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Budaun News: हाईवे पर गूंजे भोले के जयकारे, थिरके कलाकार
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कछला से जल भरकर लाता कांवड़ियों का जत्था। संवाद
उझानी/ कछला। कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ियों में बृहस्पतिवार दोपहर गजब का उत्साह नजर आया। भोले के जयकारे लगाते हुए शिव मंदिरों की ओर निकले कांवड़िये रास्ते में कलाकारों के साथ जमकर नाचे।
कछला गंगाघाट से कावड़ यात्रा शुरू होने से पहले टोलियाें में शामिल शिवभक्तों ने आस्था की डुबकी लगाई। गंगा स्नान के बाद उन्होंने पहले भगवान सूर्य देव को अर्घ्य दिया, फिर गंगा मइया की आरती की। इससे पहले पुरोहितों से कांवड़ पूजन कराया। कांवड़ियों ने उन्हें दक्षिण भी भेंट की।
घाट पर कांवड़ियों के पहुंचने का सिलसिला शाम तक चलता रहा। सिरौली (बरेली) की टोली में शामिल कांवड़िये सुनील ने बताया कि उनकी टोली गोला गोकर्णनाथ के शिव मंदिर में जलाभिषेक करेगी।
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कांवड़ यात्रा के दौरान गंगा घाट से बरेली तक हाईवे कांवड़ियों से आवाजाही से गुलजार रहा। रास्ते में श्रद्धालुओं ने कांवड़ियों का स्वागत-सत्कार भी किया। गंगाघाट के पुरोहित हरिओम शर्मा ने बताया कि शुक्रवार शाम से कांवड़ियों की संख्या में इजाफा होने लगेगा।
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चौथे दिन भी सूना रहा कछला का दक्षिणी घाट
कछला गंगा किनारे के दक्षिणी घाट (कासगंज जिले की ओर) पर गंगा स्नान पर रोक के चौथे दिन भी दुकानदारों को अफसरों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से कोई राहत नहीं मिल पाई। दक्षिणी घाट के प्रसाद विक्रेताओं की दुकानें बृहस्पतिवार को भी नहीं खुलीं। बता दें कि बुधवार को भाजपा विधायक हरीश शाक्य ने दक्षिणी घाट पर पहुंच कर हालात देखे थे। इससे पहले दुकानदार एडीएम (प्रशासन) को ज्ञापन देकर घाट पर गंगा स्नान करने से रोक हटाने की मांग कर चुके हैं।
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पकड़े छुट्टा पशु, गोआश्रय पहुंचाए
कस्बे में मुख्य बाजार स्थित कांवड़ियों के निकलने वाले मार्ग पर दो-तीन दिनों से छुट्टा गोवंशीय पशुओं की आवाजाही बनी हुई है। बुधवार शाम तो कांवड़ियों की टोली में सांड़ घुस आने से अफरातफरी भी मच गई थी। पालिका के सफाई निरीक्षक हरीश त्यागी ने बताया कि बृहस्पतिवार दोपहर तक आधा दर्जन गोवंशीय छुट्टा पशुओं को पकडड़कर गोआश्रय स्थल भेजा गया है।
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फोटो-39
शिवपूजन में बेलपत्र का है विशेष महत्व
बदायूं। कायस्थ धर्मशाला प्रांगण शहवाजपुर बदायूं में चल रही श्री शिवमहापुराण कथा में कथा व्यास दीपक शंखधार ने बेलपत्र की महिमा वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व है, महादेव एक बेलपत्र अर्पण करने से प्रसन्न हो जाते हैं, इसीलिए तो उन्हें आशुतोष कहा जाता है। कथा व्यास दीपक ने कहा कि भगवान भांग-धतूरा और बेलपत्र से प्रसन्न होते हैं। संवाद
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कछला गंगाघाट से कावड़ यात्रा शुरू होने से पहले टोलियाें में शामिल शिवभक्तों ने आस्था की डुबकी लगाई। गंगा स्नान के बाद उन्होंने पहले भगवान सूर्य देव को अर्घ्य दिया, फिर गंगा मइया की आरती की। इससे पहले पुरोहितों से कांवड़ पूजन कराया। कांवड़ियों ने उन्हें दक्षिण भी भेंट की।
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घाट पर कांवड़ियों के पहुंचने का सिलसिला शाम तक चलता रहा। सिरौली (बरेली) की टोली में शामिल कांवड़िये सुनील ने बताया कि उनकी टोली गोला गोकर्णनाथ के शिव मंदिर में जलाभिषेक करेगी।
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कांवड़ यात्रा के दौरान गंगा घाट से बरेली तक हाईवे कांवड़ियों से आवाजाही से गुलजार रहा। रास्ते में श्रद्धालुओं ने कांवड़ियों का स्वागत-सत्कार भी किया। गंगाघाट के पुरोहित हरिओम शर्मा ने बताया कि शुक्रवार शाम से कांवड़ियों की संख्या में इजाफा होने लगेगा।
चौथे दिन भी सूना रहा कछला का दक्षिणी घाट
कछला गंगा किनारे के दक्षिणी घाट (कासगंज जिले की ओर) पर गंगा स्नान पर रोक के चौथे दिन भी दुकानदारों को अफसरों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से कोई राहत नहीं मिल पाई। दक्षिणी घाट के प्रसाद विक्रेताओं की दुकानें बृहस्पतिवार को भी नहीं खुलीं। बता दें कि बुधवार को भाजपा विधायक हरीश शाक्य ने दक्षिणी घाट पर पहुंच कर हालात देखे थे। इससे पहले दुकानदार एडीएम (प्रशासन) को ज्ञापन देकर घाट पर गंगा स्नान करने से रोक हटाने की मांग कर चुके हैं।
पकड़े छुट्टा पशु, गोआश्रय पहुंचाए
कस्बे में मुख्य बाजार स्थित कांवड़ियों के निकलने वाले मार्ग पर दो-तीन दिनों से छुट्टा गोवंशीय पशुओं की आवाजाही बनी हुई है। बुधवार शाम तो कांवड़ियों की टोली में सांड़ घुस आने से अफरातफरी भी मच गई थी। पालिका के सफाई निरीक्षक हरीश त्यागी ने बताया कि बृहस्पतिवार दोपहर तक आधा दर्जन गोवंशीय छुट्टा पशुओं को पकडड़कर गोआश्रय स्थल भेजा गया है।
फोटो-39
शिवपूजन में बेलपत्र का है विशेष महत्व
बदायूं। कायस्थ धर्मशाला प्रांगण शहवाजपुर बदायूं में चल रही श्री शिवमहापुराण कथा में कथा व्यास दीपक शंखधार ने बेलपत्र की महिमा वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व है, महादेव एक बेलपत्र अर्पण करने से प्रसन्न हो जाते हैं, इसीलिए तो उन्हें आशुतोष कहा जाता है। कथा व्यास दीपक ने कहा कि भगवान भांग-धतूरा और बेलपत्र से प्रसन्न होते हैं। संवाद