ऐतिहासिक नगर ‘इतिहास’ से ही महरूम
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ऐतिहासिक धरोहर, सहस्त्रबाहु का किला, मखदूम जहां का मकबरा, छोटी, बड़ी ज्यारत, राजा महीपाल का किला, जामा मस्जिद, रोजा, सागरताल आदि के अलावा इतिहास के पन्नों में नाम दर्ज कराने वाले साहित्यकार फानी बदायूंनी, शकील बदायूंनी, डॉ. ब्रजेंद्र अवस्थी, डॉ. उर्मिलेश शंखधार का जिला खुद ‘इतिहास’ से महरूम है। जी हां, यहां महाविद्यालयों में इतिहास विषय ही नहीं पढ़ाया जाता है। स्नातक स्तर पर तो जरूर एक-दो कॉलेजों में इसकी शिक्षा दी जा रही है, लेकिन परास्नातक में न ही ये विषय है और न ही किसी लेक्चरर की तैनाती। कभी इसे लेकर न ही कॉलेज प्रबंधन ने विचार किया और न ही जिले में इतिहास को संजोने वालों ने। इतिहास विषय में रुचि रखने वाले स्टूडेंट्स आज भी बाहर जिलों में जाकर इसकी शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं।
ऐतिहासिक नगर बदायूं में इतिहास की पढ़ाई के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। बदायूं का इतिहास पुराना है। बावजूद इसके जिले में परास्नातक स्तर पर इतिहास के नाम पर कोई पढ़ाई नहीं होती है, क्योंकि इसकी सबसे बड़ी वजह महाविद्यालयों में इतिहास विषय का नहीं होना है। जिले के डिग्री कॉलेज में स्नातक स्तर पर ही इतिहास की पढ़ाई चल रही है, लेकिन परास्नातक पर यह सुविधा नहीं है। हालांकि कई महाविद्यालय इस विषय को लेकर विश्वविद्यालय से मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली है। शहर के एनएमएसएन दास पीजी कॉलेज में स्नातक और परास्नातक में इतिहास विषय है ही नहीं। इतना ही नहीं गिंदो देवी महिला महाविद्यालय में भी इतिहास नहीं पढ़ाया जाता है। यही स्थिति बिल्सी के राजकीय महाविद्यालय और जीवी पंत डिग्री कॉलेज कछला की है। वहीं बिल्सी के राजकीय कॉलेज, सहसवान के पुरुषोत्तम लाल शर्मा सहसवान, राजकीय कॉलेज बदायूं, राजकीय कॉलेज बिसौली में स्नातक में जरूर विषय पढ़ाया जा रहा है। इसमें भी बिसौली में कोई लेक्चरर नहीं है।
...आखिर जिले में क्यों नहीं इतिहास से लगाव
जिले में इतिहास विषय से लगाव क्यों नहीं है, यह अपने आप में सवाल विषय का रूप ले चुका है। शिक्षाविद् भी इसका कारण तलाश रहे हैं। हालांकि दास पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वीके शर्मा का कहना है कि इतिहास विषय एक अच्छा विषय है। आईएएस, पीसीएस परीक्षा में इस विषय का कॉबिनेशन अच्छा माना जाता है। सामान्य ज्ञान भी कवर होता है। बावजूद इसके इतिहास नहीं पढ़ाया जाता है। बताते हैं कि इसका प्रमुख कारण इंटर में भी इस विषय में बच्चों की रुचि कम लेना हो सकता है। विषय को लेकर इसकी पहल होनी चाहिए।
प्राचीन, मध्यकाल का ज्ञान देता है इतिहास
इतिहास में जहां जानकारियों का भंडार होता है। वहीं प्राचीन, मध्यकाल और आधुनिक काल को विभाजित कर शिक्षा प्रदान की जाती है। परास्नातक में तीनों खंड में चूज कर किसी एक में शिक्षा ग्रहण की जाती है।