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कछला घाट पर प्रसाद विक्रेताओं की दुकानें जलमग्न, सामान भी नहीं समेट पाए
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गंगा में उफान के बाद कछला घाट पर प्रसाद विक्रेताओं की दुकानों में घुसा पानी। संवाद
- फोटो : BADAUN
उझानी/कछला। गंगा के जलस्तर में निरंतर वृद्धि के बाद मंगलवार को उफान के साथ ही प्रसाद विक्रेताओं की झोपड़ीनुमा दुकानों में पानी घुस गया। इससे उन्हें हजारों रुपये का नुकसान हुआ है। मंगलवार सुबह करीब चार बजे अचानक गंगा के जलस्तर में उफान आया तो पानी झोपड़ीनुमा दुकानों के अंदर ही नहीं, बल्कि उनसे कई मीटर आगे तक निकल गया। बताते हैं कि अधिकतर दुकानदार उस वक्त सो रहे थे।
जागे तो घुटनों तक पानी नजर आया। दुकानदार शेरसिंह मीना और इंद्रपाल कश्यप ने बताया कि कई दुकानदारों के छप्पर भी बह गए हैं। शेरसिंह, इंद्रपाल के अलावा ओमकार कश्यप, प्रकाश, रामसिंह, मंजू सैनी, राजकुमार गुप्ता आदि दुकानदारों को हजारों रुपये का नुकसान हुआ है। दुकानदारों ने बताया कि पानी भर जाने की वजह से फिलहाल वे झोपड़ियों को हटा भी नहीं पा रहे हैं। जलस्तर में अगर फिर से वृद्धि हुई तो उन्हें सामान समेटकर आरती स्थल और शिवमंदिर के पास बने चबूतरे की ओर प्रसाद समेत सामान लगाना पड़ेगा।
घाट चपेट में आने से बढ़ा कांवड़ियों को खतरा
कछला में पक्के घाट नहीं हैं। कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले जिला पंचायत प्रशासन की ओर से बेतरतीब बालू को समतल करके कच्चे घाटों का रूप दिया जा चुका हैं। कच्चे घाट भी गंगा में उफान के साथ ही अंदर समा गए, ऐसे में कांवड़ियों को आस्था की डुबकी लगाने के लिए गहरे में जाना जान पर जोखिम साबित हो सकता है।
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गंगा के जलस्तर में वृद्धि की वजह से प्रसाद विक्रेताओं की दुकानें प्रभावित हुई हैं। घाट के हालात पर नगर पंचायत प्रशासन की नजर बनी हुई है। जिला पंचायत की ओर से प्राइवेट गोताखोर गहराई वाले स्थानों को चिह्नित करने का काम शुरू कर चुके हैं। कांवड़ियों को गहराई की तरफ नहीं जाने दिया जाएगा। - रतन कुमार पांडेय, ईओ, कछला
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जागे तो घुटनों तक पानी नजर आया। दुकानदार शेरसिंह मीना और इंद्रपाल कश्यप ने बताया कि कई दुकानदारों के छप्पर भी बह गए हैं। शेरसिंह, इंद्रपाल के अलावा ओमकार कश्यप, प्रकाश, रामसिंह, मंजू सैनी, राजकुमार गुप्ता आदि दुकानदारों को हजारों रुपये का नुकसान हुआ है। दुकानदारों ने बताया कि पानी भर जाने की वजह से फिलहाल वे झोपड़ियों को हटा भी नहीं पा रहे हैं। जलस्तर में अगर फिर से वृद्धि हुई तो उन्हें सामान समेटकर आरती स्थल और शिवमंदिर के पास बने चबूतरे की ओर प्रसाद समेत सामान लगाना पड़ेगा।
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घाट चपेट में आने से बढ़ा कांवड़ियों को खतरा
कछला में पक्के घाट नहीं हैं। कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले जिला पंचायत प्रशासन की ओर से बेतरतीब बालू को समतल करके कच्चे घाटों का रूप दिया जा चुका हैं। कच्चे घाट भी गंगा में उफान के साथ ही अंदर समा गए, ऐसे में कांवड़ियों को आस्था की डुबकी लगाने के लिए गहरे में जाना जान पर जोखिम साबित हो सकता है।
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गंगा के जलस्तर में वृद्धि की वजह से प्रसाद विक्रेताओं की दुकानें प्रभावित हुई हैं। घाट के हालात पर नगर पंचायत प्रशासन की नजर बनी हुई है। जिला पंचायत की ओर से प्राइवेट गोताखोर गहराई वाले स्थानों को चिह्नित करने का काम शुरू कर चुके हैं। कांवड़ियों को गहराई की तरफ नहीं जाने दिया जाएगा। - रतन कुमार पांडेय, ईओ, कछला