Budaun News: सड़क की मांग को लेकर तीन दिन से भूख हड़ताल पर बैठा पूरा गांव, कई ग्रामीणों की हालत बिगड़ी
बदायूं के ढोरनपुर गांव के ग्रामीण बीते लगभग एक दशक से पक्की सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का सब्र बुधवार को जवाब दे गया। पूरा गांव सड़क बनवाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गया। तीसरे दिन भी भूख हड़ताल जारी रही।
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बदायूं के आसफपुर क्षेत्र में गांव ढोरनपुर के ग्रामीणों की भूख हड़ताल शुक्रवार को भी जारी रही। पक्की सड़क की मांग को लेकर बुधवार से भूख हड़ताल पर बैठे ग्रामीणों की हालत बिगड़नी लगी है, लेकिन तीसरे दिन कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। गांव ढोरनपुर को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली कच्ची सड़क आजादी के बाद से आज तक नहीं बनी है। इसके चलते यहां के लोग ऊबड़-खाबड़ कीचड़ युक्त रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं।
आसफपुर-चंदौसी मार्ग पर ग्राम नगला जैत के सामने से होकर लगभग तीन किलोमीटर लंबी रास्ता जाता है। ढोरनपुर गांव के ग्रामीणों का कहना है आज तक यह सड़क पक्की नहीं बनी है। कच्चे और टूटे मार्ग से होकर लोगों को गुजरना पड़ता है। बीते लगभग एक दशक से इस सड़क को बनाने की मांग की जा रही है। ग्रामीणों का सब्र बुधवार को जवाब दे गया। पूरा गांव सड़क पक्की बनवाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गया। गुरुवार को दो ग्रामीणों की हालत बिगड़ गई थी।
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ग्रामीणों का कहना है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में वोट के नाम पर अब तक जनप्रतिनिधियों द्वारा झूठे वादे किए जाते रहे हैं। गांव तक पहुंचने के लिए कोई सीधा और पक्का रास्ता न होने से बच्चों की उच्चशिक्षा संभव नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों का तो यहां तक कहना है कि युवक और युवतियों के विवाह के लिए लोग गांव आने तक से कतराते हैं। बरसात के दिनों में गांव टापू जैसा बन जाता है। इसी नाराजगी को लेकर ढोरनपुर के ग्रामीण भूख हड़ताल पर बैठ हुए हैं।
चुनाव के दौरान भी उठा था मुद्दा
बिसौली के एसडीएम और तहसीलदार विजय कुमार शुक्ला ने बुधवार देर शाम मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। उनकी सिर्फ एक ही मांग थी कि पहले पूरी पक्की सड़क बनवाओ, फिर कोई बात सुनेंगे। यहां बता दें कि बीते लोकसभा चुनावों का बहिष्कार करने की ग्रामीणों की घोषणा से प्रशासन में खलबली मच गई थी।
करते रहे मांग, मिलता रहा कोरा आश्वासन
ऐसा नहीं है कि गांव ढोरनपुर के ग्रामीणों ने इस कच्चे मार्ग पर पक्की सड़क बनवाने की मांग पहली बार की हो। इससे पहले भी ग्रामीण समय-समय पर मांग करते आ रहे हैं, लेकिन आजतक उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मिले आश्वासन और आज तक सड़क निर्माण का कार्य न होने के चलते अब ग्रामीण आश्वासन के बाद भी मानने के लिए तैयार नहीं।