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Budaun News: कागजों में खुले शौचालय, व्यवस्था में फैली लापरवाही की गंदगी
Tue, 18 Nov 2025 11:01 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Tue, 18 Nov 2025 11:01 PM IST
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उझानी के आंबेडकर चौराहे पर बने सामुदायिक शौचालय के दरवाजे पर लटका ताला। संवाद
बदायूं। स्वच्छता और सार्वजनिक सुविधा के नाम पर जिले में बड़ी संख्या में शौचालयों का निर्माण तो करा दिया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद निराशाजनक है। जिले में कुल 1037 सार्वजनिक शौचालय बनाए गए हैं, जिनके रखरखाव और संचालन पर हर माह 62 लाख 22 हजार रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद अधिकतर शौचालय केवल कागजों में ही खुले दिखाए जाते हैं, जबकि मौके पर उनके गेट पर ताले लटके रहते हैं। विश्व शौचालय दिवस के अवसर पर की गई पड़ताल में धरातल की स्थिति बेहद निराशाजनक मिली।
जिले की 1037 ग्राम पंचायतों में शासन के निर्देश पर एक-एक सार्वजनिक शौचालय बनाया गया, ताकि लोग खुले में शौच जाने से बच सकें। प्रत्येक शौचालय पर एक केयर टेकर तैनात किया गया है, जिनकी जिम्मेदारी सफाई और संचालन की है। लेकिन, अधिकांश स्थानों पर न तो नियमित सफाई हो रही है और न ही शौचालय खोले जा रहे हैं। कई जगह पानी की व्यवस्था तक नहीं है। हालत यह है कि लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी लोग मजबूरी में खेतों, खाली प्लॉटों और सड़कों के किनारे शौच के लिए जा रहे हैं। कई शौचालयों का निर्माण तो हो गया, लेकिन उन्हें चालू कराने और संचालन कराने की जिम्मेदारी सिर्फ फाइलों तक सीमित है।
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कागजों में ‘चालू’, लेकिन जमीन पर बंद शौचालय
फोटो-19
दातागंज। ग्राम पंचायत रुदेली भुडेली में सार्वजनिक शौचालय का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह धार्मिक स्थल के पास बनाया गया, जिस पर आपत्ति भी हुई थी। शौचालय पर केयर टेकर भी तैनात है, लेकिन ग्रामीण सुखदेव और रामौतार का कहना है कि बनने के बाद से इसे आज तक नहीं खोला गया है, जबकि केयर टेकर को हर माह मानदेय मिलता है। संवाद
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दिन में ताला लटका मिला, लोग परेशान
फोटो-18
उझानी। अंबेडकर चौराहे के पास सामुदायिक शौचालय पर सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक खुलने का समय लिखा है। केयर टेकर नितिश तैनात है, लेकिन मंगलवार दोपहर में यहां ताला लटका मिला। ऐसे में लोग इधर-उधर कोना तलाशते दिखे। संवाद
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शहर में भी बंद पड़ा शौचालय
फोटो-21,22
बदायूं। रानी लक्ष्मीबाई चौक से एसपी सिटी आवास की ओर जाने वाली सड़क पर नगर पालिका द्वारा 2021-22 में आठ सीट वाला शौचालय और चार सीटों वाला यूरिनल बनाया गया था। कुछ समय चला, लेकिन बाद में बंद हो गया। बीच-बीच में कभी-कभार ही खुलता है, बाकी समय पर ताला ही रहता है। मिशन इंग्लिश स्कूल के पास बने महिला शौचालय पर भी मंगलवार को ताला मिला। संवाद
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घर में बनवा लिया सार्वजनिक शौचालय
फोटो-20
दातागंज। तहसील क्षेत्र के गांव कनकपुर में राहगीरों की सुविधा के लिए सार्वजनिक शौचालय का निर्माण अनुमोदित हुआ था, लेकिन तत्कालीन प्रधान बिहारी लाल ने इसे अपने घर में ही बनवा लिया। इससे यह आज भी आम लोगों के उपयोग में नहीं आ पा रहा है। पूर्व प्रधान का कहना है कि गांव में कहीं जगह नहीं मिली, इसलिए घर में बनवाया। किसी को उपयोग करने से मना नहीं है।
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फैक्ट फाइल
6000 रुपये प्रति माह केयर टेकर का मानदेय दिया जाना है।
3000 रुपये साल में एक बार मरम्मत मद में खर्च कर सकते हैं।
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11,509 नए व्यक्तिगत शौचालय बनाने का लक्ष्य
बदायूं। इस वर्ष जिले को 11,509 व्यक्तिगत शौचालय बनाने का लक्ष्य मिला है। धनराशि मिलते ही लाभार्थियों को दो किश्तों में 12,000 रुपये दिए जाएंगे। वर्ष 2024-25 में 25,925 का लक्ष्य मिला था, जिसमें से 23,148 लाभार्थियों को प्रथम किस्त जारी की जा चुकी है। वहीं जिले के 1473 राजस्व गांवों में से 1467 को ओडीएफ प्लस घोषित किया जा चुका है। वहीं 846 गांव ओडीएफ प्लस-प्लस भी हो चुके हैं। संवाद
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वर्जन
सभी को निर्देश दिए गए हैं कि सार्वजनिक शौचालय बंद न रहें, खासकर सुबह-शाम। यदि कहीं शौचालय बंद पाया जाता है तो संबंधित से जवाब तलब किया जाएगा।
— यावर अब्बास, डीपीआरओ
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अक्सर बंद रहता है गांधी पार्क के पास पिंक शौचालय
बिल्सी। नगर के कछला मार्ग स्थित गांधी पार्क के निकट बनाया गया महिलाओं के लिए पिंक शौचालय अक्सर बंद रहने से इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। शौचालय के बाहर ताला लटका रहने के कारण वहां आने-जाने वाली महिलाओं को भारी परेशानी हो रही है। लोगों का कहना है कि नगर पालिका की ओर से महिला सुविधा के लिए लाखों रुपये खर्च कर पिंक शौचालय बनवाया गया था, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते यह अधिकांश समय बंद रहता है। चेयरमैन ज्ञानदेवी सागर ने बताया कि जांच कराकर दोषी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। संवाद
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जिले की 1037 ग्राम पंचायतों में शासन के निर्देश पर एक-एक सार्वजनिक शौचालय बनाया गया, ताकि लोग खुले में शौच जाने से बच सकें। प्रत्येक शौचालय पर एक केयर टेकर तैनात किया गया है, जिनकी जिम्मेदारी सफाई और संचालन की है। लेकिन, अधिकांश स्थानों पर न तो नियमित सफाई हो रही है और न ही शौचालय खोले जा रहे हैं। कई जगह पानी की व्यवस्था तक नहीं है। हालत यह है कि लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी लोग मजबूरी में खेतों, खाली प्लॉटों और सड़कों के किनारे शौच के लिए जा रहे हैं। कई शौचालयों का निर्माण तो हो गया, लेकिन उन्हें चालू कराने और संचालन कराने की जिम्मेदारी सिर्फ फाइलों तक सीमित है।
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कागजों में ‘चालू’, लेकिन जमीन पर बंद शौचालय
फोटो-19
दातागंज। ग्राम पंचायत रुदेली भुडेली में सार्वजनिक शौचालय का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह धार्मिक स्थल के पास बनाया गया, जिस पर आपत्ति भी हुई थी। शौचालय पर केयर टेकर भी तैनात है, लेकिन ग्रामीण सुखदेव और रामौतार का कहना है कि बनने के बाद से इसे आज तक नहीं खोला गया है, जबकि केयर टेकर को हर माह मानदेय मिलता है। संवाद
दिन में ताला लटका मिला, लोग परेशान
फोटो-18
उझानी। अंबेडकर चौराहे के पास सामुदायिक शौचालय पर सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक खुलने का समय लिखा है। केयर टेकर नितिश तैनात है, लेकिन मंगलवार दोपहर में यहां ताला लटका मिला। ऐसे में लोग इधर-उधर कोना तलाशते दिखे। संवाद
शहर में भी बंद पड़ा शौचालय
फोटो-21,22
बदायूं। रानी लक्ष्मीबाई चौक से एसपी सिटी आवास की ओर जाने वाली सड़क पर नगर पालिका द्वारा 2021-22 में आठ सीट वाला शौचालय और चार सीटों वाला यूरिनल बनाया गया था। कुछ समय चला, लेकिन बाद में बंद हो गया। बीच-बीच में कभी-कभार ही खुलता है, बाकी समय पर ताला ही रहता है। मिशन इंग्लिश स्कूल के पास बने महिला शौचालय पर भी मंगलवार को ताला मिला। संवाद
घर में बनवा लिया सार्वजनिक शौचालय
फोटो-20
दातागंज। तहसील क्षेत्र के गांव कनकपुर में राहगीरों की सुविधा के लिए सार्वजनिक शौचालय का निर्माण अनुमोदित हुआ था, लेकिन तत्कालीन प्रधान बिहारी लाल ने इसे अपने घर में ही बनवा लिया। इससे यह आज भी आम लोगों के उपयोग में नहीं आ पा रहा है। पूर्व प्रधान का कहना है कि गांव में कहीं जगह नहीं मिली, इसलिए घर में बनवाया। किसी को उपयोग करने से मना नहीं है।
फैक्ट फाइल
6000 रुपये प्रति माह केयर टेकर का मानदेय दिया जाना है।
3000 रुपये साल में एक बार मरम्मत मद में खर्च कर सकते हैं।
11,509 नए व्यक्तिगत शौचालय बनाने का लक्ष्य
बदायूं। इस वर्ष जिले को 11,509 व्यक्तिगत शौचालय बनाने का लक्ष्य मिला है। धनराशि मिलते ही लाभार्थियों को दो किश्तों में 12,000 रुपये दिए जाएंगे। वर्ष 2024-25 में 25,925 का लक्ष्य मिला था, जिसमें से 23,148 लाभार्थियों को प्रथम किस्त जारी की जा चुकी है। वहीं जिले के 1473 राजस्व गांवों में से 1467 को ओडीएफ प्लस घोषित किया जा चुका है। वहीं 846 गांव ओडीएफ प्लस-प्लस भी हो चुके हैं। संवाद
वर्जन
सभी को निर्देश दिए गए हैं कि सार्वजनिक शौचालय बंद न रहें, खासकर सुबह-शाम। यदि कहीं शौचालय बंद पाया जाता है तो संबंधित से जवाब तलब किया जाएगा।
— यावर अब्बास, डीपीआरओ
अक्सर बंद रहता है गांधी पार्क के पास पिंक शौचालय
बिल्सी। नगर के कछला मार्ग स्थित गांधी पार्क के निकट बनाया गया महिलाओं के लिए पिंक शौचालय अक्सर बंद रहने से इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। शौचालय के बाहर ताला लटका रहने के कारण वहां आने-जाने वाली महिलाओं को भारी परेशानी हो रही है। लोगों का कहना है कि नगर पालिका की ओर से महिला सुविधा के लिए लाखों रुपये खर्च कर पिंक शौचालय बनवाया गया था, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते यह अधिकांश समय बंद रहता है। चेयरमैन ज्ञानदेवी सागर ने बताया कि जांच कराकर दोषी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। संवाद

उझानी के आंबेडकर चौराहे पर बने सामुदायिक शौचालय के दरवाजे पर लटका ताला। संवाद

उझानी के आंबेडकर चौराहे पर बने सामुदायिक शौचालय के दरवाजे पर लटका ताला। संवाद

उझानी के आंबेडकर चौराहे पर बने सामुदायिक शौचालय के दरवाजे पर लटका ताला। संवाद

उझानी के आंबेडकर चौराहे पर बने सामुदायिक शौचालय के दरवाजे पर लटका ताला। संवाद

उझानी के आंबेडकर चौराहे पर बने सामुदायिक शौचालय के दरवाजे पर लटका ताला। संवाद