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Budaun News: जिले में बिना रेडियोलाॅजिस्ट चल रहे अल्ट्रासाउंड सेंटर
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बदायूं। जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से 65 अल्ट्रासाउंड सेंटर पंजीकृत हैं। इनमें पांच ही ऐसे सेंटर हैं जिनपर रेडियोलाजिस्ट मौजूद रहते हैं। 60 सेंटर बिना रेडियोलाजिस्ट के ही संचालित हो रहे हैं। यहां अप्रशिक्षित कर्मचारी अल्ट्रासाउंड कर लोगों को गलत रिपोर्ट देने का काम कर रहे हैं। इसमें स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहे हैं। डीएम के निर्देश पर इनको चेक भी किया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
जनपद में जांचों के नाम पर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। बिना रेडियोलॉजिस्ट के ही तमाम अल्ट्रासाउंड सेंटर चल रहे हैं। बीते दिनों डीएम ने जिले में सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच कराई थी। तब महज पांच अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर रेडियोलॉजिस्ट मिले थे। अधिकांश सेंटरों पर रेडियोलॉजिस्ट हैं ही नहीं।
लाइसेंस देने के नाम पर होता है खेल
सीएमओ कार्यालय में नर्सिंगहोम व अल्ट्रासांउड सेंटर का लाइसेंस देने वाले पटल से ही मानकों की अनदेखी का खेल शुरू हो जाता है। विभाग के ही कर्मचारी बिचौलिये की भूमिका निभा रहे हैं। वे लाइसेंस बनवाने का ठेका लेकर एमबीबीएस डॉक्टर व रेडियोलॉजिस्ट के कागजात भी उपलब्ध करा देते हैं। कागजी खानापूर्ति पूरी कर अल्ट्रासाउंड का लाइसेंस दे दिया जाता है। यह नहीं देखा जाता कि रेडियोलॉजिस्ट अल्ट्रासाउंड सेंटर पर बैठ भी रहे हैं या नहीं।
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सीएमओ ने किया सीज, नोडल अधिकारी ने खुलवाया
-वजीरगंज कस्बे में एसबीआई बैंक के सामने किराए के मकान में चल रहे एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर बिना रेडियोलाॅजिस्ट के ही रिपोर्ट देने व लिंग परीक्षण करने के आरोप में सीएमओ ने इसे सीज किया था। बाद में नोडल अधिकारी ने इसे खुलवा दिया।
जिले में 65 अल्ट्रासाउंड सेंटर हैं। जहां-जहां अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं, वहां जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।- डा. रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ
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जनपद में जांचों के नाम पर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। बिना रेडियोलॉजिस्ट के ही तमाम अल्ट्रासाउंड सेंटर चल रहे हैं। बीते दिनों डीएम ने जिले में सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच कराई थी। तब महज पांच अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर रेडियोलॉजिस्ट मिले थे। अधिकांश सेंटरों पर रेडियोलॉजिस्ट हैं ही नहीं।
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लाइसेंस देने के नाम पर होता है खेल
सीएमओ कार्यालय में नर्सिंगहोम व अल्ट्रासांउड सेंटर का लाइसेंस देने वाले पटल से ही मानकों की अनदेखी का खेल शुरू हो जाता है। विभाग के ही कर्मचारी बिचौलिये की भूमिका निभा रहे हैं। वे लाइसेंस बनवाने का ठेका लेकर एमबीबीएस डॉक्टर व रेडियोलॉजिस्ट के कागजात भी उपलब्ध करा देते हैं। कागजी खानापूर्ति पूरी कर अल्ट्रासाउंड का लाइसेंस दे दिया जाता है। यह नहीं देखा जाता कि रेडियोलॉजिस्ट अल्ट्रासाउंड सेंटर पर बैठ भी रहे हैं या नहीं।
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सीएमओ ने किया सीज, नोडल अधिकारी ने खुलवाया
-वजीरगंज कस्बे में एसबीआई बैंक के सामने किराए के मकान में चल रहे एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर बिना रेडियोलाॅजिस्ट के ही रिपोर्ट देने व लिंग परीक्षण करने के आरोप में सीएमओ ने इसे सीज किया था। बाद में नोडल अधिकारी ने इसे खुलवा दिया।
जिले में 65 अल्ट्रासाउंड सेंटर हैं। जहां-जहां अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं, वहां जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।- डा. रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ