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50 हजार मांगे तो छह हजार देकर टरकाया

Tue, 23 Jun 2015 11:45 PM IST
badaun
badaun Updated Tue, 23 Jun 2015 11:45 PM IST
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Six thousand by 50 thousand invited Trkaya

धरना के दौरान तबियत बिगडने पर जिला अस्पताल में भर्ती रहे लक्ष्मण (58) के पुत्र हरपाल ने जीएम राजीव जैन से उनके इलाज के लिए उनके फंड और वेतन से 50 हजार रुपये की मांग की। बताते हैं इस पर जीएम ने उसे बुरी तरह लताड़ दिया। कर्मचारी नेताओं के कहने पर मात्र छह हजार रुपये ही दिए। निराश हरपाल इतने रुपये लेकर चला आया। वह बाहर इलाज कराने को ले जाने की सोच ही रहा था कि मंगलवार को जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने उसके पिता को बरेली रेफर कर दिया। जहां उनकी मौत हो गई। जीएम के दिए रुपये भी उनके काम न आ सके।

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पुत्र ने बताया कि उसके पिता के पीएफ के करीब ढाई लाख और वेतन के 30 हजार रुपये मिल पर बकाया हैं। मिल प्रबंधन उसके बकाया को स्वीकार भी करता है। रिेटेनिंग का लगभग 40 हजार रुपया दे दिया था। सो उन्होंने अपने सबसे छोटे पुत्र की हाल में हुई शादी में खर्च कर दिया। वह अपने ही लिए ही नहीं अपने कर्मचारी साथियों की पीड़ा को समझते हुए उनकी लड़ाई में भी शामिल होतेे रहे। वह स्वांस रोग से पीड़ित थे लेकिन जब उनको कुछ रिलेक्स मिला तो धरने पर आ बैठे। मृतक लक्ष्मण के पुत्र ने मिल के जीएम की बेवफाई पर तीखे कटाक्ष किए हैं।
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बेटे भी करते हैं मजदूरी
मृत कर्मचारी लक्ष्मण के परिवार की आर्थिक दशा ठीक नहीं है। उसके चार पुत्र हैं। सभी मजदूरी कर पेट भरने लायक ही कमा पाते हैं। उनकी मौत से परिवार के मुखिया का साया चला गया। परिवार में तीसरी पीढ़ी भी शुरू हो चुकी है। उसके चार पुत्रों में से तीन पुत्रों की शादी हो चुकी है। तीसरे नंबर के पुत्र लालाराम की शादी तो अभी पांच जून को हुई है। उसकी शादी में आई उसकी विवाहिता पुत्री विमला तो अपनी ससुराल भी नहीं गई है। बड़ा बेटा हरपाल अपने पिता की लाश के साथ है। दूसरे नंबर का बेटा जसवीर ओर चौथे नंबर का पुत्र ओमपाल भी घर पर है। सूचना पर परिवार वाले भी मालवीय आवास पर जहां शव रखा है पहुंचने लगे हैं। कर्मचारी भी फिर से यहो जुटने लगे हैं, लेकिन प्रशासन फिर भी लापरवाह रहा। यहां पुलिस देर रात तक पुलिस की कोई व्यवस्था नहीं थी।
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शासन से लगातार धन की मांग की जाती रही है। धन न मिल पाने के कारण वह भी निराश हैं। कर्मचारियों का भुगतान कर पाने में मुश्किल हो रही है।  जितना धन मिला था, उतना भुगतान वह कर चुके हैं।
- राजीव जैन, जीएम दि किसान सहकारी चीनी मिल, शेखूपुर

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