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...यह दोहरा मापदंड क्यों
Dataganj
Updated Sat, 25 Apr 2015 07:40 PM IST
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शिक्षक के पद पर समायोजन के दौरान मामला प्रकाश में आने पर फर्जी मार्कशीट के आधार पर एक शिक्षामित्र की सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति की गई, वहीं इस इलाके में एक ही परिवार के तीन लोग फर्जी नाम से शिक्षामित्र की नौकरी कर रहे हैं। काबिलेगौर है कि मामला कोर्ट में होने के बाद भी इन शिक्षामित्रों की शिक्षक के पद पर समायोजन को काउंसिलिंग भी कर दी गई है।
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फर्जी तरीके से नौकरी करने का यह मामला क्षेत्र पंचायत उसावां के ग्राम पंचायत उघौली का है। यहां की प्रधान सोमवती और उनके पति सोक सिंह ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों और डीएम, शासन तक शिकायत की। कहा था कि उनकी ग्राम पंचायत में छेंदा नगला के प्राथमिक विद्यालय पर आराम सिंह शिक्षामित्र के पद पर हैं। इसी ग्राम पंचायत के मजरा मंशा नगला के प्राथमिक विद्यालय में इनके सगे भाई कृष्णपाल सिंह और उघौली पर आराम सिंह की पत्नी ऊषा कुमारी शिक्षामित्र के पद पर कार्यरत हैं। ग्राम प्रधान का आरोप है कि आराम सिंह ने जो नौकरी के लिए कागजात दाखिल किए हैं, उसमें अपने पिता का नाम राजेंद्र सिंह दर्शाया है, जबकि उनके पिता का वास्तविक नाम रामेश्वर सिंह है। आराम सिंह के नाम एक दोनाली बंदूक का लाइसेंस भी है। इसमें उनके पिता का नाम रामेश्वर सिंह है। इसी तरह इनके सगे भाई कृष्णपाल के पिता का नाम हेतराम दर्शाया गया है। जबकि यह भी रामेश्वर सिंह के ही बेटे हैं। तहसील अभिलेख, वोटर लिस्ट आदि सरकारी दस्तावेजों में दोनों के पिता का नाम रामेश्वर सिंह ही है। इसी तरह आराम सिंह की पत्नी ऊषा कुमारी पुत्री भगवान सिंह के नाम से नौकरी कर रहीं हैं, जबकि इनका वास्तविक नाम मीना कुमारी है। पिता का नाम रामसिंह है। यहीं ऊषा कुमारी वर्ष 1995 में मीना कुमारी के नाम से प्रधान पद का चुनाव लड़ चुकी हैं।
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सोक सिंह ने बताया कि तीनों के फर्जी होने के पुष्ट प्रमाण सभी अधिकारियों के दिए हैं। शासन स्तर तक दौड़ भी लगाई है, लेकिन कुछ कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। मजबूरन न्यायालय में वाद दायर किया। सोक सिंह ने सवाल उठाया है कि फर्जी डिग्री पकड़ी जाने पर एक शिक्षामित्र की सेवाएं समाप्ति और उससे मानदेय के वसूली की संस्तुति की गई है, तो इस प्रकरण में अधिकारी क्यों खामोश रहे हैं? उल्टे तीनों की शिक्षक के पद पर समायोजन के लिए काउंसलिग कराई जा रही है।
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अगर इस तरह का मामला उनके सामने आता है तो वह संबंधित के कागजातों की बारीकी से जांच पड़ताल कराएंगे। यदि मामला फर्जी पाया जाता तो जो कार्रवाई बनती है, वह की जाएगी। इसमें किसी तरह की कोताही नहीं बरती जाएगी।
-आनंद प्रकाश शर्मा, प्राचार्य डायट बदायूं
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काउंसिलिंग में फर्जीवाड़ा पकड़ा तो भागा शिक्षामित्र
बदायूं। काउंसिलिंग में फर्जीवाड़ा का एक और मामला शनिवार को सामने आया। हुआ यूं कि जिस समय काउंसिलिंग चल रही थी, तभी एक शिक्षामित्र अपने कागजात लेकर पहुंचा। काउंसिलिंग कर रहे शिक्षा विभाग के अधिकारियों को उसके अभिलेखों पर शक हुआ। शक सही निकला। एक मार्कशीट फर्जी साबित होने पर संबंधित शिक्षामित्र वहां से खिसक लिया। इस बात की डायट में काफी चर्चा रही। डायट प्राचार्य आनंद प्रकाश शर्मा ने कहा है कि सभी समायोजित होने वाले शिक्षामित्रों के अभिलेखों की बारीकी से जांच कराई जाएगी।