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Budaun News: भूलने की बीमार को अब बुढ़ापे का इंतजार नहीं

Wed, 19 Jul 2023 01:22 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 19 Jul 2023 01:22 AM IST
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The patient of forgetfulness does not have to wait for old age
अल्जाइमर : 40 से 50 वर्ष के लोगों की भी कमजोर होती जा रही याददाश्त
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मनोरोग केंद्र में काउंसलिंग के जरिए बीमारी दूर करने का किया जा रहा प्रयास

संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। 60 की उम्र के बाद बुजुर्गों की याददाश्त अक्सर कमजोर पड़ने लगती है और वे चीजों को भूलने लगते हैं। यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि अल्जाइमर हो सकता है। अमूमन वृद्धों में होने वाली यह बीमारी अब 60 वर्ष की उम्र का भी इंतजार नहीं कर रही। 40 से 50 साल के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल के मनोरोग केंद्र में करीब 10-12 ऐसे लोग इलाज के लिए आए हैं। इनकी काउंसलिंग करके उनकी बीमारी दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
अल्जाइमर बीमारी व्यक्ति के सोचने की शक्ति और उसकी याददाश्त पर प्रहार करती है। डॉक्टरों के मुताबिक यह बीमारी मस्तिष्क की कोशिकाओं के सिकुड़ने के कारण होती है। सामान्यत: यह बीमारी तीन स्टेज- प्राइमरी, मिडिल और लेट स्टेज में होती है। हर स्टेज एक के बाद और खतरनाक होती जाती है और अंत में व्यक्ति उस स्टेज में पहुंच जाता है जहां यह बीमारी उसके सारे शरीर पर ही प्रभाव डालती है।
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ये हैं बीमारी के लक्षण-
मेमोरी लॉस : व्यक्ति को छोटी-छोटी बातें ध्यान नहीं रहतीं। यहां तक कि वह परिवार के व्यक्तियों के नाम, दोस्तों और रिश्तेदारों के नाम या घर का फोन नंबर भी भूलने लगता है।
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घरेलू कामों में समस्या : जूते के फीते बांधना, टाई की गांठ लगाने जैसे छोटे-छोटे काम करने में समस्या आने लगती है।
मूड और व्यक्तित्व में परिवर्तन : व्यक्ति के मूड में अचानक परिवर्तन होने लगते हैं। कभी वह जरूरत से ज्यादा आक्रामक हो जाता है तो कभी कभी उदास।
निर्णय क्षमता का अभाव : व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होने लगती है और वह छोटी बात पर भी कोई निर्णय नहीं ले पाता और उसे हर काम दुरुह लगने लगता है।

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मुख्य रूप से अल्जाइमर वृद्धावस्था में होने वाली बीमारी है। इसमें याददाश्त कम होने लगती है। इस बीमारी में बुजुर्ग अक्सर चीजों को भूल जाते हैं और परिवार के साथ सामंजस्य नहीं बैठा पाते हैं। परिवार वाले भी इसे नहीं समझ पाते। इससे उसका इलाज नहीं हो पाता। यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए तो बीमारी लास्ट स्टेज में पहुंच जाती है और तब इलाज असंभव हो जाता है। आजकल एकाकी परिवार बढ़ रहे हैं। बच्चे और युवा मोबाइल फोन में व्यस्त रहते है। ऐसे में बुजुर्ग खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं। अल्जाइमर का एक कारण यह भी है। परिवार के सदस्याें को बुजुर्गों का ख्याल रखना चाहिए।

- डॉ. सर्वेश कुमारी, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट, जिला अस्पताल

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अल्जाइमर की बीमारी में दिमाग के अंदर बीटाअमाइलॉइड नमक प्रोटीन जमा होने लगता है और एसिटाइलकोलाइन, न्यूरोट्रांसमीटर की कमी हो जाती है। इसके परिणाम स्वरूप रोगी की याददाश्त धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है और समय के साथ अवसाद, चिंता, चिड़चिड़ापन हावी होने लगता है। इस बीमारी को पूरी तरह ठीक कर पाना संभव नहीं है, पर समय पर इलाज शुरू होने पर इसकी वृद्धि की गति को रोका जा सकता है। आजकल यह रोग 40-50 साल के लोगो को भी अपना शिकार बना रहा है, जिसकी वजह अधिक नशे का इस्तेमाल, खानपान में बदलाव, बदला हुआ नींद चक्र और नींद की कमी, तनाव आदि है। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि हम अपने दिनचर्या पर ध्यान दें। नशे न करे। भरपूर नींद लें। विटामिन सी से भरपूर खट्टे फलों का सेवन करें और रोजाना व्यायाम करें।
- डॉ. नरवीर यादव, मानसिक रोग विशेषज्ञ/असिस्टेंट प्रोफेसर, राजकीय मेडिकल कॉलेज
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