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Budaun News: सड़कों पर ‘यमदूत’ बनकर दौड़ रहीं बिना मानक की एंबुलेंस, खतरे में जान
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शही में मानकों की अनदेखी कर दौड़ रहीं एंबुलेंस। संवाद
- फोटो : रोडवेज बस स्टैंड पर खड़ीं बसें।
बदायूं। जिले की सड़कों पर दौड़तीं कई एंबुलेंस में जरूरी मानक पूरे नहीं हैं। कहीं छोटे चार पहिया वाहनों को एंबुलेंस का रूप दिया गया है। इनमें न तो प्राथमिक उपचार की सुविधाएं हैं और न ही प्रशिक्षित स्टाफ। एंबुलेंस लिखे होने के कारण इनकी कोई जांच भी नहीं करता। जिले में पंजीकृत 141 एंबुलेंस हैं। जिनमें स्वास्थ्य विभाग 108 की 36 व 102 की 41 की एंबुलेंस शामिल हैं।
स्वास्थ्य विभाग की 102 और 108 सेवा के अलावा जिले की सड़कों पर करीब सौ एंबुलेंस दौड़ रहीं हैं। जिले में संचालित अधिकांश निजी अस्पतालों की एंबुलेंस में मानक का पालन नहीं किया जा रहा है। एंबुलेंस का कोई वाजिब किराया भी तय नहीं है। दस से बीस किमी तक जाने पर भी दो से ढाई हजार रुपये लिए जाते हैं।
बुधवार को निजी एंबुलेंस को देखा गया तो सामने आया कि एक मात्र चालक ही एंबुलेंस में मिले। ऑक्सीजन है, लेकिन प्राथमिक उपचार की कोई किट नहीं मिली। यह एंबुलेंस किसी न किसी अस्पताल से पंजीकृत दिखाई गईं हैं।
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बिना फिटनेस दौड़ रहीं एंबुलेंस पर हो चुकी है कार्रवाई
पूर्व में सीएमओ कार्यालय की ओर से जिले में संचालित निजी एंबुलेंस चाहे वह अस्पतालों की हों या फिर स्वतंत्र रूप से संचालित हो रही हैं उन्हें पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए थे। एंबुलेंस केवल चालकों के भरोसे संचालित होने और जरूरी संसाधनों के अभाव में अधिकांश एंबुलेंस पंजीकरण से दूरी बनाए हुए हैं। पूर्व में करीब दस एंबुलेंस सीज भी की गईं थीं। बिसौली में रात के समय तीमारदार से अधिक किराया वसूल करने के मामले में भी परिवहन विभाग की टीम ने जांच कर कार्रवाई की थी।
ये हैं मानक
एंबुलेंस में मरीज के लिए प्रारंभिक उपचार की व्यवस्था होनी चाहिए। जरूरी दवाएं के साथ स्टेचर, स्टेथेस्कोप ट्रैक्शन डिवाइस, कार्डियक मॉनीटर, बीपी मॉनीटर, ऑक्सीजन सिलिंडर एंबुलेंस में होना चाहिए। रास्ते में मदद के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी भी साथ में होना जरूरी है। एंबुलेंस लिखे अधिकांश वाहन सिर्फ टैक्सी ही हैं। इसमें मरीजों की जिंदगी भगवान भरोसे ही होती है।
अधिकांश एंबुलेंस में न प्रशिक्षित स्टॉफ और न मेडिकल किट
परिवहन विभाग के पास पंजीकृत निजी व सरकारी एंबुलेंस की संख्या 141 है। हकीकत में यह संख्या दोगुने से भी ज्यादा है। इनकी जांच लंबे समय से नहीं हुई है। इससे इतर जिले में बिसौली, दातागंज, बिल्सी, सहसवान, बिनावर, वजीरगंज में निजी एंबुलेंस संचालित हो रहीं हैं। निजी और मानक विहीन अस्पतालों या उससे कुछ दूर पर खड़ी रहने वाली एंबुलेंस की मदद से मरीजों को ले जाया जा रहा है। अधिकांश एंबुलेंस में न तो प्रशिक्षित स्टॉफ है और न मेडिकल किट बॉक्स और अग्निशमन यंत्र हैं।
सरकारी अस्पतालों के सामने निजी एंबुलेंस खड़ी होने और मरीजों से मनमाने रुपये वसूलने के मामले में जांच की गई थी। इसमें दस एंबुलेंस पर कार्रवाई की गई थी। रूटीन चेकिंग में बिना फिटनेस एंबुलेंस मिलने पर चालान किए जाते हैं। - अम्बरीश कुमार, एआरटीओ, प्रवर्तन
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स्वास्थ्य विभाग की 102 और 108 सेवा के अलावा जिले की सड़कों पर करीब सौ एंबुलेंस दौड़ रहीं हैं। जिले में संचालित अधिकांश निजी अस्पतालों की एंबुलेंस में मानक का पालन नहीं किया जा रहा है। एंबुलेंस का कोई वाजिब किराया भी तय नहीं है। दस से बीस किमी तक जाने पर भी दो से ढाई हजार रुपये लिए जाते हैं।
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बुधवार को निजी एंबुलेंस को देखा गया तो सामने आया कि एक मात्र चालक ही एंबुलेंस में मिले। ऑक्सीजन है, लेकिन प्राथमिक उपचार की कोई किट नहीं मिली। यह एंबुलेंस किसी न किसी अस्पताल से पंजीकृत दिखाई गईं हैं।
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बिना फिटनेस दौड़ रहीं एंबुलेंस पर हो चुकी है कार्रवाई
पूर्व में सीएमओ कार्यालय की ओर से जिले में संचालित निजी एंबुलेंस चाहे वह अस्पतालों की हों या फिर स्वतंत्र रूप से संचालित हो रही हैं उन्हें पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए थे। एंबुलेंस केवल चालकों के भरोसे संचालित होने और जरूरी संसाधनों के अभाव में अधिकांश एंबुलेंस पंजीकरण से दूरी बनाए हुए हैं। पूर्व में करीब दस एंबुलेंस सीज भी की गईं थीं। बिसौली में रात के समय तीमारदार से अधिक किराया वसूल करने के मामले में भी परिवहन विभाग की टीम ने जांच कर कार्रवाई की थी।
ये हैं मानक
एंबुलेंस में मरीज के लिए प्रारंभिक उपचार की व्यवस्था होनी चाहिए। जरूरी दवाएं के साथ स्टेचर, स्टेथेस्कोप ट्रैक्शन डिवाइस, कार्डियक मॉनीटर, बीपी मॉनीटर, ऑक्सीजन सिलिंडर एंबुलेंस में होना चाहिए। रास्ते में मदद के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी भी साथ में होना जरूरी है। एंबुलेंस लिखे अधिकांश वाहन सिर्फ टैक्सी ही हैं। इसमें मरीजों की जिंदगी भगवान भरोसे ही होती है।
अधिकांश एंबुलेंस में न प्रशिक्षित स्टॉफ और न मेडिकल किट
परिवहन विभाग के पास पंजीकृत निजी व सरकारी एंबुलेंस की संख्या 141 है। हकीकत में यह संख्या दोगुने से भी ज्यादा है। इनकी जांच लंबे समय से नहीं हुई है। इससे इतर जिले में बिसौली, दातागंज, बिल्सी, सहसवान, बिनावर, वजीरगंज में निजी एंबुलेंस संचालित हो रहीं हैं। निजी और मानक विहीन अस्पतालों या उससे कुछ दूर पर खड़ी रहने वाली एंबुलेंस की मदद से मरीजों को ले जाया जा रहा है। अधिकांश एंबुलेंस में न तो प्रशिक्षित स्टॉफ है और न मेडिकल किट बॉक्स और अग्निशमन यंत्र हैं।
सरकारी अस्पतालों के सामने निजी एंबुलेंस खड़ी होने और मरीजों से मनमाने रुपये वसूलने के मामले में जांच की गई थी। इसमें दस एंबुलेंस पर कार्रवाई की गई थी। रूटीन चेकिंग में बिना फिटनेस एंबुलेंस मिलने पर चालान किए जाते हैं। - अम्बरीश कुमार, एआरटीओ, प्रवर्तन