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बारिश ने भी ढाया सितम बचाव कार्य प्रभावित

Bisuli Updated Fri, 03 Apr 2015 08:20 PM IST
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रामप्रकाश की अंत्येष्टि में शामिल होने गए लोगों पर हादसे के साथ मौसम ने भी सितम ढहाने में कोई गुरेज नहीं किया। बारिश की वजह से राहत और बचाव कार्य में भी दिक्कत हुई। हादसा रात करीब 10.20 बजे हुआ। सूचना पर मुजरिया पुलिस मौके पर पहुंची। उच्च अधिकारियों को खबर देने के साथ पुलिस ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। सूचना एंबुलेंस 108 को दी गई, लेकिन एंबुलेंस 108 करीब एक घंटे की देरी से मौके पर पहुंची।
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भीषण हादसे की सूचना मिलने पर एडीएम प्रशासन अशोक श्रीवास्तव, एसपी देहात बालेंदुभूषण सिंह, सीओ सहसवान उमेश यादव और सीओ बिल्सी जगदीश चंद्र भी मौके पर पहुंच गए। सूचना दिए जाने के बाद भी जब एंबुलेंस 108 नहीं पहुंची तो पुलिस ने निजी वाहनों के जरिए घायलों को जिला अस्पताल भेजा। राहत और बचाव कार्य लगातार हो रही बारिश से प्रभावित होता रहा। बारिश के बीच बिना एंबुलेंस के राहत-बचाव कार्य में जुटी पुलिस के सामने घायल हुए 30 लोगों को समय से जिला अस्पताल भेजना चुनौती था।


डीएम-एसएपी ने जाना घायलों का हाल
बदायूं। डीएम शंभूनाथ, एसएसपी सौमित्र यादव, एसपी देहात बालेंदुभूषण सिंह ने जिला अस्पताल पहुंच कर घायलों का हाल जाना। डीएम ने घायलों और मृतकों के परिवार वालों को शासन की ओर से मिलने वाली हर संभव मदद के साथ बेहतर इलाज का आश्वासन दिया।

एसडीएम को दिशा-निर्देश दिए हैं। मृतकों और घायलों की हर संभव मदद की जाएगी। विधवाओं को पेंशन दिलाई जाएगी। किसान दुर्घटना बीमा, पारिवारिक लाभ योजना और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से मृतकों को आर्थिक मदद के लिए कार्रवाई की जा रही है। -शंभूनाथ, डीएम

...काल बन गई तीन घंटे की देरी
बिल्सी। बिल्सी थाने के गांव नगला डल्लू निवासी रामप्रकाश की गुरुवार को मौत हो गई थी। रामप्रकाश का बेटा रामसिंह ड्राइवरी करता है। रामसिंह गुरुवार को कार बुकिंग पर लेकर गया था। रामप्रकाश का दूसरा बेटा रोहताश और गांव के लोग राम प्रकाश की अंत्येष्टि को लेकर उनका शव लेकर गुरुवार शाम छह बजे कछला गंगाघाट पर पहुंच गए थे। अंतिम संस्कार के लिए सभी लोग रामवीर का इंतजार कर रहे थे। रामवीर रात करीब नौ बजे कछला पहुंचा। रामवीर के कछला पहुंचने में तीन घंटे की देरी हो गई। घायलों की मानें तो तीन घंटे की यही देरी काल बन गई।
...और बेटी का सुहाग उजड़ा
बिल्सी। किसी को नहीं पता था कि रामप्रकाश की मौत के साथ उनकी बेटी का सुहाग भी उजड़ जाएगा। ससुर की मौत की खबर मिलने पर रामप्रकाश के दामाद सहसवान के गांव गड़िया जरीफनगर निवासी रूम सिंह (35) भी अंत्येष्टि में शामिल होने के लिए आए थे। हादसे में रूम सिंह की भी जान चली गई।
कृषि छोड़ ट्रैक्टर-ट्रालियों से लिए जा रहे दूसरे काम
बदायूं। ट्रैक्टर-ट्राली का रजिस्ट्रेशन मुख्य रूप से कृषि कार्य के लिए होता है। ट्रैक्टर-ट्रालियों का व्यवसायिक समेत बाकी कामों में इस्तेमाल हादसों की वजह बन रहा है। परिवहन विभाग इसकी अनदेखी कर रहा है। ईंट भट्ठों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैक्टर-ट्रालियों का इस्तेमाल बारातें ले जाने में भी हो रहा है। ताजा हादसे में ट्राली में करीब 40 लोग सवार थे।
योजना बनाकर करेंगे कार्रवाई
एआरटीओ प्रवर्तन उदयवीर सिंह ने बताया कि इस तरह के हादसे न हों इसके लिए योजना बनाकर कार्रवाई की जाएगी।
...ताजा हो गईं सरौरा
हादसे की यादें
बदायूं। वाकया 25 दिसंबर 2010 का है। उझानी थाना क्षेत्र के गांव सरौरा में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। गांव वाले देर शाम उसकी अंत्येष्टि करके डीसीएम से कछला गंगा घाट से लौट रहे थे। रास्ते में कछला-उझानी के बीच डीसीएम और रोडवेज बस की टक्कर में मौके पर ही 37 लोगों की जान चली गई थी। यह पहला दर्दनाक हादसा था जिसमें एक साथ इतने लोगों की मौत हुई।

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