय ज्यादा से ज्यादा मदद करनी चाहिए, पर ऐसा नहीं हो पा रहा है। खाने-पीने की काफी दिक्कत हो रही हैं।
-कुंवरपाल
-
बाढ़ की वजह से लगभग सब कुछ नष्ट हो गया है। हम लोगोें के खाने से लेकर जानवरों के चारे तक का संकट पैदा हो गया है। गांव में कई परिवार ऐसे हैं, उनके पास एक समय का खाना तक सही से नसीब नहीं हो पा रहा है।
-ओमपाल
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। बाढ़ की वजह से गांवों के हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। शुक्रवार को कुछ लोग मजबूरी में अपने जानवराें को चराने के लिए खेतों की ओर ले गए, जहां पर पानी कम था लेकिन कमलू नगला में एक भैंस दलदल में फंस गई। उसे काफी मुश्किल के बाद निकाला गया। वहीं गांवों में कहीं पर पानी भर गया है तो कहीं कीचड़ के बीच ग्रामीणों का रहना दूभर हो गया है। स्थिति इतनी खराब है कि ग्रामीण पन्नी डालकर रह रहें हैं।
गंगा के घटते-बढ़ते जलस्तर से ग्रामीणों को काफी परेशानी हो रही है। पिछले दिनों सहसवान व उसहैत क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ का पानी भर गया था। बाद में गंगा का जलस्तर कम होने पर लोगाें ने गांव की ओर फिर रुख किया। अधिकतर लोग फिर गांवों में रहने लगे हैं। इधर, सहसवान क्षेत्र के गांव खागी नगला, परशुराम नगला, वीर सहाय नगला, टोटपु्र करसरी, सकुर्रा, धापड़ गांवों से अब भी पानी नहीं निकला है।
विज्ञापन
ग्रामीण रामभरोसे, सत्यपाल, कुंवरसेन, श्याम बिहारी आदि का कहना है कि गांव में पानी भरा हुआ है, इसलिए बच्चों पर निगाह रखनी पड़ती है। अकेले कहीं पर नहीं भेजते। धूप पड़ने पर गांव में उमस बढ़ जाती है, इससे काफी दिक्कत होती है। वहीं उसहैत क्षेत्र के कमलू नगला का भी यही हाल है।
विज्ञापन
शुक्रवार को ग्रामीण अपने जानवरों को चराने के लिए खेत पर ले गए। जहां पर पानी औसतन कम था, ऐसे में ग्रामीणों के जानवर चर रहे थे। इस बीच एक भैंस वहां पर दलदल में फंस गई। ग्रामीणों को उसे निकलने में बहुत दिक्कत हुई। ठाकुरी नगला में मिट्टी के बने कई घरों की दीवारें बह गईं हैं तो छत भी नहीं बची है। लकड़ियों के सहारे पिन्नी डालकर जैसे-तैसे ग्रामीण जीवन-यापन कर रहे हैं।
-
डर के साए में जी रहे ग्रामीण
उसहैत। ग्रामीणों के पास कोई काम नहीं रहा गया है, ऐसे में उनका अधिकांश समय गांव में खाली कट रहा है, उनके आगे यह भी मजबूरी है कि वह काम के लिए आसपास के गांवों में नहीं जा सकते, क्योंकि वहां पर भी ऐसे ही हालात है। ऐसे में वह जैसे-तैसे गुजारा कर रहे हैं।
-
प्रशासन नहीं कर रहा मदद
बाढ़ के दौरान होने वाली दिक्कतें किसी से भी नहीं छिपी है और न हम लोगों के हालात, ऐसे में प्रशासन को हम लोगों को इस समय ज्यादा से ज्यादा मदद करनी चाहिए, पर ऐसा नहीं हो पा रहा है। खाने-पीने की काफी दिक्कत हो रही हैं।
-कुंवरपाल
-
बाढ़ की वजह से लगभग सब कुछ नष्ट हो गया है। हम लोगोें के खाने से लेकर जानवरों के चारे तक का संकट पैदा हो गया है। गांव में कई परिवार ऐसे हैं, उनके पास एक समय का खाना तक सही से नसीब नहीं हो पा रहा है।
-ओमपाल

कुंवरपाल, ग्राम सकुर्रा।

कुंवरपाल, ग्राम सकुर्रा।

कुंवरपाल, ग्राम सकुर्रा।