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मशीनों से सिले जाएंगे गेहूं के बोरे
बदायूं, ब्यूरो
Updated Wed, 06 Apr 2016 11:59 PM IST
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भारत सरकार ने घपलेबाजी रोकने को फंसाया गेहूं खरीद में नया पेच
क्रय केंद्रों पर ही होगा, वाट-माप और इलेक्ट्रानिक कांटों का सत्यापन
क्रय केंद्रों पर खरीद के गेहूं के बोरों को सिलाई मशीनों द्वारा की जाएगी। खरीद एजेंसियों को निर्देश हैं कि वह अपने ठेकेदारों को निर्देशित करें कि वह बोरों की सिलाई केंद्रों पर मशीन से ही करें। ऐसे निर्देश भारत सरकार के निर्देश पर जारी किए गए हैं। ताकि खरीदे गेहूं में घपलेबाजी को रोका जा सके।
जिले में 115 क्रय केंद्रों पर खरीद की व्यवस्था की गई है। कुछ खरीद केंदा्रें के अलावा अभी अधिकतर क्रय केंद्र खुले ही नहीं हैं। यहां बता दें कि खरीद में अनियमितताओं को लेकर केंद्र बदनाम रहते हैं। इसी वजह से इस बार भी खरीद के बोरों को भरने के बाद मशीन से सिलाई के लिए खास निर्देश हैं। यहां बता दें कि बोरों की क्वालिटी और उन पर छापा और मार्का के लिए भी एजेंसियों को विशेष निर्देश हैं।
केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक कांटों और वाट-माप के लिए भी निर्देश हैं कि क्रय केंद्रों पर ही इनकी विशेष जांच कराई जाए। इनका वाट-माप विभाग द्वारा सत्यापन कराने के बाद ही तौल के लिए हरी झंडी दी जाएगी। बोरों की सिलाई, स्टैंसलिंग और कलर कोडिंग के संबंध में खाद्य आयुक्त को निर्देश जारी करने हैं। अभी इस प्रकार के निर्देशों के संबंध में क्रय एंजेंसियां नकार रही हैं।
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क्रय एजेंसियां और पंजीकृत सहकारी समितियां खुले बाजार से बोरा खरीद कर काम करेंगी। निर्देशानुसार स्टेंसलिंग के साथ-साथ चटक नीले रंग से उप्र सरकार और स्वच्छ भारत मिशन का लोगो स्क्रीन पेंटिंग से अनिवार्य रूप से लगेगी।
क्राप कटिंग बनेगा किसान के गेहूं का आधार
बदायूं। डीएम द्वारा क्राप कटिंग के आधार पर ही किसान के खेत की पैदावार का आंकलन लगेगा। आढ़तियों और दलालों को क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने से बचने के लिए यह आधार महत्व रखेगा। किसानों से क्रय केंद्र पर जोतबही, खसरा, खतौनी आदि से प्रति हेक्टेयर उत्पादन के हिसाब से ही गेहूं का आकलन होगा और उसी आधार पर गेहूं क्रय होगा। अधिक होने पर उसे संदेहजनक मानकर लौटाया जा सकता है।
सप्ताह में दो दिन की खरीद छोटे किसानों से
बदायूं। यहां बता दें कि एक सप्ताह में दो दिन छोटी जोत वाले किसानों के लिए आरक्षित की जा रही है। इसके लिए आरक्षित दिन जिलाधिकारी निर्धारित करेंगे। केंद्रों पर इन दिनों के नाम मोटे अक्षरों में प्रदर्शित किया जाएगा। उस दिन बड़े किसानों का गेहूं नहीं खरीदा जाएगा। इससे छोटे किसानों को अपना गेहूं बेचने में आसानी होगी।
क्रय केंद्रों पर ही होगा, वाट-माप और इलेक्ट्रानिक कांटों का सत्यापन
क्रय केंद्रों पर खरीद के गेहूं के बोरों को सिलाई मशीनों द्वारा की जाएगी। खरीद एजेंसियों को निर्देश हैं कि वह अपने ठेकेदारों को निर्देशित करें कि वह बोरों की सिलाई केंद्रों पर मशीन से ही करें। ऐसे निर्देश भारत सरकार के निर्देश पर जारी किए गए हैं। ताकि खरीदे गेहूं में घपलेबाजी को रोका जा सके।
जिले में 115 क्रय केंद्रों पर खरीद की व्यवस्था की गई है। कुछ खरीद केंदा्रें के अलावा अभी अधिकतर क्रय केंद्र खुले ही नहीं हैं। यहां बता दें कि खरीद में अनियमितताओं को लेकर केंद्र बदनाम रहते हैं। इसी वजह से इस बार भी खरीद के बोरों को भरने के बाद मशीन से सिलाई के लिए खास निर्देश हैं। यहां बता दें कि बोरों की क्वालिटी और उन पर छापा और मार्का के लिए भी एजेंसियों को विशेष निर्देश हैं।
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केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक कांटों और वाट-माप के लिए भी निर्देश हैं कि क्रय केंद्रों पर ही इनकी विशेष जांच कराई जाए। इनका वाट-माप विभाग द्वारा सत्यापन कराने के बाद ही तौल के लिए हरी झंडी दी जाएगी। बोरों की सिलाई, स्टैंसलिंग और कलर कोडिंग के संबंध में खाद्य आयुक्त को निर्देश जारी करने हैं। अभी इस प्रकार के निर्देशों के संबंध में क्रय एंजेंसियां नकार रही हैं।
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क्रय एजेंसियां और पंजीकृत सहकारी समितियां खुले बाजार से बोरा खरीद कर काम करेंगी। निर्देशानुसार स्टेंसलिंग के साथ-साथ चटक नीले रंग से उप्र सरकार और स्वच्छ भारत मिशन का लोगो स्क्रीन पेंटिंग से अनिवार्य रूप से लगेगी।
क्राप कटिंग बनेगा किसान के गेहूं का आधार
बदायूं। डीएम द्वारा क्राप कटिंग के आधार पर ही किसान के खेत की पैदावार का आंकलन लगेगा। आढ़तियों और दलालों को क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने से बचने के लिए यह आधार महत्व रखेगा। किसानों से क्रय केंद्र पर जोतबही, खसरा, खतौनी आदि से प्रति हेक्टेयर उत्पादन के हिसाब से ही गेहूं का आकलन होगा और उसी आधार पर गेहूं क्रय होगा। अधिक होने पर उसे संदेहजनक मानकर लौटाया जा सकता है।
सप्ताह में दो दिन की खरीद छोटे किसानों से
बदायूं। यहां बता दें कि एक सप्ताह में दो दिन छोटी जोत वाले किसानों के लिए आरक्षित की जा रही है। इसके लिए आरक्षित दिन जिलाधिकारी निर्धारित करेंगे। केंद्रों पर इन दिनों के नाम मोटे अक्षरों में प्रदर्शित किया जाएगा। उस दिन बड़े किसानों का गेहूं नहीं खरीदा जाएगा। इससे छोटे किसानों को अपना गेहूं बेचने में आसानी होगी।