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Budaun News: धार्मिक उन्माद का यह सिला हमको मिला, आस्थाएं जी रहीं हैं मर रहा आदमी

Thu, 01 May 2025 01:17 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 01 May 2025 01:17 AM IST
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This is the reward we got for religious fanaticism, beliefs are living and man is dying
दबतोरी। गांव मुसिया नगला में परशुराम जयंती के अवसर पर भगवान परशुराम सेवा समिति की ओर से कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। बिसौली से आए कवि श्रीदत्त शर्मा ने पढ़ा कि धार्मिक उन्माद का ही यह सिला हमको मिला, आस्थाएं जी रही हैं मर रहा है आदमी। डॉ. उमाशंकर राही ने पढ़ा देखेंगे आतंकी कीड़े कितना कब तक अकड़ेंगे, मछली को तो पकड़ लिया है मगरमच्छ भी पकड़ेंगे।
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हास्य कवि देवेंद्र दीक्षित शूल ने पढ़ा चारों तरफ हो शूल मत दामन बचाइए, आप भी गुलाब जैसे मुस्कुराइए। कवि डॉ. अरविंद धवल ने पढ़ा ओज पुंज तुम शिखर शौर्य के ऊर्जा के दिनमान, तुम्हारी जय हो ज्ञान निधान जय जय परशुराम भगवान। सुनील समर्थ, कवि अभीक्ष पाठक, शैलेंद्र मिश्र, प्रमोद ने समां बांधी। कवि उज्ज्वल वशिष्ठ ने अपने गीतों-गजलों से समां बांध दिया। कवियों ने खूब तालियां बटोंरी। कवि सम्मेलन में धर्मेंद्र मिश्रा, मोहित शंखधार, राम भरोसे लाल, कुशमेंद्र ,अभय शर्मा, डॉ. दीपक श्रोतिय आदि थे।
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