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विकास की राह में थोड़ी खुशी, ढेरों गम
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं
Updated Thu, 31 Dec 2015 08:47 PM IST
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उम्मीद के हिसाब से नहीं पकड़ी वर्ष-2015 ने रफ्तार
शहरियों को पीड़ा देती रहीं बदहाल सड़कें
बदायूं। सीमावर्ती क्षेत्ररें में भले ही सड़कों की दशा सुधारने का काम किया गया हो, लेकिन शहर के अंदर की सड़कों ने लोगों को साल भर रुलाया। वीआईपी इलाकों में जख्मी सड़कों पर एक्सीडेंट खूब हुए, जिनकी चपेट में आकर लोग घायल होते रहे। बावजूद इसके नगर पालिका परिषद ने सड़कों को दुरुस्त कराने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। शहर की मुख्य सड़कों की हालत सबसे ज्यादा बदहाल रही।
सपना ही बना रहा सॉलिडवेस्ट मैनेजमेंट प्लांट
बदायूं। ग्राम पंचायत उतरना के मजरा सहपुरा में कूड़ा निस्तारण के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का निर्माण 2011 में शुरू हुआ था। इसे दिसंबर 2012 तक चालू हो जाना था। कार्यदायी संस्था एटूजेड और अकार्डो हाइड्रोएयर के बीच विवाद की वजह से काम फंस गया। करोड़ों रुपये की मशीनें जंग खा रही हैं। विवाद के चलते सॉलिडवेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का अपना इस साल भी पूरा नहीं हो सका।
जाम के झाम से जूझते रहे लोग
बदायूं। शहर में हुए अतिक्रमण और ट्रैफिक पुलिस के ध्यान न देने से लोग सालभर जाम के जंजाल में फंसे नजर आए। शहर के मुख्य स्थानों के साथ ही जिले के बिसौली, उसावां, सहसवान आदि उप नगरों में लोग जाम से जूझते दिखे। जाम से निजात दिलाने के लिए न तो प्रशासनिक अधिकारियों ने ध्यान दिया और न ही ट्रैफिक पुलिस सजग दिखी।
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यात्रियों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा रेलवे विभाग
बदायूं। बरेली से कासगंज रूट पर ट्रेनों का आवागमन तो बमुश्किल शुरू हो गया, लेकिन इस रूट पर ट्रेनों के न बढ़ाए जाने से जिले के लोग परेशान ही रहे। ट्रेन से बरेली तक की दूरी को तय करने में ढाई से तीन घंटों का समय लगा। इससे लोगों ने रोडवेज को प्राथमिकता दी। रेलवे स्टेशन का सौंदर्यीकरण और फुटओवर ब्रिज का निर्माण कार्य भी पूरा नहीं हो सका।
न बनी वर्कशॉप और न ही बिल्सी का बस अड्डा
बदायूं। सुविधाओं के नजरिए से परिवहन विभाग भी यात्रियों से खिलवाड़ करता नजर आया। जिले के कई रूटों पर बसों का संचालन बढ़ाए जाने की मांग की जाती रही। इसके साथ ही दातागंज क्षेत्र में रोडवेज वर्कशाप के लिए जगह खोजे जाने के बाद भी निर्माण नहीं हो सका था। बिल्सी में बनाए जाने वाला बस अड्डा भी साल भर सपना ही बना रहा।
अधूरा है फोरलेन का काम
बदायूं। बरेली-बदायूं फोरलेन का काम अभी तक अधूरा है। निर्माणदायी संस्था इस साल मार्च तक इसे पूरा करने का दावा कर रही थी, लेकिन अभी तक ये अधूरा है। रास्ते में अभी पुलियां तक नहीं बनी हैं। नवादा मोड़ पर तो अब अतिक्रमण हटाकर सड़क बनाने का रास्ता साफ किया गया है।
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शहरियों को पीड़ा देती रहीं बदहाल सड़कें
बदायूं। सीमावर्ती क्षेत्ररें में भले ही सड़कों की दशा सुधारने का काम किया गया हो, लेकिन शहर के अंदर की सड़कों ने लोगों को साल भर रुलाया। वीआईपी इलाकों में जख्मी सड़कों पर एक्सीडेंट खूब हुए, जिनकी चपेट में आकर लोग घायल होते रहे। बावजूद इसके नगर पालिका परिषद ने सड़कों को दुरुस्त कराने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। शहर की मुख्य सड़कों की हालत सबसे ज्यादा बदहाल रही।
सपना ही बना रहा सॉलिडवेस्ट मैनेजमेंट प्लांट
बदायूं। ग्राम पंचायत उतरना के मजरा सहपुरा में कूड़ा निस्तारण के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का निर्माण 2011 में शुरू हुआ था। इसे दिसंबर 2012 तक चालू हो जाना था। कार्यदायी संस्था एटूजेड और अकार्डो हाइड्रोएयर के बीच विवाद की वजह से काम फंस गया। करोड़ों रुपये की मशीनें जंग खा रही हैं। विवाद के चलते सॉलिडवेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का अपना इस साल भी पूरा नहीं हो सका।
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जाम के झाम से जूझते रहे लोग
बदायूं। शहर में हुए अतिक्रमण और ट्रैफिक पुलिस के ध्यान न देने से लोग सालभर जाम के जंजाल में फंसे नजर आए। शहर के मुख्य स्थानों के साथ ही जिले के बिसौली, उसावां, सहसवान आदि उप नगरों में लोग जाम से जूझते दिखे। जाम से निजात दिलाने के लिए न तो प्रशासनिक अधिकारियों ने ध्यान दिया और न ही ट्रैफिक पुलिस सजग दिखी।
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यात्रियों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा रेलवे विभाग
बदायूं। बरेली से कासगंज रूट पर ट्रेनों का आवागमन तो बमुश्किल शुरू हो गया, लेकिन इस रूट पर ट्रेनों के न बढ़ाए जाने से जिले के लोग परेशान ही रहे। ट्रेन से बरेली तक की दूरी को तय करने में ढाई से तीन घंटों का समय लगा। इससे लोगों ने रोडवेज को प्राथमिकता दी। रेलवे स्टेशन का सौंदर्यीकरण और फुटओवर ब्रिज का निर्माण कार्य भी पूरा नहीं हो सका।
न बनी वर्कशॉप और न ही बिल्सी का बस अड्डा
बदायूं। सुविधाओं के नजरिए से परिवहन विभाग भी यात्रियों से खिलवाड़ करता नजर आया। जिले के कई रूटों पर बसों का संचालन बढ़ाए जाने की मांग की जाती रही। इसके साथ ही दातागंज क्षेत्र में रोडवेज वर्कशाप के लिए जगह खोजे जाने के बाद भी निर्माण नहीं हो सका था। बिल्सी में बनाए जाने वाला बस अड्डा भी साल भर सपना ही बना रहा।
अधूरा है फोरलेन का काम
बदायूं। बरेली-बदायूं फोरलेन का काम अभी तक अधूरा है। निर्माणदायी संस्था इस साल मार्च तक इसे पूरा करने का दावा कर रही थी, लेकिन अभी तक ये अधूरा है। रास्ते में अभी पुलियां तक नहीं बनी हैं। नवादा मोड़ पर तो अब अतिक्रमण हटाकर सड़क बनाने का रास्ता साफ किया गया है।