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Budaun News: हाईवे का वनवे होना और चालक को झपकी आना बनी हादसे की वजह
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निजी बस, इसी से टकराई रोडवेज की बस।संवाद
बदायूं। बरेली-मथुरा हाईवे पर हुए भीषण हादसे की मुख्य वजह हाईवे पर निर्माण कार्य चलने की वजह से वनवे व्यवस्था लागू होना और चालक को झपकी आना रही। परिवहन अधिकारियों ने अपनी जांच में दोनों बसों के कागजात पूरे पाए हैं।
एआरटीओ हरिओम कुमार ने बताया कि निजी बस में 55 तो रोडवेज की बस में करीब 25 यात्री हादसे के समय मौजूद थे। जांच में रोडवेज बस की रफ्तार धीमी तो निजी बस की तेज सामने आई है। हादसे की सूचना पर सीओ उझानी डॉ. देवेंद्र कुमार, कोतवाली पुलिस के अलावा एआरएम राजेश पाठक व एआरटीओ ने घटना स्थल का मौका मुआयना किया।
हाईवे पर एनएचआई ने संकेतक व वनवे होने के बोर्ड भी लगा रखे हैं, जिससे वाहन चालकों को पता रहे कि हाईवे वनवे है। इसके बाद भी निजी बस का चालक रोडवेज बस को नहीं देख सका। संभावना है कि उसे झपकी आई और हादसा हो गया। पुलिस भी इस मामले की गहनता से जांच कर रही है।
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वनवे पर नहीं थी पुलिस तैनात
रात में हाईवे पर वनवे लागू किया गया है, लेकिन इन जगहों पर न तो एनएचआई का कोई कर्मचारी था और न ही पुलिस बल की ही तैनाती थी। यही वजह रही कि वाहन चालक बेरोकटोक वाहनों को रात में दौड़ाते आ रहे हैं। अगर इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो बड़े हादसों से इंकार नहीं किया जा सकता।
पुलिस की देखरेख में कछला गंगा घाट पर किया गया शवों का अंतिम संस्कार
हादसे की सूचना पर परिवार से लेकर रिश्तेदार सभी मोर्चरी व मेडिकल कॉलेज में पहुंच गए थे। रविवार दोपहर बाद पोस्टमॉर्टम होने के बाद परिजनों ने शवों का कछला गंगा घाट पर ही अंतिम संस्कार कर दिया।
आननफानन में पूरा किया गया भांवरों का कार्यक्रम
जलमाला कार्यक्रम समाप्त होने के बाद बरातियों को लेकर बस शाहजहांपुर के बराकलां से चल दी थी। लड़का पक्ष के खास लोग शादी के बाकी के कार्यक्रम निपटाने के लिए रुक गए थे। जैसे ही हादसे की सूचना मिली तो आननफानन में भांवरों का कार्यक्रम पूरा कराके विदा कर दी गई। लड़की पक्ष के लोग विदा होने के साथ ही बदायूं के लिए रवाना हो गए।
धमाके की आवाज सुन दौड़े आसपास के लोग, हादसा देखकर रह गए दंग
- बरातियों की चीत्कार से दहल उठे दिल, बस से निकालकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। धमाके की आवाज सुन आसपास के गांव के लोग हादसा देख दंग रह गए। बरातियों की चीत्कार सुन लोगों का दिल दहल गया। लोगों ने घायलों को बसों से निकलवाकर राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंचाने में सहयोग किया।
कछला के रहने वाले किशन ने बताया कि वह मौसेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए कासगंज गए थे। दोनों बेटे किशन व वासु भी बरात में जाने की जिद करने लगे। रिश्तेदारों ने कहा कि बच्चे हैं चलने दो। उनको क्या पता था कि उनके बेटे की मौत रास्ते में ही इंतजार कर रही थी। इस हादसे में जहां उन्होंने बड़े बेटे को खो दिया है, वहीं छोटा बेटा वासु का मेडिकल कॉलेज में उपचार चल रहा है।
मृतक सोनू के परिजनों ने बताया कि वह घर का इकलौता चिराग था। बरात में परिवार के साथ ही बहन भी गई थी। भाई की मौत के बाद बहन बेसुध है। जब भी होश आता है वह भाई का नाम लेकर चीखने लगती। उसको देख रिश्तेदार से लेकर देखने वालों की भी आंखें नम हो गईं। करीब छह घंटे की कार्रवाई के बाद तीनों शवों को जिला मुख्यालय भेजा जा सका। इसके बाद देर शाम पोस्टमॉर्टम कराने के बाद परिवार के लोग कासगंज के लिए रवाना हो गए।
पहले भी हो चुके हैं कई बड़े हादसे
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब्दुल्लागंज जिरौलिया मोड़ पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। यहां तेज रफ्तार और ओवरटेकिंग के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मोड़ पर संकेतक, स्पीड ब्रेकर और ट्रैफिक नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।
कांच और टूटी सीटें दे रहीं भीषण हादसे की गवाही
पुलिस ने दोनों बसों को कब्जे में लेकर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर तेज रफ्तार और मोड़ पर लापरवाही को वजह माना जा रहा है। इस दर्दनाक हादसे ने तीन परिवारों से उनके अपने छीन लिए। जो बस खुशियों के गीतों के साथ घर लौट रही थी, वही कुछ ही पलों में सिसकियों से भर गई। हाईवे पर बिखरे कांच और टूटी सीटें इस बात की गवाही दे रही थीं कि टक्कर कितनी भयावह रही होगी।
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एआरटीओ हरिओम कुमार ने बताया कि निजी बस में 55 तो रोडवेज की बस में करीब 25 यात्री हादसे के समय मौजूद थे। जांच में रोडवेज बस की रफ्तार धीमी तो निजी बस की तेज सामने आई है। हादसे की सूचना पर सीओ उझानी डॉ. देवेंद्र कुमार, कोतवाली पुलिस के अलावा एआरएम राजेश पाठक व एआरटीओ ने घटना स्थल का मौका मुआयना किया।
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हाईवे पर एनएचआई ने संकेतक व वनवे होने के बोर्ड भी लगा रखे हैं, जिससे वाहन चालकों को पता रहे कि हाईवे वनवे है। इसके बाद भी निजी बस का चालक रोडवेज बस को नहीं देख सका। संभावना है कि उसे झपकी आई और हादसा हो गया। पुलिस भी इस मामले की गहनता से जांच कर रही है।
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वनवे पर नहीं थी पुलिस तैनात
रात में हाईवे पर वनवे लागू किया गया है, लेकिन इन जगहों पर न तो एनएचआई का कोई कर्मचारी था और न ही पुलिस बल की ही तैनाती थी। यही वजह रही कि वाहन चालक बेरोकटोक वाहनों को रात में दौड़ाते आ रहे हैं। अगर इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो बड़े हादसों से इंकार नहीं किया जा सकता।
पुलिस की देखरेख में कछला गंगा घाट पर किया गया शवों का अंतिम संस्कार
हादसे की सूचना पर परिवार से लेकर रिश्तेदार सभी मोर्चरी व मेडिकल कॉलेज में पहुंच गए थे। रविवार दोपहर बाद पोस्टमॉर्टम होने के बाद परिजनों ने शवों का कछला गंगा घाट पर ही अंतिम संस्कार कर दिया।
आननफानन में पूरा किया गया भांवरों का कार्यक्रम
जलमाला कार्यक्रम समाप्त होने के बाद बरातियों को लेकर बस शाहजहांपुर के बराकलां से चल दी थी। लड़का पक्ष के खास लोग शादी के बाकी के कार्यक्रम निपटाने के लिए रुक गए थे। जैसे ही हादसे की सूचना मिली तो आननफानन में भांवरों का कार्यक्रम पूरा कराके विदा कर दी गई। लड़की पक्ष के लोग विदा होने के साथ ही बदायूं के लिए रवाना हो गए।
धमाके की आवाज सुन दौड़े आसपास के लोग, हादसा देखकर रह गए दंग
- बरातियों की चीत्कार से दहल उठे दिल, बस से निकालकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। धमाके की आवाज सुन आसपास के गांव के लोग हादसा देख दंग रह गए। बरातियों की चीत्कार सुन लोगों का दिल दहल गया। लोगों ने घायलों को बसों से निकलवाकर राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंचाने में सहयोग किया।
कछला के रहने वाले किशन ने बताया कि वह मौसेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए कासगंज गए थे। दोनों बेटे किशन व वासु भी बरात में जाने की जिद करने लगे। रिश्तेदारों ने कहा कि बच्चे हैं चलने दो। उनको क्या पता था कि उनके बेटे की मौत रास्ते में ही इंतजार कर रही थी। इस हादसे में जहां उन्होंने बड़े बेटे को खो दिया है, वहीं छोटा बेटा वासु का मेडिकल कॉलेज में उपचार चल रहा है।
मृतक सोनू के परिजनों ने बताया कि वह घर का इकलौता चिराग था। बरात में परिवार के साथ ही बहन भी गई थी। भाई की मौत के बाद बहन बेसुध है। जब भी होश आता है वह भाई का नाम लेकर चीखने लगती। उसको देख रिश्तेदार से लेकर देखने वालों की भी आंखें नम हो गईं। करीब छह घंटे की कार्रवाई के बाद तीनों शवों को जिला मुख्यालय भेजा जा सका। इसके बाद देर शाम पोस्टमॉर्टम कराने के बाद परिवार के लोग कासगंज के लिए रवाना हो गए।
पहले भी हो चुके हैं कई बड़े हादसे
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब्दुल्लागंज जिरौलिया मोड़ पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। यहां तेज रफ्तार और ओवरटेकिंग के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मोड़ पर संकेतक, स्पीड ब्रेकर और ट्रैफिक नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।
कांच और टूटी सीटें दे रहीं भीषण हादसे की गवाही
पुलिस ने दोनों बसों को कब्जे में लेकर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर तेज रफ्तार और मोड़ पर लापरवाही को वजह माना जा रहा है। इस दर्दनाक हादसे ने तीन परिवारों से उनके अपने छीन लिए। जो बस खुशियों के गीतों के साथ घर लौट रही थी, वही कुछ ही पलों में सिसकियों से भर गई। हाईवे पर बिखरे कांच और टूटी सीटें इस बात की गवाही दे रही थीं कि टक्कर कितनी भयावह रही होगी।

निजी बस, इसी से टकराई रोडवेज की बस।संवाद

निजी बस, इसी से टकराई रोडवेज की बस।संवाद