Budaun News: एक ही मूर्ति में देवी मां के तीन स्वरूप... आस्था का केंद्र है मंगला माता मंदिर
आंवला मार्ग पर मां श्री राजराजेश्वरी मंगला माता का अति प्राचीन मंदिर है। यहां स्थापित मूर्ति में देवी मां के तीन स्वरूप हैं। यह तीन देवियां मां काली, महालक्ष्मी, मां सरस्वती हैं।
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बदायूं में वजीरगंज कस्बे से दो किलोमीटर दूर आंवला मार्ग पर मां श्री राजराजेश्वरी मंगला माता का अति प्राचीन मंदिर है। पौराणिक कथाओं में इसका उल्लेख मिलता है। बताया जाता है कि मंदिर में स्थापित माता रानी की एक मूर्ति में ही तीन अलग-अलग स्वरूप हैं।
मंदिर के बारे में बताया जाता है कि मां का मंदिर जिस टीले पर स्थित है, वहां बहुत पहले मई भवानीगंज नाम की एक रियासत हुआ करती थी। इसे किसी राजा ने आक्रमण करके पूरी तरह तहस-नहस कर दिया था। बहुत लोग मारे गए थे। जो बच गए, वे सबकुछ छोड़कर जान बचाकर भाग गए। धीरे-धीरे टूटे-फूटे मकानों ने टीले का रूप ले लिया।
गांव हो गया तहस-नहस, मठ को नहीं पहुंची थी क्षति
बताते हैं कि इसी रियासत में देवी मां का एक मठ था। पूरा गांव तो तहस-नहस हो गया, लेकिन मां के मठ को कोई क्षति नही पहुंची, कुछ अंतराल के बाद मठ आश्चर्य जनक रूप से टीले के ऊपर आ गया। इसे देवी मां का चमत्कार मानकर आसपास गांवों के लोगों ने जीर्णोद्धार करके मां की पूजा अर्चना आरंभ कर दी।
लोगों का कहना है कि मंदिर में देवी मां की बहुत ही प्राचीन मूर्ति है। मूर्ति में तीन देवियों का स्वरूप बड़े आकार में है। यह तीन देवियां मां काली, धन की देवी महालक्ष्मी, ज्ञान की देवी मां सरस्वती हैं।
इसके अतिरिक्त इन मूर्ति में अनेक छोटे-बड़े प्रतिरूप और भी है, जो देखने में अलग-अलग दिखते हैं, मगर आज तक कोई भी भक्त उनकी सही गिनती नहीं कर पाया है। लोगों के अनुसार, जितनी बार मां के इन प्रतिरूपों को गिना जाता है, हर बार संख्या भिन्न आती है।