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नाम के लिए हैं तीन नए ब्लॉक
अमर उजाला ब्यूरो,बदायूं
Updated Thu, 20 Jul 2017 06:16 PM IST
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ग्रामीण
- फोटो : amarujala
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यहां रहने वाले गांव वालों को किसी भी कार्य के लिए लगानी पड़ती है पुराने ब्लाक के मुख्यालय तक दौड़
सपा शासनकाल में जिले में बनाए गए तीन ब्लाक दबतोरी, नाधा और बिनावर शायद कागजों में ही हैं। इन ब्लाकों में शामिल गांवों के लोगों को अपने किसी भी कार्य के लिए आज भी अपने पुराने ब्लाक मुख्यालय तक दौड़ना पड़ रही है। हालांकि पूर्व सरकार की घोषणा के बाद जिला प्रशासन ने इन ब्लाकों में अस्थायी रूप से स्टाफ की तैनाती कर दी थी लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद इन नवसृजित ब्लाकों का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। जिले के आला अफसरों का भी कहना है कि शासन से इन ब्लाकों के बारे में कोई गाइड लाइन नहीं मिली है, लिहाजा जिन ब्लाकों को तोड़कर इन्हें बनाया गया वहीं पर जनता के कार्य हो रहे हैं। सपा सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम समय में जिले की जनता की मांग पर ब्लाक सालारपुर, जगत के गांवों को मिलाकर बिनावर, आसफपुर और बिसौली ब्लाक के गांवों को शामिल करके दबतोरी तथा सहसवान, इस्लामनगर तथा दहगवां के गांवों को मिलाकर नया नाधा ब्लाक बनाया था। इन ब्लाकों को बनाए जाने के संबंध में 20 दिसंबर 16 को सरकार ने गजट किया था। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भाई धर्मेंद्र यादव बदायूं के सांसद हैं सो सरकार ने तत्काल ही नवसृजति ब्लाकों में काम करने के आदेश जारी कर दिए थे। तत्कालीन डीएम पवन कुमार ने इन ब्लाकों के संचालन को अस्थायी रूप से बीडीओ समेत अन्य स्टाफ की तैनाती कर दी। अधिकारियों को इस बात की हिदायत भी दी थी कि नवसृजित गांवों की जनता की समस्याओं को वहीं पर निपटाया जाए। कुछ समय तक अधिकारियों-कर्मचारियों ने नवसृजित ब्लाकों में काम भी किया लेकिन सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद अधिकारियों ने नवसृजित ब्लाकों को ऐसा भुला दिया है जैसे वह बने ही नहीं हैं। इन ब्लाक क्षेत्र के लोगों का कहना है कि उन्हें ब्लाक से कोई फायदा नहीं हो रहा है, उन्हें पहले की तरह पूर्व के ब्लाक मुख्यालय पर ही अपने किसी भी कार्य को दौड़ना पड़ रहा है।
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सपा शासनकाल में जिले में बनाए गए तीन ब्लाक दबतोरी, नाधा और बिनावर शायद कागजों में ही हैं। इन ब्लाकों में शामिल गांवों के लोगों को अपने किसी भी कार्य के लिए आज भी अपने पुराने ब्लाक मुख्यालय तक दौड़ना पड़ रही है। हालांकि पूर्व सरकार की घोषणा के बाद जिला प्रशासन ने इन ब्लाकों में अस्थायी रूप से स्टाफ की तैनाती कर दी थी लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद इन नवसृजित ब्लाकों का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। जिले के आला अफसरों का भी कहना है कि शासन से इन ब्लाकों के बारे में कोई गाइड लाइन नहीं मिली है, लिहाजा जिन ब्लाकों को तोड़कर इन्हें बनाया गया वहीं पर जनता के कार्य हो रहे हैं। सपा सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम समय में जिले की जनता की मांग पर ब्लाक सालारपुर, जगत के गांवों को मिलाकर बिनावर, आसफपुर और बिसौली ब्लाक के गांवों को शामिल करके दबतोरी तथा सहसवान, इस्लामनगर तथा दहगवां के गांवों को मिलाकर नया नाधा ब्लाक बनाया था। इन ब्लाकों को बनाए जाने के संबंध में 20 दिसंबर 16 को सरकार ने गजट किया था। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भाई धर्मेंद्र यादव बदायूं के सांसद हैं सो सरकार ने तत्काल ही नवसृजति ब्लाकों में काम करने के आदेश जारी कर दिए थे। तत्कालीन डीएम पवन कुमार ने इन ब्लाकों के संचालन को अस्थायी रूप से बीडीओ समेत अन्य स्टाफ की तैनाती कर दी। अधिकारियों को इस बात की हिदायत भी दी थी कि नवसृजित गांवों की जनता की समस्याओं को वहीं पर निपटाया जाए। कुछ समय तक अधिकारियों-कर्मचारियों ने नवसृजित ब्लाकों में काम भी किया लेकिन सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद अधिकारियों ने नवसृजित ब्लाकों को ऐसा भुला दिया है जैसे वह बने ही नहीं हैं। इन ब्लाक क्षेत्र के लोगों का कहना है कि उन्हें ब्लाक से कोई फायदा नहीं हो रहा है, उन्हें पहले की तरह पूर्व के ब्लाक मुख्यालय पर ही अपने किसी भी कार्य को दौड़ना पड़ रहा है।