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Budaun News: रामलीला महोत्सव में हुआ ताड़का वध का मंचन
Tue, 17 Oct 2023 12:51 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Tue, 17 Oct 2023 12:51 AM IST
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गांधी ग्राउंड में रामलीला का मंचन करते कलाकार। संवाद
बदायूं। गांधी ग्राउंड में चल रहे श्रीराम लीला महोत्सव में सोमवार को कलाकारों ने ताड़का वध का मंचन किया। इसमें दिखाया कि ऋषियों के यज्ञ की रक्षा के लिए विश्वामित्र अयोध्या के राजा दशरथ से श्रीराम और लक्ष्मण को मांगते हैं। उन्हें लेकर वन की ओर प्रस्थान करते हैं। अगस्त ऋषि के शाप से ताड़का इस वन में रहती है और आने-जाने लोगों की हत्या कर देती है।
ताड़का के पुत्र सुबाहु और मारीच उसके कार्यों को बढ़ावा देते रहते हैं। इस दौरान श्रीराम-लक्ष्मण विश्वामित्र को यज्ञ का शुभारंभ करने को कहते हैं। इसकी सूचना पर ताड़का आती है। तभी भगवान श्रीराम उसका वध कर देते हैं। ताड़का का वध होते ही लोग भगवान राम की जय-जयकार करने लगते हैं।
कादरचौक। राधाकांत मंदिर परिसर में चल रही रामलीला में ताड़का वध और अहिल्या उद्धार की लीला का मंचन किया गया। मिथिला नरेश राजा जनक से सीता के स्वयंवर का निमंत्रण प्राप्त होने पर ऋषि विश्वामित्र, श्रीराम और लक्ष्मण को लेकर मिथिला नगरी के लिए रवाना होते हैं। रास्ते में गौतम ऋषि के आश्रम में पहुंचते है। पति गौतम के श्राप से पत्थर की शिला बनी अहिल्या का भगवान श्रीराम उद्धार करते हैं। मिथिला में ऋषि विश्वामित्र और राम-लक्ष्मण का राजमहल में स्वागत होता है। ऋषि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर गुरु की पूजा के लिए राम फूल लेने के लिए राजा जनक की वाटिका में जाते हैं, वहां जनकदुलारी से उनकी भेंट होती है।
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ताड़का के पुत्र सुबाहु और मारीच उसके कार्यों को बढ़ावा देते रहते हैं। इस दौरान श्रीराम-लक्ष्मण विश्वामित्र को यज्ञ का शुभारंभ करने को कहते हैं। इसकी सूचना पर ताड़का आती है। तभी भगवान श्रीराम उसका वध कर देते हैं। ताड़का का वध होते ही लोग भगवान राम की जय-जयकार करने लगते हैं।
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कादरचौक। राधाकांत मंदिर परिसर में चल रही रामलीला में ताड़का वध और अहिल्या उद्धार की लीला का मंचन किया गया। मिथिला नरेश राजा जनक से सीता के स्वयंवर का निमंत्रण प्राप्त होने पर ऋषि विश्वामित्र, श्रीराम और लक्ष्मण को लेकर मिथिला नगरी के लिए रवाना होते हैं। रास्ते में गौतम ऋषि के आश्रम में पहुंचते है। पति गौतम के श्राप से पत्थर की शिला बनी अहिल्या का भगवान श्रीराम उद्धार करते हैं। मिथिला में ऋषि विश्वामित्र और राम-लक्ष्मण का राजमहल में स्वागत होता है। ऋषि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर गुरु की पूजा के लिए राम फूल लेने के लिए राजा जनक की वाटिका में जाते हैं, वहां जनकदुलारी से उनकी भेंट होती है।
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