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कछला पुल के संपर्क मार्ग के नीचे मिट्टी धंसी
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कछला पुल की एप्रोच रोड धंसने से हुआ गहरा गड्ढा। संवाद
- फोटो : BADAUN
उझानी (बदायूं)। कछला में गंगा पर बने पुल के एक छोर पर संपर्क मार्ग की मिट्टी बारिश के पानी में बह गई। तीन-चार दिनों के दौरान मिट्टी धंसते रहने से पुल से सटे कोने पर 15 फुट गहरा गड्ढा हो गया है। पुल पर होकर रोजाना ही सैकड़ों की संख्या में भारी वाहन गुजरते हैं। मिट्टी धंसने का ऐसा ही क्रम चलता रहा तो किसी भी दिन वह बड़ी हादसे की वजह बन सकता है।
बरेली-मथुरा हाईवे स्थित गंगा तट पर बने पुल की संपर्क मार्ग दोनों ओर करीब पांच-छह सौ मीटर की है। कासगंज जिले के छोर पर संपर्क मार्ग पर पिछले दिनों जहां मिट्टी धंसने का क्रम शुरू हुआ, वह पुल के बराबर कोने पर है। दो दिन पहले गंगाघाट पर पहुंचे श्रद्धालुओं की नजर संपर्क मार्ग के नीचे हुए गहरे गड्ढे पर पड़ी तो उन्होंने आसपास के दुकानदारों से भी जिक्र किया। दुकानदारों हरीओम ने बताया कि मिट्टी धंसने की वजह बारिश का पानी रहा है। पिछले दिनों बारिश हुई तो पुल के पास पानी का निकास बंद हो गया। पानी के दबाव में आकर मिट्टी बहती चली गई। इसके बाद वाहनों की आवाजाही के दौरान धमक से मिट्टी खाई की ओर गिरती जा रही है।
मिट्टी धंसने वाले स्थान पर गड्ढे की गहराई करीब 15 फुट हो गई है। जानकारों का कहना है कि मिट्टी धंसने का क्रम सड़क की तरफ दो-ढाई फुट बढ़ा तो संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो जाएगा। पुल के पास ही मोड़ होने की वजह से वाहन चालकों को खतरे का अहसास भी नहीं हो पाएगा। इन संबंध में एनएचआई का पक्ष जानने की कोशिश की गई पर परियोजना निदेशक का तबादला हो जाने के कारण पक्ष नहीं मिल सका।
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14 साल पहले बना था कछला पुल, निर्माण के दौरान हो गया था हादसा
कछला में गंगा तट पर पुल का निर्माण कार्य साल 2006 में पूरा हो गया था। उस वक्त प्रदेश में मायावती की सरकार थी। अगले साल ही लोकार्पण हुआ। निर्माण के दौरान एक पिलर पर काम करते समय मशीन गिरने से तीन मजदूरों की मौत हो गई थी। निर्माण कार्य जम्मू कश्मीर की टीआरजी कंपनी ने कराया था। इसके बाद से देखरेख पीडब्ल्यूडी ने की। अब, इसकी देखरेख आगरा स्थित एनएचएआई के कार्यालय से की जा रही है।
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कछला पुल की संपर्क मार्ग धंसने के बारे में जानकारी नहीं है। बरेली-मथुरा हाईवे एनएचआई के अधीन हो चुका है। एनएचआई का कार्यालय आगरा में है। एप्रोच रोड की देखरेख भी वही करते हैं। किसी खास केस के बारे में जानकारी संज्ञान में आने पर संबंधित अफसरों को अवगत करा दिया जाता है।
- अमर सिंह, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी
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बरेली-मथुरा हाईवे स्थित गंगा तट पर बने पुल की संपर्क मार्ग दोनों ओर करीब पांच-छह सौ मीटर की है। कासगंज जिले के छोर पर संपर्क मार्ग पर पिछले दिनों जहां मिट्टी धंसने का क्रम शुरू हुआ, वह पुल के बराबर कोने पर है। दो दिन पहले गंगाघाट पर पहुंचे श्रद्धालुओं की नजर संपर्क मार्ग के नीचे हुए गहरे गड्ढे पर पड़ी तो उन्होंने आसपास के दुकानदारों से भी जिक्र किया। दुकानदारों हरीओम ने बताया कि मिट्टी धंसने की वजह बारिश का पानी रहा है। पिछले दिनों बारिश हुई तो पुल के पास पानी का निकास बंद हो गया। पानी के दबाव में आकर मिट्टी बहती चली गई। इसके बाद वाहनों की आवाजाही के दौरान धमक से मिट्टी खाई की ओर गिरती जा रही है।
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मिट्टी धंसने वाले स्थान पर गड्ढे की गहराई करीब 15 फुट हो गई है। जानकारों का कहना है कि मिट्टी धंसने का क्रम सड़क की तरफ दो-ढाई फुट बढ़ा तो संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो जाएगा। पुल के पास ही मोड़ होने की वजह से वाहन चालकों को खतरे का अहसास भी नहीं हो पाएगा। इन संबंध में एनएचआई का पक्ष जानने की कोशिश की गई पर परियोजना निदेशक का तबादला हो जाने के कारण पक्ष नहीं मिल सका।
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14 साल पहले बना था कछला पुल, निर्माण के दौरान हो गया था हादसा
कछला में गंगा तट पर पुल का निर्माण कार्य साल 2006 में पूरा हो गया था। उस वक्त प्रदेश में मायावती की सरकार थी। अगले साल ही लोकार्पण हुआ। निर्माण के दौरान एक पिलर पर काम करते समय मशीन गिरने से तीन मजदूरों की मौत हो गई थी। निर्माण कार्य जम्मू कश्मीर की टीआरजी कंपनी ने कराया था। इसके बाद से देखरेख पीडब्ल्यूडी ने की। अब, इसकी देखरेख आगरा स्थित एनएचएआई के कार्यालय से की जा रही है।
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कछला पुल की संपर्क मार्ग धंसने के बारे में जानकारी नहीं है। बरेली-मथुरा हाईवे एनएचआई के अधीन हो चुका है। एनएचआई का कार्यालय आगरा में है। एप्रोच रोड की देखरेख भी वही करते हैं। किसी खास केस के बारे में जानकारी संज्ञान में आने पर संबंधित अफसरों को अवगत करा दिया जाता है।
- अमर सिंह, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी