फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Thirty thousand monkeys are troubling in Badaun, life in the face

बचाओ वीर हनुमान...बदायूं में तीस हजार बंदर, लोगों की हलक में फंसी जान

Sun, 17 Apr 2022 12:04 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 17 Apr 2022 12:04 AM IST
विज्ञापन
Thirty thousand monkeys are troubling in Badaun, life in the face
रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो पर बंदर। संवाद - फोटो : BADAUN
बदायूं। आज हनुमान जयंती है। आमतौर पर लोग वानरों को ही बजरंगवली का स्वरूप मानते हैं इस लिहाज से उन्हें मारने-पीटने में संकोच करते हैं बल्कि मंगलवार व शनिवार को उन्हें गुड़ चना भी खिलाते हैं। इसी से आस्था के बीच शहर से लेकर देहात तक बंदरों की ज्यादा संख्या भी सितम ढा रही है। उसावां में बीती रात इनके हमले से एक बालक की छत से गिरकर मौत हो गई। बंदरों की आधिकारिक गणना तो नहीं हुई पर वन विभाग जिले में करीब तीस हजार बंदरों की संख्या का अनुमान लगाता है। इस मामले में वन विभाग व नगर निकाय स्तर पर जिम्मेदार मौन हैं। इसलिए बंदरों को पकड़वाकर जंगल में छुड़वाने के उपाय भी नहीं किए जा रहे हैं।
विज्ञापन

उसावां के वार्ड नंबर नौ के संतोष कश्यप के दस वर्ष के बेटे दिलीप की बंदरों के हमलों में मौत होने के बाद सवाल उठ रहा है कि बंदरों के हमलों के बाद भी जिम्मेदार क्या कर रहे हैं। वन विभाग के जिम्मेदार कहते हैं कि जिले में कभी बंदरों की गणना नहीं की गई, अनुमानित बंदरों की संख्या 68 हजार के आस-पास मानते हैं। पिछले एक साल की बात करें तो हर दो महीने में बंदरों के हमले में एक व्यक्ति की जान जा रही है। जिला अस्पताल का रिकार्ड देखें तो हर रोज 100 से ज्यादा लोगों को एंटी रैबीज वैक्सीन की जरूरत हो रही है। यह वैक्सीन बंदर और कुत्तों के हमले में घायल लोगों को दी जाती है।
विज्ञापन

जिले में सदर, बिसौली, दातागंज, सहसवान वन रेंज हैं, बंदरों की बात करें तो सबसे ज्यादा बंदर सदर और दातागंज वन रेंज में ही हैं। इसके बाद बिसौली और सहसवान रेंज आते हैं, लेकिन वन विभाग के पास किसी तरह के अधिकारिक आंकड़े नहीं हैं। बंदरों के हमलों से आमजन को बचाने के लिए कोई योजना भी विभाग के पास नहीं है। जिम्मेदार अधिकारियों के साथ पशुओं के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता भी इस पर जवाब देने से कतरा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

यह है व्यवस्था
अगर कोई ग्राम पंचायत, नगर पालिका या नगर पंचायत वन विभाग से बंदरों के आतंक संबंधी शिकायत करती है तो वन विभाग आगे की कार्रवाई चालू करता है। इसके तहत बंदरों को पकड़कर दूसरे स्थानों पर छोड़ना और उनकी नसबंदी शामिल है, लेकिन अब तक जिले की किसी नगर पालिका, नगर पंचायत या फिर ग्राम पंचायत ने वन विभाग से बंदरों को लेकर कोई शिकायत ही नहीं की। दरअसल बंदरों का मामला वन विभाग के अधीन आता है और कुत्तों की बात करें तो यह जिम्मेदारी स्थानीय निकाय की हो जाती है।
इनकी जा चुकी जान, कई घायल भी हुए
उसावां कस्बे में बीती रात दिलीप नाम के बच्चे की छत से गिरकर मौत हो गई थी। वह छत पर खेल रहा था। तभी बंदरों ने उसे घेर लिया। बंदरों के हमले से बचने को वह छत से नीचे गिर पड़ा। उसकी मौत हो गई। 19 सितंबर 2021 को मुजरिया के दरियापुर गांव के गुलफाम सिंह यादव छत पर टहलने गए थे। तभी बंदरों का झुंड आ गया और उन पर हमला कर दिया। उनकी छत से गिरकर मौत हो गई। इससे एक दिन पहले बिल्सी में गीता नाम की महिला बंदरों से बचने के चक्कर में छत से गिरकर घायल हो गईं थीं। दस सितंबर 2020 को सहसवान के नयागंज मोहल्ले में जनार्दन भारद्वाज की बंदरों के हमले में छत से गिरकर मौत हो गई थी। एक महीने पहले बिल्सी की महिला भाजपा नेता बंदरों के हमले में घायल हुईं थीं।
डीएफओ की बात-
प्राचीन काल से ही बंदर मनुष्यों के साथ रहते आए हैं, बंदर हमारे मित्र जीव हैं, वह इस तरह हमला नहीं करते कि किसी की जान चली गई। बंदरों की कभी गणना नहीं की गई है, अनुमानित संख्या की बात करें तो जिले में 30 हजार से ज्यादा बंदर हो सकते हैं। कभी किसी स्थानीय निकाय ने बंदरों को लेकर कोई शिकायत भी दर्ज नहीं कराई, वह आवेदन करें तो हम किसी एजेंसी से बंदरों को पकड़वाने की अनुमति दे देंगे। - अशोक कुमार सिंह, डीएफओ
पालिकाध्यक्ष बोलीं-
- यह बात सही है कि बंदरों की बढ़ती संख्या से लोगों को दिक्कत हो रही है। पालिका के पास बंदरों को पकड़वाने के लिए फंड नहीं है। इस मामले में वन विभाग को ही पहल करनी चाहिए। वन विभाग चाहे तो अपनी ओर से बंदरों को पकड़कर जंगल में छुड़वाने की योजना पर काम कर सकता है, पालिका अपने स्तर से सहयोग कर देगी। - दीपमाला गोयल, पालिकाध्यक्ष

पशु प्रेमी का तर्क
बंदर और कुत्तों को लेकर बच्चों को पहले से ही भयभीत कर दिया जाता है कि बचकर जाना बंदर आ जाएगा या कुत्ता काट लेगा, लेकिन बच्चों से यह नहीं कहा जाता कि वह हमारे मित्र हैं। उनके साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार किया जाए। उसावां की घटना दुखद है। जंगलों को काटा जा रहा है तो वन्य जीव आखिर कहां जाएंगे। -विकेंद्र शर्मा, पशु प्रेमी

रेलवे स्टेशन पर घूमते बंदर। संवाद

रेलवे स्टेशन पर घूमते बंदर। संवाद- फोटो : BADAUN

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed