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Budaun News: परिषदीय विद्यालयों में नहीं बढ़ रही संख्या, पढ़ाई पर पड़ रहा असर
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बदायूं। जिले के परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन की स्थिति अभी पूरी तरह पटरी पर नहीं आ सकी है। स्कूलों में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति बेहद कम बनी हुई है जिससे नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई विद्यालयों में कक्षाएं लगभग खाली दिखाई दे रही हैं। इसके चलते शिक्षक भी परेशान हैं।
परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की मानें तो नामांकन तो पर्याप्त संख्या में है, लेकिन छात्र-छात्राएं नियमित रूप से स्कूल नहीं आ रहे हैं। खासकर छात्राओं की उपस्थिति अपेक्षा से काफी कम है। इससे न केवल पढ़ाई बाधित हो रही है, बल्कि शैक्षिक गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है। स्थिति सुधारने के लिए शिक्षक लगातार प्रयास कर रहे हैं। वे गांव-गांव और घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क कर रहे हैं और बच्चों को नियमित स्कूल भेजने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसके बावजूद उपस्थिति में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। अधिकांश अभिभावक गेहूं कटाई के काम की वजह से बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं।
शिक्षकों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो बच्चों की पढ़ाई पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह की ओर से उपस्थिति बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दें और उन्हें नियमित रूप से विद्यालय भेजें, ताकि उनका भविष्य बेहतर बन सके। संवाद
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परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की मानें तो नामांकन तो पर्याप्त संख्या में है, लेकिन छात्र-छात्राएं नियमित रूप से स्कूल नहीं आ रहे हैं। खासकर छात्राओं की उपस्थिति अपेक्षा से काफी कम है। इससे न केवल पढ़ाई बाधित हो रही है, बल्कि शैक्षिक गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है। स्थिति सुधारने के लिए शिक्षक लगातार प्रयास कर रहे हैं। वे गांव-गांव और घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क कर रहे हैं और बच्चों को नियमित स्कूल भेजने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसके बावजूद उपस्थिति में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। अधिकांश अभिभावक गेहूं कटाई के काम की वजह से बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं।
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शिक्षकों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो बच्चों की पढ़ाई पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह की ओर से उपस्थिति बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दें और उन्हें नियमित रूप से विद्यालय भेजें, ताकि उनका भविष्य बेहतर बन सके। संवाद
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