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Budaun News: दवाओं का टोटा...बाहर से दवाई लेने के लिए पर्चा लिख रहे सरकारी डाॅक्टर
Mon, 15 Apr 2024 05:06 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Mon, 15 Apr 2024 05:06 AM IST
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जिला अस्पताल। संवाद
बदायूं। अफसर भले ही अच्छे इलाज के साथ दवाओं की उपलब्धता का दावा कर रहे हों लेकिन हकीकत कुछ और ही है। जिला अस्पताल में सर्दी, खांसी और बुखार के अलावा दवा उपलब्ध नहीं हैं। कई बीमारियों के लिए डॉक्टर, मरीजों को मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने की सलाह दे रहे हैं।
मौसम में बदलाव के कारण बीमारियां बढ़ रही हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 1000 से 1200 के करीब मरीज परामर्श लेने आ रहे हैं। खांसी-जुकाम के औसतन 150 से 200 मरीज हैं। बाकी के मरीज अन्य बीमारियों के आ रहे हैं। खांसी जुकाम की दवा तो दी जा रही है लेकिन अन्य बीमारियों में दवाएं मरीजों को मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं। मरीजों से बातचीत में यह बात साफ हुई है। यह भी पता लगा कि एक रुपये के सरकारी पर्चे पर डाक्टर कोई भी दवा मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए नहीं लिखते हैं। इसके लिए सादा कागज की पर्ची होती है।
डाॅक्टर साहब ही बता देते हैं उनके पर्चे में लिखी दवाएं कहां मिलेंगी
जिला अस्पताल में इस्लामनगर क्षेत्र से पहुंचे राजू ने बताया कि कई दिनों से तेज बुखार आ रहा है। दवा लेने अस्पताल आए हैं। डॉक्टर ने दवा लिखी थी लेकिन अस्पताल के स्टोर में एंटीबायोटिक दवा नहीं थी। डॉक्टर से कहकर बाहर की दवा लिखवाई लेकिन जिस मेडिकल से हम दवा लेने गए वहां दवा नहीं मिली। डॉक्टर के बताए गए मेडिकल पर ही दवा मिल सकी।
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हजरतपुर निवासी रतेंद्र कुमार ने बताया कि आंख की तकलीफ पर दवा लेने अस्पताल आए हैं। डॉक्टर ने कुछ दवा तो अस्पताल से ही दे दी लेकिन कुछ दवाएं मेडिकल स्टोर से लेने के लिए लिखी थीं। डॉक्टर के बताए गए मेडिकल पर ही दवा मिली हैं।
कादरचौक निवासी ओमप्रकाश ने बताया पत्नी को बुखार के साथ उल्टी दस्त हो रहे थे। कमजोरी होने पर जिला अस्पताल लेकर आए हैं। ओपीडी में पीसीएम, लीवोसिट्रिजिन सीरप, ब्रूफेन टेबलेट मिली। कुछ दवाएं बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए लिखी गईं। लिखते समय ही वह भी डॉक्टर साहब ने बताया कि अस्पताल के सामने कुमार मेडिकल पर ही मिलेगी। यह स्थिति तब है जब अस्पताल प्रशासन पर्याप्त मात्रा में दवाएं होने का दावा कर रहा है।
जिला अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में दवाएं हैं। जो दवाएं नहीं हैं, उनके स्थान पर दूसरी दवाएं उपलब्ध हैं। दवा काउंटरों पर मरीजों को दवाएं नहीं दी जा रही हैं। स्टोर इंचार्ज से दवाओं की उपलब्धता का डाटा मांगा गया है। जो जरूरी दवाएं नहीं हैं, उन्हें मंगवाएंगे।
- डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस
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मौसम में बदलाव के कारण बीमारियां बढ़ रही हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 1000 से 1200 के करीब मरीज परामर्श लेने आ रहे हैं। खांसी-जुकाम के औसतन 150 से 200 मरीज हैं। बाकी के मरीज अन्य बीमारियों के आ रहे हैं। खांसी जुकाम की दवा तो दी जा रही है लेकिन अन्य बीमारियों में दवाएं मरीजों को मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं। मरीजों से बातचीत में यह बात साफ हुई है। यह भी पता लगा कि एक रुपये के सरकारी पर्चे पर डाक्टर कोई भी दवा मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए नहीं लिखते हैं। इसके लिए सादा कागज की पर्ची होती है।
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डाॅक्टर साहब ही बता देते हैं उनके पर्चे में लिखी दवाएं कहां मिलेंगी
जिला अस्पताल में इस्लामनगर क्षेत्र से पहुंचे राजू ने बताया कि कई दिनों से तेज बुखार आ रहा है। दवा लेने अस्पताल आए हैं। डॉक्टर ने दवा लिखी थी लेकिन अस्पताल के स्टोर में एंटीबायोटिक दवा नहीं थी। डॉक्टर से कहकर बाहर की दवा लिखवाई लेकिन जिस मेडिकल से हम दवा लेने गए वहां दवा नहीं मिली। डॉक्टर के बताए गए मेडिकल पर ही दवा मिल सकी।
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हजरतपुर निवासी रतेंद्र कुमार ने बताया कि आंख की तकलीफ पर दवा लेने अस्पताल आए हैं। डॉक्टर ने कुछ दवा तो अस्पताल से ही दे दी लेकिन कुछ दवाएं मेडिकल स्टोर से लेने के लिए लिखी थीं। डॉक्टर के बताए गए मेडिकल पर ही दवा मिली हैं।
कादरचौक निवासी ओमप्रकाश ने बताया पत्नी को बुखार के साथ उल्टी दस्त हो रहे थे। कमजोरी होने पर जिला अस्पताल लेकर आए हैं। ओपीडी में पीसीएम, लीवोसिट्रिजिन सीरप, ब्रूफेन टेबलेट मिली। कुछ दवाएं बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए लिखी गईं। लिखते समय ही वह भी डॉक्टर साहब ने बताया कि अस्पताल के सामने कुमार मेडिकल पर ही मिलेगी। यह स्थिति तब है जब अस्पताल प्रशासन पर्याप्त मात्रा में दवाएं होने का दावा कर रहा है।
जिला अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में दवाएं हैं। जो दवाएं नहीं हैं, उनके स्थान पर दूसरी दवाएं उपलब्ध हैं। दवा काउंटरों पर मरीजों को दवाएं नहीं दी जा रही हैं। स्टोर इंचार्ज से दवाओं की उपलब्धता का डाटा मांगा गया है। जो जरूरी दवाएं नहीं हैं, उन्हें मंगवाएंगे।
- डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस