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Budaun News: नाले के पानी से दो सौ बीघा खेत डूबे, फसलें तबाह

Thu, 26 Mar 2026 11:58 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Updated Thu, 26 Mar 2026 11:58 PM IST
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Two hundred bighas of land were submerged in the drain water, crops were destroyed.
उझानी में नाले के पास के खेतों में भरा पानी। संवाद
उझानी। नगर पालिका के नाले का पानी का निकास बंद हो जाने से सड़क किनारे समेत नरऊ की तरफ के करीब दो सौ बीघा खेत डूब गए हैं। फसलें तो पहले ही तबाह हो गई। इस बार किसानों को बोआई करने का भी मौका नहीं मिल पाया। परेशान किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।
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खेतों में घुटनों तक नाले का पानी भर जाने से सबसे ज्यादा नुकसान में कस्बे के रामलीला नगला, गांव नरऊ और मीहलालनगला के किसान हैं। करीब डेढ़ महीने से खेतों में भरे पानी के निकास के लिए किसानों को कोई तरीका नजर नहीं आया तो उन्होंने नगर पालिका के अफसरों से भी शिकायत की।
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नरऊ निवासी कमल प्रताप सिंह कहते हैं कि उनके करीब 32 बीघा रकबा में खेती चौपट हो चुकी है। नाले में ओवरफ्लो थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दिनों तीन-चार किसानों ने अपने खेतों के पास डोरे बांधने की कोशिश की, लेकिन नाले में पानी प्रवाह बढ़ा तो डोरे भी बह गए।
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नाले के पानी से डूबे खेत मालिकों में रामलीला नगला इलाके के चिरौंजीलाल, अशोक, मुकेश बाबू, राजकुमार और मुन्नालाल, मीहलालनगला के रूपराम, चंद्रपाल और बांकेलाल तो नरऊ निवासी ग्रामीणों में लोकेंद्रपाल, शैलेंद्र, हरवेंद्र और योगेंद्र सिंह के नाम भी शामिल हैं। किसानों ने बताया कि पिछले महीने उनके खेतों में सब्जी फसलों के अलावा सरसों भी थी। फसलों को काटकर चारा बनाने का भी मौका नहीं मिल पाया था।
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नवनिर्मित स्कूल की बाउंड्री को भी खतरा
उझानी से कादरचौक के बीच गांव नरऊ के मोड़ के पास पिछले महीने निजी स्कूल का निर्माण कार्य पूरा हुआ था। दो सप्ताह से स्कूल के पीछे और उत्तरी साइड में बाउंड्री तक घुटनों तक नाले का पानी भर गया है। बाउंड्री ढहने की आशंका बनी हुई है। दूसरी तरफ मिनी एमआरएफ सेंटर की दीवारों तक भी पानी नजर आने लगा है।
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एसटीपी प्लांट स्वीकृत, धनराशि का इंतजार
- नाले का पानी नरऊ के तालाब में गिरने की वजह से सैकड़ों ग्रामीणों को दो दशक तक परेशानी का सामना करना पड़ता रहा है। इसे लेकर कांग्रेस के तत्कालीन जिलाध्यक्ष ओमकार सिंह ने आंदोलन किया था। इसके बाद जल निगम ने एसटीपी प्लांट का निर्माण कराने के लिए स्वीकृति प्रदान की थी। करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाले पूरे प्रोजेक्ट के लिए अभी धनराशि अवमुक्त नहीं की गई है।
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- नरऊ के आसपास इलाके में नाले के पानी से दिक्कत का समाधान तो एसटीपी प्लांट का निर्माण के साथ ही होगा। प्लांट बन जाने के बाद नाले का पानी भैंसोर नदी में गिरने लगेगा।- हरीश कुमार त्यागी, सफाई निरीक्षक, नगर पालिका परिषद

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यह बोले लोग-
- नाले का पानी खेतों के रास्ते उनके स्कूल परिसर तक पहुंच गया है। पानी की रफ्तार ऐसी ही रही तो किसानों के साथ नुकसान उन्हें भी उठाना पड़ेगा। स्कूल की बाउंड्री भी क्षतिग्रस्त हो सकती है। - शीलचंद्र यादव, स्कूल संचालक
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- पिछले साल आंदोलन के बाद नरऊ के तालाब में नाले का पानी गिरने से रोक तो दिया गया, लेकिन अब दूसरे छोर के किसान परेशान हैं। उनके करीब 30 बीघा खेत जलमग्न हैं। बोआई भी नहीं कर सकते।- शैलेंद्र कुमार सिंह, किसान

उझानी में नाले के पास के खेतों में भरा पानी। संवाद

उझानी में नाले के पास के खेतों में भरा पानी। संवाद

उझानी में नाले के पास के खेतों में भरा पानी। संवाद

उझानी में नाले के पास के खेतों में भरा पानी। संवाद

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