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देश दुनिया तक पहुंच रही बदायूं की महिलाओं की आवाज

Wed, 21 Jul 2021 12:58 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 21 Jul 2021 12:58 AM IST
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The voice of women of Badaun is reaching the country and the world.
बदायूं। कोरोना काल में कवि सम्मेलन तो बंद हो गए लेकिन बदायूं की कवयित्रियों ने अपनी आवाज को देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया है। इनमें से कुछ ने तो पहली बार ही ऑनलाइन मंच के जरिये काव्य पाठ किया है और खूब वाहवाही बटोरी ।
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सूफी संतों के शहर बदायूं को दुनिया में शकील बदायूंनी, फानी बदायूंनी, ब्रजेंद्र अवस्थी व उर्मिलेश शंखधार जैसे बड़े नामों से जाना जाता है। बदायूं में महिलाएं भी काव्य रसधारा से अछूती नहीं रहीं। उन्होंने काव्य के क्षेत्र में अपने आपको बढ़ाना शुरू कर दिया है। तमाम बड़े कार्यक्रमों में नामी कवियों के साथ वह मंच साझा कर रही हैं। कोरोना काल में कवि सम्मेलन लगभग नगण्य हो गए हैं पर महिलाओं ने इस दौर में भी साहित्य को जीवित रखा है।
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दूसरों को भी शुभ्रा ने दिलाया मंच
- शहर के मोहल्ला शिव पट्टी निवासी शुभ्रा माहेश्वरी प्रवक्ता के साथ ही काव्यपाठ भी करती हैं। उन्होंने बताया कि 2005 में उन्होंने गिंदो देवी डिग्री कॉलेज में पढ़ाना शुरू किया तभी से वह कवि सम्मेलन में शामिल होने लगीं। अब वह चलता-चलता, संभलना सीख मंच की निदेशक हैं। वह लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन मंच के माध्यम से कवि सम्मेलनों में शामिल हुई। इसका फायदा यह हुआ कि उन्होंने देश के बाहर कनाडा, दुबई, बेल्जियम, जर्मनी आदि देशों की कवयित्रियों के साथ काव्य पाठ किया। उनके साथ शहर से अन्य कवयित्री भी जुड़ती चली गई।
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बच्चों को पढ़ाने के साथ काव्यपाठ करती हैं सरिता
शहर के मोहल्ला शिवपुरम निवासी सरिता सिंह बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिका हैं। वह बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ खाली बचे समय में काव्यपाठ करती है। हालांकि लॉकडाउन से पहले उन्होंने कभी मंच साझा नहीं किया था। उन्होंने बताया कि कोरोना काल के दौरान लगे लॉकडाउन में उनके पास काफी समय था। ऐसे में उन्होंने शहर की एक कवयित्री से संपर्क किया। उसके बाद में ऑनलाइन मंच के माध्यम से ऑनलाइन कवि सम्मेलन में शामिल हुईं।
ममता नौगरैया लिख चुकी हैं कई किताबें
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सुरेश चंद्र नौगरैया की पत्नी ममता नौगरैया कहने को घरेलू महिला हैं। लेकिन लिखने-पढ़ने का शौक पुराना है। अब तक वह कई किताबें लिख चुकी हैं। हालांकि पिछले पांच से छह साल से वह कवि सम्मेलन में मंच भी साझा करनी लगी थीं। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन माध्यम से होने वाले कवि सम्मेलन उनके लिए वरदान साबित हुए। इसके जरिये वह देश-विदेश की कवियत्री से मिलीं।

गिंदो देवी महिला महाविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात डॉ. निशि अवस्थी का काव्य पाठ से काफी पुराना नाता है। उन्होंने बताया कि 2001 से वह काव्यपाठ कर रही हैं। उन्हें जहां भी मौका मिलता है, पीछे नहीं हटती हैं। वह भी किताबें भी लिख रही है। हालांकि अभी किताबें प्रकाशित नहीं हुई। लेकिन पत्रिकाओं में लेख जरूर छपे हैं। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन माध्यम से अपने काव्य पाठ को देश के साथ-साथ विदेशों में सुना रही हैं।
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