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फ्री यूनिफार्म की गुणवत्ता पर सवाल

Thu, 24 Sep 2015 06:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो ,बदायूं
अमर उजाला ब्यूरो ,बदायूं Updated Thu, 24 Sep 2015 06:49 PM IST
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गत वर्ष के आंकड़ों पर यदि नजर डालें तो 30 सितंबर 2014 तक जिले के 1802 प्राथमिक और 656 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कुल तीन लाख 23 हजार 132 बच्चे पंजीकृत थे। इसी आंकड़े के आधार पर इस साल भी यूनिफार्म के लिए बजट जारी किया गया था। काबिलेगौर है कि दो सेट के लिए 400 रुपये की धनराशि दी जाती है यानि की एक सेट 200 रुपये में बनता है। गौर करने वाली बात तो यह है कि बच्चों को यूनिफार्म उपलब्ध कराने के लिए प्रधानाध्यापक के खाते में पैसा जाता है। विद्यालय स्तर पर गठित विद्यालय प्रबंध समिति (एसएमसी) को यूनिफार्म बनवाने की जिम्मेदारी दी जाती है। किस फर्म से कपड़ा खरीदा जाए। किस टेलर से बनवाई जाए इसके लिए विभाग द्वारा लिखित में निर्देश जारी किए जाते हैं। जहां पर 250 से अधिक बच्चे होते हैं उन स्कूलों में यूनिफार्म बनवाने के लिए बाकायदा अखबारों में टेंडर के लिए विज्ञापन भी प्रकाशित कराया जाता है। अधिकारियों और शासन के निर्देश होते हैं कि यूनिफार्म की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाए। कपड़ा भी अच्छा हो और सिलाई भी बेहतर हो। एसएमसी खुद तय करें। बाद में वितरित होने वाली यूनिफार्म की गुणवत्ता की परख होती है। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अपने स्तर से सत्यापन टीमें गठित की जाती हैं। वह बाद में रिपोर्ट अधिकारियों को देते हैं। हर साल यूनिफार्म का बजट आते ही माफिया भी सक्रिय हो जाते हैं जो प्रभावशाली लोगों का साथ लेकर या उनके नाम से स्कूलों में यूनिफार्म जबरन डालते हैं। इस बार भी जिले के ज्यादातर स्कूलों में यह यूनिफार्म ठेकेदार पहुंच रहे हैं। शिक्षक को नेताओं और अधिकारियों के नाम से अपने प्रभाव में लेने की कोशिश करते हैं।
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कई बच्चों के अभिभावकों ने कहा कि मिलने वाली यूनिफार्म की गुणवत्ता इतनी खराब होती है कि एक बार पहनने के बाद वह बेकार हो जाती है। उनका कहना होता है कि सबकुछ कमीशनखोरी के चलते होता है। किसी से शिकायत करों कोई नहीं सुनता है। बच्चों ने कहा कि उन्हें यह नहीं पता कि कितने पैसे की यूनिफार्म बनती है। उन्हें जो दे दी जाती है वह ले लेते हैं।
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लड़कों से ज्यादा हैं लड़कियां
बेसिक के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की संख्या ज्यादा है। आंकड़ें बता रहे हैं कि 30 सितंबर 2014 तक पढ़ने वाले बच्चों में लड़कों की संख्या एक लाख 58 हजार 219 थी और लड़कियां एक लाख 64 हजार 913 हैं। इस मामले में बीएसए आनंद प्रकाश शर्मा का कहना है कि यूनिफार्म की गुणवत्ता अच्छी हो। यह सब जिम्मेदारी प्रधानाध्यापक की होती है। वह किससे सिलवाता है या खरीददता है वही जानें। यदि कहीं पर कोई जबरन यूनिफार्म थोपता है तो उन्हें अवगत कराएं। यूनिफार्म की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। सत्यापन के बाद संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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