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Budaun News: सगे भाई-बहन समेत तीन बच्चों की रहस्यमय हालात में मौत
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मृतक अमित। फाइल फोटो
परिवार वालों ने कहा-तीनों ने खा ली चिता के पास रखी कोई वस्तु खा
संवाद न्यूज एजेंसी
उझानी/ कछला (बदायूं)। गंगा किनारे अधबुझी चिता के पास रखी कोई वस्तु खाकर घर लौटे सगे भाई-बहन और उनके फुफेरे भाई की हालत बिगड़ गई। परिजनों ने उपचार कराया पर कोई सुधार नहीं हुआ। दो दिन में एक-एक कर तीनों की मौत हो गई।
अमित (07) और उसकी बहन बबिता (05) कोतवाली क्षेत्र के गांव नूरगंज पूर्वी निवासी नन्हे लाल की संतान थे। पिता नन्हे के मुताबिक-बृहस्पतिवार सुबह दोनों अपने फुफेरे भाई बरेली के थाना आंवला के ग्राम गोंटिया निवासी सोनू (08) पुत्र महेशचंद्र के साथ घर से करीब 250 मीटर दूर गंगा किनारे खेलने के लिए निकल गए। जब लौटे तो अजीब हरकतें कर रहे थे। पूछने पर सोनू ने बताया कि तीनों ने एक अधबुझी चिता के पास से कोई वस्तु उठाकर खा ली, जिसके बाद ही ऐसी स्थिति हो गई।
शुक्रवार को नन्हे ने अमित को एक निजी चिकित्सक को दिखाया। बाद में कुछ देर बाद ही उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद परिवार वाले इलाज के लिए सोनू को बरेली और बबिता को कासगंज ले गए। शुक्रवार शाम को ही सोनू की भी बरेली में मौत हो गई। बबिता को राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उसने शनिवार शाम पांच बजे अंतिम सांस ली।
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सोनू के शव को परिजन पैतृक गांव गोंटिया ले गए। जबकि अमित और बबिता का गंगाघाट पर अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों ने बच्चों के शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए पुलिस से संपर्क नहीं किया। इस बात की पुष्टि प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने भी की।
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बच्चों की मौत परिवार वालों के लिए बनी पहेली
तीन बच्चों की रहस्यमय हालात में मौत के मामले में उनके परिजन कुछ भी समझ नहीं पा रहे हैं। बच्चों ने अधबुझी चिता के पास से क्या खाया या फिर कुछ ऐसा देख लिया, जिससे वे डर गए। इसका जवाब किसी पर नहीं है।
गंगा किनारे से घर लौटने के बाद सोनू ने तो चिता के पास से उठाकर कुछ खा लेने की बात बताई, लेकिन अमित और उसकी छोटी बहन बबिता डर-सहमे रहे। बताते हैं कि बच्चों की हालत बिगड़ने पर परिवार के कुछ सदस्य ग्रामीणों के साथ गंगा किनारे चिता के पास भी पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें राख के अलावा कुछ और नजर नहीं आया। नन्हे ने बताया कि कासगंज में बबिता को लेकर जब वह एक निजी क्लीनिक पर पहुंचा तो डॉक्टर ने बच्ची के अवसाद में होने की जानकारी दी। ग्रामीणों के कहने पर परिवार के लोगों ने बृहस्पतिवार दोपहर में एक बाबा से झाड़ फूंक भी कराई पर कोई फायदा नहीं हुआ। अमित चार भाई-बहनों में बबिता से बड़ा था। परिजनों को इस बात का भी मलाल है कि उनके साथ नन्हे की बहन रूपवती का बेटा सोनू भी चल बसा।
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चिकित्साधीक्षक ने कहा- बच्चों को लगा किसी बात की सदमा
तीन बच्चों की मौत के मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्साधीक्षक राजकुमार गंगवार ने कहा-बच्चों को उनके पास नहीं लाया गया पर जो लक्षण बताए जा रहे हैं इससे साफ है कोई ऐसा सदमा बच्चों को लगा कि उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई, उन्होंने खाना-पीना तक छोड़ दिया। बच्चों ने विषाक्त वस्तु खाई होती तो लक्षण कुछ अलग होते।
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संवाद न्यूज एजेंसी
उझानी/ कछला (बदायूं)। गंगा किनारे अधबुझी चिता के पास रखी कोई वस्तु खाकर घर लौटे सगे भाई-बहन और उनके फुफेरे भाई की हालत बिगड़ गई। परिजनों ने उपचार कराया पर कोई सुधार नहीं हुआ। दो दिन में एक-एक कर तीनों की मौत हो गई।
अमित (07) और उसकी बहन बबिता (05) कोतवाली क्षेत्र के गांव नूरगंज पूर्वी निवासी नन्हे लाल की संतान थे। पिता नन्हे के मुताबिक-बृहस्पतिवार सुबह दोनों अपने फुफेरे भाई बरेली के थाना आंवला के ग्राम गोंटिया निवासी सोनू (08) पुत्र महेशचंद्र के साथ घर से करीब 250 मीटर दूर गंगा किनारे खेलने के लिए निकल गए। जब लौटे तो अजीब हरकतें कर रहे थे। पूछने पर सोनू ने बताया कि तीनों ने एक अधबुझी चिता के पास से कोई वस्तु उठाकर खा ली, जिसके बाद ही ऐसी स्थिति हो गई।
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शुक्रवार को नन्हे ने अमित को एक निजी चिकित्सक को दिखाया। बाद में कुछ देर बाद ही उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद परिवार वाले इलाज के लिए सोनू को बरेली और बबिता को कासगंज ले गए। शुक्रवार शाम को ही सोनू की भी बरेली में मौत हो गई। बबिता को राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उसने शनिवार शाम पांच बजे अंतिम सांस ली।
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सोनू के शव को परिजन पैतृक गांव गोंटिया ले गए। जबकि अमित और बबिता का गंगाघाट पर अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों ने बच्चों के शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए पुलिस से संपर्क नहीं किया। इस बात की पुष्टि प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने भी की।
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बच्चों की मौत परिवार वालों के लिए बनी पहेली
तीन बच्चों की रहस्यमय हालात में मौत के मामले में उनके परिजन कुछ भी समझ नहीं पा रहे हैं। बच्चों ने अधबुझी चिता के पास से क्या खाया या फिर कुछ ऐसा देख लिया, जिससे वे डर गए। इसका जवाब किसी पर नहीं है।
गंगा किनारे से घर लौटने के बाद सोनू ने तो चिता के पास से उठाकर कुछ खा लेने की बात बताई, लेकिन अमित और उसकी छोटी बहन बबिता डर-सहमे रहे। बताते हैं कि बच्चों की हालत बिगड़ने पर परिवार के कुछ सदस्य ग्रामीणों के साथ गंगा किनारे चिता के पास भी पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें राख के अलावा कुछ और नजर नहीं आया। नन्हे ने बताया कि कासगंज में बबिता को लेकर जब वह एक निजी क्लीनिक पर पहुंचा तो डॉक्टर ने बच्ची के अवसाद में होने की जानकारी दी। ग्रामीणों के कहने पर परिवार के लोगों ने बृहस्पतिवार दोपहर में एक बाबा से झाड़ फूंक भी कराई पर कोई फायदा नहीं हुआ। अमित चार भाई-बहनों में बबिता से बड़ा था। परिजनों को इस बात का भी मलाल है कि उनके साथ नन्हे की बहन रूपवती का बेटा सोनू भी चल बसा।
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चिकित्साधीक्षक ने कहा- बच्चों को लगा किसी बात की सदमा
तीन बच्चों की मौत के मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्साधीक्षक राजकुमार गंगवार ने कहा-बच्चों को उनके पास नहीं लाया गया पर जो लक्षण बताए जा रहे हैं इससे साफ है कोई ऐसा सदमा बच्चों को लगा कि उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई, उन्होंने खाना-पीना तक छोड़ दिया। बच्चों ने विषाक्त वस्तु खाई होती तो लक्षण कुछ अलग होते।

मृतक अमित। फाइल फोटो

मृतक अमित। फाइल फोटो