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सुविधाएं मिलीं तो आगे बढ़ते गए खिलाड़ी

Thu, 07 Nov 2019 01:42 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 07 Nov 2019 01:42 AM IST
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बदायूं। सुविधाएं और सही मार्गदर्शन मिले तो खिलाड़ी अपने स्कूूल ही नहीं बल्कि जनपद का नाम भी दूर-दूर तक रोशन करने की सामर्थ्य रखते हैं। कुछ ऐसे ही खिलाड़ी एसके इंटर कॉलेज से निकले और जनपद व प्रदेश स्तर तक की प्रतियोगिता में शामिल होकर कॉलेज के लिए मेडल लाते गए।
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श्रीकृष्ण इंटर कॉलेज में खेल सुविधाओं ने खिलाड़ियों को उनका मुकाम हासिल कराया। हालांकि खेल मैदान स्कूल से दूर है। इसके बाद भी कॉलेज प्रशासन खिलाड़ियों की हर सुविधा और जरूरत का ध्यान रखता है। शुरुआती दौर में इंटर हाउस कंप्टीशन में छात्रों का खेल के लिए चयन हुआ। नियमित अभ्यास का नतीजा रहा कि कॉलेज के खिलाड़ी स्कूली नेशनल प्रतियोगिता तक पहुंचे। कॉलेज टीम कई बार जनपद स्तर पर हुई एथलेटिक्स प्रतियोगिता में ओवरऑल चैंपियन रही। इसके बाद प्रदेश स्तर तक खिलाड़ियों ने बेहतर प्रदर्शन किया और स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतकर कॉलेज और जनपद का नाम रोशन किया। वर्ष 2003 में स्कूली नेशनल की हैंडबॉल प्रतियोगिता में विजय यादव ने शानदार प्रदर्शन किया तो राहुल यादव वर्ष 2006 में हैंडबॉल प्रतियोगिता के लिए स्कूली नेशनल स्तर तक पहुंचे। वर्ष 2011 मेें अनुज यादव ने 800 मीटर की स्कूली नेशनल दौड़ प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया।
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- कॉलेज के खेल शिक्षक रमेश सिहं कहते हैं कि एक खेल अध्यापक सभी खेलों का विशेषज्ञ नहीं हो सकता। ऐसे में सिर्फ आवश्कता की पूर्ति ही होती है। फिर भी जो अध्यापक अपने स्तर से मेहनत कर लेते हैं। उसका फल मिलता ही है। इसके अलावा पौष्टिक आहार, नियमित अभ्यास, स्वस्थ शरीर और अच्छे चरित्र से एक बेहतर खिलाड़ी का निर्माण होता है। अगर यह क्वालिटी खिलाड़ी के अंदर न हों तो एक बेहतर खिलाड़ी भी अपना मुकाम हासिल नहीं कर सकता। दुर्व्यसनों में फंसकर धीरे-धीरे उसका पतन हो जाता है और वह अपनी मंजिल से कोसों दूर हो जाता है। वैसे तो ये सूत्र सभी पर लागू होता है, लेकिन खिलाड़ियों को इस पर विशेष ध्यान देना होता है।
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- पुष्ट शरीर के लिए पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है। कॉलेज प्रशासन के पास इतना बजट नहीं होता जो खिलाड़ियों को शक्तिवर्धक आहार उपलब्ध करा सके। वहीं अभिभावक भी बच्चों का सपोर्ट नहीं करते हैं। नियमित अभ्यास के बाद पौष्टिक आहार की जरूरत और मनोबल बढ़ाने में सहयोग तो परिवार से मिलता है, लेकिन परिवार खेल से अधिक बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करते हैं। उनका मानना है कि पढ़कर नौकरी मिलेगी। खेल से क्या हासिल होगा।

श्रीकृष्ण इंटर कॉलेज के छात्रों ने बताया कि कॉलेज का अपना खेल मैदान तो है, लेकिन कॉलेज से खेल मैदान की दूरी करीब दो किलोमीटर है। ऐसे में खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास करने में दिक्कत आती है। फिर भी खिलाड़ी स्कूल के बाद अभ्यास के लिए मैदान में पहुंचते हैं। अगर स्कूल परिसर में मैदान होता तो खिलाड़ियों का समय बच जाता।
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