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‘शिशु विकास की महत्वपूर्ण कड़ी है’
ब्यूरो, अमर उजाला बदायूं
Updated Wed, 19 Aug 2015 07:16 PM IST
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शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष मुख्य अतिथि अमृतपाल सिंह और अध्यक्ष हरचरन लाल सक्सेना ने दीप प्रज्वलन कर तथा सतीश शर्मा, डॉ. नवरतन सिंह, प्रताप सिंह, प्यारे सिंह यादव ने पुष्पार्चन किया।
संकुल प्रमुख कालिका प्रसाद गंगवार ने अभ्यास वर्ग के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि आचार्य, विद्यालय, और शिशु विकास की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। आचार्य का प्रथम कर्तव्य है कि जीवन के हर पल का सदुपयोग कर स्वयं और विद्यालय का विकास कर भावी पीढ़ी का निर्माण करें। कार्यक्रम अध्यक्ष हरचरन लाल सक्सेना बोले-सवच्छ, उज्जवल पवित्र श्रद्धाभाव के साथ सरस्वती शिशु मंदिर के आचार्य शिशु के सर्वांगीण विकास में भूमिका निभाते हैं।
प्रशिक्षण वर्ग में सतीश चंद्र शर्मा ने हिंदी, डॉ. राधेश्याम सिंह ने अंग्रेजी, डॉ. दिनेश सिंह ने संस्कृत, प्रताप सिंह ने सामाजिक विषय अमृत पाल सिंह ने गणित, संजय मिश्र द्वारा आचार्यों को विषय की जानकारी दी गई। समापन सत्र में व्यवस्थापक मदन लाल राजपूत ने श्रेष्ठ शिक्षण में स्वाध्याय का महत्वपूर्ण स्थान है। विद्वान कोई ऊपर से नहीं आता, स्वाध्याय के माध्यम से ही श्रेष्ठता को पाता है। प्रधानाचार्य सनत कुमार शर्मा ने परिचय कराया। आभार व्यवस्थापक ने व्यक्त किया। अशोक गोस्वामी ने 110 आचार्यों को 110 आचार्यों को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर राम निवास राजपूत, डॉ. रविशरण सिंह चौहान, ओमपाल सिंह, दयाराम यादव, प्रवेश सिंह, कालीचरन, लीलाधर, राम प्रसाद, भगवानसरण, श्रवण कुमार, दिलीप कुमार वैश्य, राज कुमार सिंह सेंगर समेत संकु ल के सैकड़ों आचार्य उपस्थित रहे।
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संकुल प्रमुख कालिका प्रसाद गंगवार ने अभ्यास वर्ग के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि आचार्य, विद्यालय, और शिशु विकास की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। आचार्य का प्रथम कर्तव्य है कि जीवन के हर पल का सदुपयोग कर स्वयं और विद्यालय का विकास कर भावी पीढ़ी का निर्माण करें। कार्यक्रम अध्यक्ष हरचरन लाल सक्सेना बोले-सवच्छ, उज्जवल पवित्र श्रद्धाभाव के साथ सरस्वती शिशु मंदिर के आचार्य शिशु के सर्वांगीण विकास में भूमिका निभाते हैं।
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प्रशिक्षण वर्ग में सतीश चंद्र शर्मा ने हिंदी, डॉ. राधेश्याम सिंह ने अंग्रेजी, डॉ. दिनेश सिंह ने संस्कृत, प्रताप सिंह ने सामाजिक विषय अमृत पाल सिंह ने गणित, संजय मिश्र द्वारा आचार्यों को विषय की जानकारी दी गई। समापन सत्र में व्यवस्थापक मदन लाल राजपूत ने श्रेष्ठ शिक्षण में स्वाध्याय का महत्वपूर्ण स्थान है। विद्वान कोई ऊपर से नहीं आता, स्वाध्याय के माध्यम से ही श्रेष्ठता को पाता है। प्रधानाचार्य सनत कुमार शर्मा ने परिचय कराया। आभार व्यवस्थापक ने व्यक्त किया। अशोक गोस्वामी ने 110 आचार्यों को 110 आचार्यों को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर राम निवास राजपूत, डॉ. रविशरण सिंह चौहान, ओमपाल सिंह, दयाराम यादव, प्रवेश सिंह, कालीचरन, लीलाधर, राम प्रसाद, भगवानसरण, श्रवण कुमार, दिलीप कुमार वैश्य, राज कुमार सिंह सेंगर समेत संकु ल के सैकड़ों आचार्य उपस्थित रहे।
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