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Budaun News: सीढ़ियों से फिसल रही थी भीड़, फिर पता चला इस दुनिया में नहीं रहे अम्मा और बाबूजी
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बदायूं। मनसा देवी मंदिर के रास्ते पर मची भगदड़ में जान गंवाने वाले रामभरोसे और उनकी पत्नी शांति देवी के साथ गए चंद्रपाल ने हादसे की जो कहानी सुनाई, वह दिल दहलाने वाली है। बताया कि उन्होंने ढाई सौ मीटर दूरी से देखा कि किस तरह भीड़ सीढि़यों से फिसलकर गिर रही थी। काफी देर बाद पता चला कि भगदड़ में दबकर अम्मा शांति देवी और उनके पति रामभरोसे की जान चली गई।
चंद्रपाल ने बताया कि रविवार सुबह उन्हें स्नान करने में देरी हो गई थी। इस वजह से वह व उनके साथ करीब आठ लोग नीचे रह गए थे। रामभरोसे, उनकी पत्नी शांति, भूपेंद्र व छन्ने ने पांच बजे ही स्नान कर लिया था। इस वजह से वे दर्शन के लिए पहले ही रवाना हो गए। वह उनसे पीछे-पीछे जल्द आने के लिए कह गए थे। बोले- शांति अम्मा कह गई थीं- बेटा जल्दी आना, फिर बहुत भीड़ हो जाएगी। उनकी बात पर ध्यान देते हुए वह दर्शन के लिए कुछ ही देर बाद पीछे-पीछे चल दिए।
दंपती व उनके बीच करीब ढाई सौ मीटर का फासला था। तभी अचानक तेज शोर शराबा सुनाई देने लगा। लोग सीढ़ियों से उतरकर पीछे की ओर भागने लगे। उस वक्त वह निचली सीढि़यों के पास ही थे। इस वजह से भीड़ का धक्का उनकी ओर आने लगे। वह नीचे पहुंचने की कोशिश करते कि उससे पहले ही उन पर भीड़ में शामिल लोग गिरने लगे। इससे वह और उनके साथ मौजूद अगरपाल, सुमित, चंद्रपाल व रामप्यारी धक्कामुक्की में गिर गए। इससे हल्की फुल्की चोटें आईं।
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फिर कुछ ही देर बाद चीख पुकारें सुनाई देने लगीं। समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या हुआ। सब लोग डरे-डरे नजर आने लगे। कुछ लोग अपनों को तलाशते हुए इधर-उधर भागते नजर आने लगे। कुछ लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए सीढ़ियों से ही छलांग लगा दी। करीब 15 मिनट बाद पता चला कि किसी ने बिजली के तार टूटकर गिरने की अफवाह उड़ाई थी। कुछ ही देर में पुलिस आ गई, फिर हमें ऊपर नहीं जाने दिया। कई घंटे बाद पता चला कि गांव के रामभरोसे व शांति अब इस दुनिया में नहीं रहे।
गहरी नींद में सो गया था, आंख खुली तो पता चला दंपती नहीं रहे
दातागंज कोतवाली क्षेत्र के गांव नाथपुर निवासी पिकअप चालक सुनील भी इस हादसे की चपेट में आने से बच गया। उसने बताया कि वह हादसे के वक्त नीचे ही गाड़ी में सो गया था। थकान होने की वजह से वह दर्शन करने नहीं गया था, लेकिन जब लोगों की चीख पुकार व पुलिस के सायरनों की आवाज सुनी तो वह नींद से जागा। उसके बाद ही उसे हादसे की जानकारी हुई।
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चंद्रपाल ने बताया कि रविवार सुबह उन्हें स्नान करने में देरी हो गई थी। इस वजह से वह व उनके साथ करीब आठ लोग नीचे रह गए थे। रामभरोसे, उनकी पत्नी शांति, भूपेंद्र व छन्ने ने पांच बजे ही स्नान कर लिया था। इस वजह से वे दर्शन के लिए पहले ही रवाना हो गए। वह उनसे पीछे-पीछे जल्द आने के लिए कह गए थे। बोले- शांति अम्मा कह गई थीं- बेटा जल्दी आना, फिर बहुत भीड़ हो जाएगी। उनकी बात पर ध्यान देते हुए वह दर्शन के लिए कुछ ही देर बाद पीछे-पीछे चल दिए।
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दंपती व उनके बीच करीब ढाई सौ मीटर का फासला था। तभी अचानक तेज शोर शराबा सुनाई देने लगा। लोग सीढ़ियों से उतरकर पीछे की ओर भागने लगे। उस वक्त वह निचली सीढि़यों के पास ही थे। इस वजह से भीड़ का धक्का उनकी ओर आने लगे। वह नीचे पहुंचने की कोशिश करते कि उससे पहले ही उन पर भीड़ में शामिल लोग गिरने लगे। इससे वह और उनके साथ मौजूद अगरपाल, सुमित, चंद्रपाल व रामप्यारी धक्कामुक्की में गिर गए। इससे हल्की फुल्की चोटें आईं।
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फिर कुछ ही देर बाद चीख पुकारें सुनाई देने लगीं। समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या हुआ। सब लोग डरे-डरे नजर आने लगे। कुछ लोग अपनों को तलाशते हुए इधर-उधर भागते नजर आने लगे। कुछ लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए सीढ़ियों से ही छलांग लगा दी। करीब 15 मिनट बाद पता चला कि किसी ने बिजली के तार टूटकर गिरने की अफवाह उड़ाई थी। कुछ ही देर में पुलिस आ गई, फिर हमें ऊपर नहीं जाने दिया। कई घंटे बाद पता चला कि गांव के रामभरोसे व शांति अब इस दुनिया में नहीं रहे।
गहरी नींद में सो गया था, आंख खुली तो पता चला दंपती नहीं रहे
दातागंज कोतवाली क्षेत्र के गांव नाथपुर निवासी पिकअप चालक सुनील भी इस हादसे की चपेट में आने से बच गया। उसने बताया कि वह हादसे के वक्त नीचे ही गाड़ी में सो गया था। थकान होने की वजह से वह दर्शन करने नहीं गया था, लेकिन जब लोगों की चीख पुकार व पुलिस के सायरनों की आवाज सुनी तो वह नींद से जागा। उसके बाद ही उसे हादसे की जानकारी हुई।