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कोषागार घोटाले में तत्कालीन तहसीदारों पर भी गिरी गाज, निलंबित
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बदायूं। दातागंज कोषागार में हुए पांच करोड़ के घोटाले में एक के बाद एक कार्रवाई होती जा रही है। पिछले दिनों जहां मुख्यमंत्री ने कोषाधिकारी समेत 10 तहसीलदारों को निलंबित किया था, वहीं आज इस मामले में दातागंज में तहसीलदार पद पर तैनात रहे महेश प्रकाश समेत अन्य को भी निलंबित कर दिया है।
प्रदेश में चल रहे 46 उपकोषागारों को शासन ने नवंबर 2019 में बंद किया था। इसमें बदायूं जिले का दातागंज उपकोषागार भी शामिल था। बंद होने के बाद में प्रदेश के सभी जिलों में रिकॉर्ड के मिलान के बाद में चार्ज अन्य अधिकारियों को दे दिया था, लेकिन यहां पर रोकड़िया हरीश कुमार चार्ज देने में आनाकानी कर रहा था। यह जानकारी डीएम के पास पहुंची, तो उन्होंने जांच के निर्देश दिए। इसमें बरेली के एआइजी स्टांप, बदायूं एडीएम एफआर, वरिष्ठ कोषाधिकारी और एसडीएम दातागंज की टीम ने दो दिन तक रिकॉर्ड और स्टांप का मिलान किया। इसमें अप्रैल 2014 से लेकर नवंबर 2019 तक पांच करोड़ से अधिक की हेराफेरी का मामला समाने आया। इसके बाद में रोकड़िया हरीश कुमार और लेखाकार राजेश सगर के खिलाफ गबन में रिपोर्ट दर्ज करा दी। इसमें रोकड़िया जेल में बंद हैं, जबकि सहायक अभी भी पुलिस गिरफ्त से दूर है।
मामला शासन के संज्ञान में आने के बाद में पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने तीन वरिष्ठ कोषाधिकारी और 10 तहसीलदारों को निलंबित कर दिया था। वहीं अब इसमें तत्कालीन तहसीलदार महेश प्रकाश, सतीश चंद्र, अशोक कुमार गुप्ता व मनोज प्रकाश को भी निलंबित कर दिया गया है।
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दो रजिस्टर पर मेनटेन किया जाता था बहीखाता
दातागंज में तैनात रोकड़िया विभाग की बारीकियों से पूरी तरह से परिचित था, जिसकी वजह से रोकड़िया ने दो तरह से रजिस्टर बन रखे थे। इसके माध्यम से वह अधिकारियों को गुमराह करता रहता था और इसी कारण वह हेराफेरी करने में कामयाब हो गया।
उपकोषागार मामले में यहां से संपूर्ण रिपोर्ट शासन को भेज दी गई थी। इसके बाद से ही शासन स्तर से कार्रवाई की जा रही है। इसी के तहत शासन ने तत्कालीन तहसीलदारों पर कार्रवाई की गई है।
- कुमार प्रशांत, डीएम
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प्रदेश में चल रहे 46 उपकोषागारों को शासन ने नवंबर 2019 में बंद किया था। इसमें बदायूं जिले का दातागंज उपकोषागार भी शामिल था। बंद होने के बाद में प्रदेश के सभी जिलों में रिकॉर्ड के मिलान के बाद में चार्ज अन्य अधिकारियों को दे दिया था, लेकिन यहां पर रोकड़िया हरीश कुमार चार्ज देने में आनाकानी कर रहा था। यह जानकारी डीएम के पास पहुंची, तो उन्होंने जांच के निर्देश दिए। इसमें बरेली के एआइजी स्टांप, बदायूं एडीएम एफआर, वरिष्ठ कोषाधिकारी और एसडीएम दातागंज की टीम ने दो दिन तक रिकॉर्ड और स्टांप का मिलान किया। इसमें अप्रैल 2014 से लेकर नवंबर 2019 तक पांच करोड़ से अधिक की हेराफेरी का मामला समाने आया। इसके बाद में रोकड़िया हरीश कुमार और लेखाकार राजेश सगर के खिलाफ गबन में रिपोर्ट दर्ज करा दी। इसमें रोकड़िया जेल में बंद हैं, जबकि सहायक अभी भी पुलिस गिरफ्त से दूर है।
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मामला शासन के संज्ञान में आने के बाद में पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने तीन वरिष्ठ कोषाधिकारी और 10 तहसीलदारों को निलंबित कर दिया था। वहीं अब इसमें तत्कालीन तहसीलदार महेश प्रकाश, सतीश चंद्र, अशोक कुमार गुप्ता व मनोज प्रकाश को भी निलंबित कर दिया गया है।
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दातागंज में तैनात रोकड़िया विभाग की बारीकियों से पूरी तरह से परिचित था, जिसकी वजह से रोकड़िया ने दो तरह से रजिस्टर बन रखे थे। इसके माध्यम से वह अधिकारियों को गुमराह करता रहता था और इसी कारण वह हेराफेरी करने में कामयाब हो गया।
उपकोषागार मामले में यहां से संपूर्ण रिपोर्ट शासन को भेज दी गई थी। इसके बाद से ही शासन स्तर से कार्रवाई की जा रही है। इसी के तहत शासन ने तत्कालीन तहसीलदारों पर कार्रवाई की गई है।
- कुमार प्रशांत, डीएम