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Budaun News: शहर सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार

Sat, 29 Apr 2023 01:47 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Updated Sat, 29 Apr 2023 01:47 AM IST
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The contest on the city seat is expected to be triangular
बदायूं। शहर सीट पर जहां भाजपा की दीपमाला गोयल और रालोद समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी फात्मा रजा के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है, वहीं कांग्रेस भी अपना दमखम दिखाने में पीछे नहीं है। इसके पीछे साहू समाज के वोट बैंक को कारण माना जा रहा है। अब तक चुने गए केवल तीन हिंदू पालिकाध्यक्षों में साहू समाज के ओमप्रकाश मथुरिया शहर सीट से तीन बार पालिकाध्यक्ष रहे थे।
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शहर सीट पर अधिकांश मुस्लिम समाज का ही पालिकाध्यक्ष रहा है। केवल ओमप्रकाश मथुरिया, जोगेंद्र सिंह अनेजा व दीपमाला गोयल ही हिंदू समाज से इस सीट पर जीत का परचम लहरा सके हैं। भाजपा ने इस बार निवर्तमान पालिकाध्यक्ष दीपमाला गोयल पर भरोसा जताया है। सपा की ओर से सिंबल न दिए जाने पर उनकी जीत इस बार सुनिश्चित मानी जा रही थी, लेकिन ऐन मौके पर पूर्व विधायक आबिद रजा की पत्नी फात्मा रजा ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन कराकर भाजपा के सामने चुनौती पेश कर दी। इसके बाद तीसरे मजबूत दावेदार के रूप में सपा नेता फखरे अहमद शोबी की पत्नी फायजा नकबी का नाम था, लेकिन उनके नाम वापस लेने के बाद कांग्रेस को तीसरे मजबूत प्रत्याशी के रूप में देखा जाने लगा है। ऐसे में मामला त्रिकोणीय बनता नजर आने लगा है।
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इसके पीछे साहू समाज के वोट को भी आधार माना जा रहा है। साहू समाज के ओम प्रकाश मथुरिया ने 1991, 1995 तथा 2012 में पालिकाध्यक्ष का चुनाव जीता था। आंकड़ों के अनुसार शहर में साहू वोटों की संख्या 15 हजार से अधिक है, लेकिन भाजपा द्वारा ओमप्रकाश मथुरिया के बाद साहू समाज के किसी भी व्यक्ति को तरजीह नहीं दी गई। इस चुनाव में भी समाज के कुछ लोग दावेदार थे, लेकिन उन्हें किनारे कर दिया गया। ऐसे में साहू समाज इस बार अंदरखाने विरोध में आ गया है, जिसके फायदा कांग्रेस उठाना चाह रही है।
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कांग्रेस से इस बार साहू समाज की माधवी साहू मैदान में हैं। ऐसे में नाराज साहू समाज का वोट भाजपा से छितरकर निर्दलीय प्रत्याशी फात्मा रजा तथा कांग्रेस प्रत्याशी को चला जाए तो भी कोई बड़ी बात नहीं होगी। यही वजह है कि अब कांग्रेस खुद को मुकाबले में मानकर चुनाव को त्रिकोणीय बना रही है।

2006 में मथुरिया रहे दूसरे स्थान पर
साल 2006 के चुनाव में भाजपा ने ओमप्रकाश मथुरिया का टिकट काटकर दीपमाला गोयल को प्रत्याशी बनाया था। इस साल सपा से आबिद रजा चुनाव जीते थे, जबकि ओमप्रकाश मथुरिया निर्दलीय लड़कर भी दूसरे स्थान पर रहे थे। दीपमाला गोयल इस चुनाव में चौथे स्थान पर खिसक गई थीं। तीसरे स्थान पर कांग्रेस से चुनाव लड़े रब्बन सैफी रहे थे।

साहू समाज के ओमप्रकाश मथुरिया तीन बार पालिकाध्यक्ष रहे, लेकिन भाजपा ने फिर भी साहू समाज को हमेशा उपेक्षा भरी नजर से देखा। ये समाज की ताकत का ही नतीजा था कि जब साल 2006 में भाजपा ने ओमप्रकाश मथुरिया को टिकट नहीं दिया था तो भी वह निर्दलीय लड़कर दूसरे स्थान पर रहे, जबकि भाजपा प्रत्याशी चौथे स्थान पर खिसक गई थीं। साहू समाज का वोट करीब 16 हजार है, लेकिन भाजपा इसे छह हजार बताकर लोगों को भ्रम में डाल रही है। पिछले पांच साल में भाजपा ने हमेशा साहू समाज की उपेक्षा की है, जिसका खामियाजा इस चुनाव में उसे भुगतना होगा। -विजय साहू, प्रदेश सचिव, तैलिक महासभा उत्तरप्रदेश
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