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Budaun News: व्यवस्था बीमार... व्हीलचेयर धकेल रहे तीमारदार
Thu, 25 Jun 2026 11:44 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Thu, 25 Jun 2026 11:44 PM IST
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राजकीय मेडिकल कॉलेज में व्हीलचेयर से मरीज को ले जाते तीमारदार। संवाद
- फोटो : 1
बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज में सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन कॉलेज की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां हो रही है। यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों को वार्ड तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी तीमारदारों के कंधों पर आ गई है। हालत यह है कि मरीजों को व्हीलचेयर पर बैठाकर परिजन खुद ओपीडी से वार्ड और जांच कक्षों तक ले जाते हैं।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में रोजाना डेढ़ हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें बुजुर्ग, गंभीर रूप से बीमार और चलने-फिरने में असमर्थ मरीज भी शामिल हैं। ऐसे मरीजों को अस्पताल कर्मियों की मदद मिलनी चाहिए, लेकिन यहां तीमारदार मरीजों के सहारे बने हुए हैं। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में व्हीलचेयर तो उपलब्ध है, लेकिन उन्हें संचालित करने और मरीजों को निर्धारित स्थान तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त कर्मचारी नजर नहीं आते। ऐसे में अधिकांश मरीजों को लंबी दूरी तक खुद ही धक्का देकर ले जाना पड़ता है, कई बार तो तीमारदारों को मरीजों को लेकर कई बार चक्कर लगाने पड़ते है।
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फाइल लेकर आगे, मरीज पीछे
- अस्पताल आने वाले महेश सिंह, रौनक अली का कहना है कि कर्मचारी मरीजों की मदद करने के बजाय केवल कागजी प्रक्रिया पूरी कराने में लगे रहते हैं। मरीज व्हीलचेयर पर पीछे चलते हैं और कर्मचारी फाइल लेकर आगे-आगे चलते दिखाई देते हैं। इसमें सबसे अधिक परेशानी बुजुर्ग मरीजों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को होती है। तीमारदार रमेश शर्मा, उमेश ने बताया कि अस्पताल में भर्ती कराने से पहले ही मरीज को अलग-अलग काउंटरों और जांच केंद्रों तक ले जाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
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यह होनी चाहिए व्यवस्था
- प्रत्येक वार्ड और ओपीडी में व्हीलचेयर सहायक तैनात हो।
- गंभीर मरीजों के लिए स्ट्रेचर और वार्ड बॉय की उपलब्धता हो।
- मरीजों को जांच और वार्ड तक पहुंचाने के लिए हेल्प डेस्क बनाई जाए।
- बुजुर्ग और दिव्यांग मरीजों के लिए अलग सहायता व्यवस्था हो।
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आधे खाली पड़े हैं वार्ड बॉय के पद
-राजकीय मेडिकल में करीब 150 स्वीपर है, लेकिन यहां पर करीब 30 पदों पर ही इनकी तैनाती है। इसके अलावा वार्ड बॉय के यहां पर करीब 100 पद हैं, जिनमें से 50 पदों पर यह तैनात है। वहीं, मेडिकल कॉलेज में अभी स्टाफ नर्स के करीब 175 पद हैं। इसके सापेक्ष स्टाफ नर्स पूरी हैं। संवाद
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वर्जन--
- पहले भी इस तरह की शिकायतें आई हैं। ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। तीमारदार पहले से परेशान होते हैं। उनसे इस प्रकार से स्ट्रेचर या व्हीलचेयर चलवाना गलत है।
- डॉ. शिव कुमार, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज
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राजकीय मेडिकल कॉलेज में रोजाना डेढ़ हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें बुजुर्ग, गंभीर रूप से बीमार और चलने-फिरने में असमर्थ मरीज भी शामिल हैं। ऐसे मरीजों को अस्पताल कर्मियों की मदद मिलनी चाहिए, लेकिन यहां तीमारदार मरीजों के सहारे बने हुए हैं। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में व्हीलचेयर तो उपलब्ध है, लेकिन उन्हें संचालित करने और मरीजों को निर्धारित स्थान तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त कर्मचारी नजर नहीं आते। ऐसे में अधिकांश मरीजों को लंबी दूरी तक खुद ही धक्का देकर ले जाना पड़ता है, कई बार तो तीमारदारों को मरीजों को लेकर कई बार चक्कर लगाने पड़ते है।
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फाइल लेकर आगे, मरीज पीछे
- अस्पताल आने वाले महेश सिंह, रौनक अली का कहना है कि कर्मचारी मरीजों की मदद करने के बजाय केवल कागजी प्रक्रिया पूरी कराने में लगे रहते हैं। मरीज व्हीलचेयर पर पीछे चलते हैं और कर्मचारी फाइल लेकर आगे-आगे चलते दिखाई देते हैं। इसमें सबसे अधिक परेशानी बुजुर्ग मरीजों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को होती है। तीमारदार रमेश शर्मा, उमेश ने बताया कि अस्पताल में भर्ती कराने से पहले ही मरीज को अलग-अलग काउंटरों और जांच केंद्रों तक ले जाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
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यह होनी चाहिए व्यवस्था
- प्रत्येक वार्ड और ओपीडी में व्हीलचेयर सहायक तैनात हो।
- गंभीर मरीजों के लिए स्ट्रेचर और वार्ड बॉय की उपलब्धता हो।
- मरीजों को जांच और वार्ड तक पहुंचाने के लिए हेल्प डेस्क बनाई जाए।
- बुजुर्ग और दिव्यांग मरीजों के लिए अलग सहायता व्यवस्था हो।
आधे खाली पड़े हैं वार्ड बॉय के पद
-राजकीय मेडिकल में करीब 150 स्वीपर है, लेकिन यहां पर करीब 30 पदों पर ही इनकी तैनाती है। इसके अलावा वार्ड बॉय के यहां पर करीब 100 पद हैं, जिनमें से 50 पदों पर यह तैनात है। वहीं, मेडिकल कॉलेज में अभी स्टाफ नर्स के करीब 175 पद हैं। इसके सापेक्ष स्टाफ नर्स पूरी हैं। संवाद
वर्जन
- पहले भी इस तरह की शिकायतें आई हैं। ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। तीमारदार पहले से परेशान होते हैं। उनसे इस प्रकार से स्ट्रेचर या व्हीलचेयर चलवाना गलत है।
- डॉ. शिव कुमार, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज

राजकीय मेडिकल कॉलेज में व्हीलचेयर से मरीज को ले जाते तीमारदार। संवाद- फोटो : 1