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धान खरीद में लगा झटका
badaun
Updated Mon, 02 Feb 2015 07:44 PM IST
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जिले में एक अक्तूबर से 31 जनवरी तक हुई सरकारी धन खरीद को इस बार भी कड़ा झटका लगा है। हालांकि यह संतोष की बात है कि गत वर्ष की अपेक्षा खरीद प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई है। छह क्रय एजेंसियों की ताकत इस खरीद में लगाई गई थी। 31 केंद्र खोले गए, लेकिन खरीद अपेक्षा के अनुरूप भी नहीं बढ़ सकी। चार महीने के समय में दिन-रात एक कर खरीद बढ़ाने के प्रयास पूरी तरह कारगर नहीं हो सके।
धान खरीद की शुरूआत एक अक्तूबर से 31 जनवरी तक होना तय हुआ था। खरीद बढ़े, इसके लिए बैठकें और दौरे सभी विकल्प अपनाए गए। शुरूआत में तीन शाखाओं को खरीद का दायित्व सौंपा था और 21 खरीद केंद्र बनाए गए थे। जब खरीद का एक महीना रह गया तो तीन क्रय एजेंसियों को इसमें और लगाया गया। इस प्रकार आखिरी महीने में जबर्दस्त खरीद की गई। छह एजेंसी में एक एजेंसी फिर भी हाथ पर हाथ रखे बैठी रही। उसने तीन क्रय केंद्र भी खोले नतीजा ‘ढाक के तीन पात’ ही रहा। 14,000 मीट्रिक टन खरीद के लक्ष्य से काफी पीछे रहते हुए खरीद मात्र 6,689.40 मीट्रिक टन ही हो सकी। जो लक्ष्य का 47.78 प्रतिशत है यानि 50 प्रतिशत से भी नीचे खरीद का लक्ष्य पिछड़ गया।
तीन सेंटरों पर एक दाना भी खरीद नहीं
जिले में धान खरीद को 31 क्रय केंद्रों में सर्वाधिक खरीद केंद्र पीसीएफ पर रहे। यह संस्था खरीद में विपणन शाखा से पिछड़ गई। पीसीएफ पर 10 तो विपणन शाखा पर मात्र छह केंद्र ही थे। कर्मचारी कल्याण निगम पर तीन क्रय केंद्र थे, लेकिन उसने एक भी दाना नहीं खरीदा।
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गत वर्ष की अपेक्षा 5.98 प्रतिशत की बढ़ोतरी
गत वर्ष भी खरीद का लक्ष्य इतना ही था, जितना इस वर्ष रहा। गत वर्ष 5852.90 मीट्रिक टन खरीद यानि 41.80 प्रतिशत ही खरीद हो सकी। इस बार 6689.40 मीट्रिक टन खरीद के साथ 47.78 प्रतिशत ही खरीद हो सकी। इस प्रकार धान खरीद में 5.98 प्रतिशत की बढ़ोतरी ही हो सकी।
धान खरीद के लिए प्रयास थे किए गए। इस क्षेत्र में राशन के मतलब का मोटा धान नहीं होता है। इसी धान की खरीद होती है। जिले में धान के लिए केवल दातागंज तहसील ही प्रमुख है। बाकी इलाकों में धान की अधिक पैदावार भी नहीं होती।
- राजेंद्र प्रसाद, एडीएम, वित्त, खरीद प्रभारी
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धान खरीद की शुरूआत एक अक्तूबर से 31 जनवरी तक होना तय हुआ था। खरीद बढ़े, इसके लिए बैठकें और दौरे सभी विकल्प अपनाए गए। शुरूआत में तीन शाखाओं को खरीद का दायित्व सौंपा था और 21 खरीद केंद्र बनाए गए थे। जब खरीद का एक महीना रह गया तो तीन क्रय एजेंसियों को इसमें और लगाया गया। इस प्रकार आखिरी महीने में जबर्दस्त खरीद की गई। छह एजेंसी में एक एजेंसी फिर भी हाथ पर हाथ रखे बैठी रही। उसने तीन क्रय केंद्र भी खोले नतीजा ‘ढाक के तीन पात’ ही रहा। 14,000 मीट्रिक टन खरीद के लक्ष्य से काफी पीछे रहते हुए खरीद मात्र 6,689.40 मीट्रिक टन ही हो सकी। जो लक्ष्य का 47.78 प्रतिशत है यानि 50 प्रतिशत से भी नीचे खरीद का लक्ष्य पिछड़ गया।
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तीन सेंटरों पर एक दाना भी खरीद नहीं
जिले में धान खरीद को 31 क्रय केंद्रों में सर्वाधिक खरीद केंद्र पीसीएफ पर रहे। यह संस्था खरीद में विपणन शाखा से पिछड़ गई। पीसीएफ पर 10 तो विपणन शाखा पर मात्र छह केंद्र ही थे। कर्मचारी कल्याण निगम पर तीन क्रय केंद्र थे, लेकिन उसने एक भी दाना नहीं खरीदा।
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गत वर्ष की अपेक्षा 5.98 प्रतिशत की बढ़ोतरी
गत वर्ष भी खरीद का लक्ष्य इतना ही था, जितना इस वर्ष रहा। गत वर्ष 5852.90 मीट्रिक टन खरीद यानि 41.80 प्रतिशत ही खरीद हो सकी। इस बार 6689.40 मीट्रिक टन खरीद के साथ 47.78 प्रतिशत ही खरीद हो सकी। इस प्रकार धान खरीद में 5.98 प्रतिशत की बढ़ोतरी ही हो सकी।
धान खरीद के लिए प्रयास थे किए गए। इस क्षेत्र में राशन के मतलब का मोटा धान नहीं होता है। इसी धान की खरीद होती है। जिले में धान के लिए केवल दातागंज तहसील ही प्रमुख है। बाकी इलाकों में धान की अधिक पैदावार भी नहीं होती।
- राजेंद्र प्रसाद, एडीएम, वित्त, खरीद प्रभारी