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Budaun News: हौसलों की रोशनी में लिख डाली सफलता की कहानी
Sat, 25 Apr 2026 02:04 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Sat, 25 Apr 2026 02:04 AM IST
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हिमांशु
बदायूं। यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 में जहां सामान्य विद्यार्थियों ने बेहतर प्रदर्शन किया, वहीं दिव्यांग छात्रों ने भी अपनी मेहनत और जज्बे से अलग पहचान बनाई। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद इन विद्यार्थियों ने साबित कर दिया कि अगर हौसले मजबूत हों तो कोई भी मुश्किल रास्ता नहीं रोक सकती। ऐसे में हाईस्कूल में पांच और इंटर में तीन छात्र-छात्राओं ने परीक्षा पास की। इनमें तीन पूर्ण रूप से दृष्टिबाधित थे। इसकी वजह से उनको लेखक की मदद लेनी पड़ी।
जिले में हाईस्कूल परीक्षा में पांच दिव्यांग छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इसमें श्रवण बाधित वर्ग में हिमांशु (64.6) व रंजित पटेल (58 प्रतिशत) ने प्रथम स्थान हासिल कर सभी को प्रभावित किया। वहीं, दृष्टि बाधित वर्ग में पार्थ मिश्रा ने (82.3 प्रतिशत) प्रथम स्थान प्राप्त किया। जबकि नितिन मथुरिया ने 74.3 प्रतिशत हासिल की और आरजू ने 55 प्रतिशत हासिल की। ये तीनों छात्र पूर्ण रूप से दृष्टि बाधित हैं। परीक्षा के दौरान इन्हें लेखक (राइटर) की सहायता लेनी पड़ी। जिन्होंने इनके बताए अनुसार उत्तर पुस्तिका में उत्तर लिखे।
इसके बावजूद इनका प्रदर्शन किसी भी तरह से सामान्य छात्रों से कम नहीं रहा। इंटरमीडिएट परीक्षा में भी दिव्यांग छात्रों ने सफलता का परचम लहराया। श्रवण बाधित वर्ग में अखिलेश ने 61.6 प्रतिशत हासिल की। जबकि नंदिनी सक्सेना ने 49.5 प्रतिशत प्राप्त की। वहीं दृष्टि बाधित (लो विजन) श्रेणी में महवीश ने 69 प्रतिशत प्राप्त कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। इन छात्रों की सफलता ने यह साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास से बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
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जिले में हाईस्कूल परीक्षा में पांच दिव्यांग छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इसमें श्रवण बाधित वर्ग में हिमांशु (64.6) व रंजित पटेल (58 प्रतिशत) ने प्रथम स्थान हासिल कर सभी को प्रभावित किया। वहीं, दृष्टि बाधित वर्ग में पार्थ मिश्रा ने (82.3 प्रतिशत) प्रथम स्थान प्राप्त किया। जबकि नितिन मथुरिया ने 74.3 प्रतिशत हासिल की और आरजू ने 55 प्रतिशत हासिल की। ये तीनों छात्र पूर्ण रूप से दृष्टि बाधित हैं। परीक्षा के दौरान इन्हें लेखक (राइटर) की सहायता लेनी पड़ी। जिन्होंने इनके बताए अनुसार उत्तर पुस्तिका में उत्तर लिखे।
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इसके बावजूद इनका प्रदर्शन किसी भी तरह से सामान्य छात्रों से कम नहीं रहा। इंटरमीडिएट परीक्षा में भी दिव्यांग छात्रों ने सफलता का परचम लहराया। श्रवण बाधित वर्ग में अखिलेश ने 61.6 प्रतिशत हासिल की। जबकि नंदिनी सक्सेना ने 49.5 प्रतिशत प्राप्त की। वहीं दृष्टि बाधित (लो विजन) श्रेणी में महवीश ने 69 प्रतिशत प्राप्त कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। इन छात्रों की सफलता ने यह साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास से बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

हिमांशु

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