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शराब बेचने में कार्रवाई, बनाने का जिक्र नहीं
दातागंज (बदायूं)
Updated Sun, 07 Feb 2016 07:43 PM IST
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इलाके में पसरा कच्ची शराब का कारोबार दिनों दिन फलफूल रहा है। लगाम न लगने के पीछे के कारणों पर गौर किया गया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। दरअसल पुलिस और आबकारी टीम किन्हीं वजहों से कारोबारियों पर कार्रवाई में कोताही बरतती है। शराब के कारोबारियों पर धाराएं लगाने में खेल किया जाता है।
दातागंज क्षेत्र कच्ची शराब के उत्पादन और बिक्री के लिए बदनाम है। इलाके के करीब तीन दर्जन गांवों में कच्ची शराब बनाने का धंधा होता है। अमूमन हर तीसरे दिन इन गांवों में शराब ठेकेदार के आदमी, पुलिस और आबकारी विभाग की टीमें छापामारी करती है। अधिकांश छापों में मौके पर तैयार शराब, लहन और दहकती भट्ठियां मिलती हैं। इनमें ज्यादातर मामले गांव में ही निपटा दिए जाते हैं। जो मामले थाने-कोतवाली तक आ भी जाते हैं तो वहां पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने में खेल कर देती है। भट्ठी के साथ शराब बनाना दिखाने पर धारा 60/62 लगती है। इसमें आरोपी को जेल जाना होता है। पुलिस को भी लंबी लिखा-पढ़ी करनी होती।
इसकी जगह पुलिस आरोपी पर शराब लाने-ले जाने का आरोप दिखाती है। इसमें जमानत थाने से ही दे दी जाती है। आरोपी को जेल भी नहीं जाना पड़ता। इतना ही नहीं इसमें लिखापढ़त का काफी पचड़ा भी खत्म हो जाता है। अपवाद के लिए कुछ मामलों को छोड़कर बाकी में आरोपी के पक्ष में दमदार सिफारिश आ ही जाती है। इससे पुलिस सिफारिश करने वाले को खुश करने के साथ ही मौके पर जमानत के नाम पर अपना भला भी कर लेती है। यही वजह है कि शराब बनाने वालों के दिल में कानून का खौफ नहीं रहता और वह इस धंधे को छोडने के लिए मन से कभी तैयार नहीं होते। कारोबार खात्मे के प्रति पुलिस की सुस्ती की पोल विभागीय आंकड़े ही खोल देते हैं।
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प्रभारी निरीक्षक ब्रजेश यादवका कहना है कि शराब बनाने वालों से बेचने वालों की संख्या ज्यादा होती है। कुछ समय से महिलाएं भी शराब बेचती और बनाती हुई पकड़ी गई हैं। महिलाओं को जेल भेजने में ज्यादा औपचारिकता करनी पड़ती है। इसलिए तत्काल जमानत दे देते हैं।
दातागंज क्षेत्र कच्ची शराब के उत्पादन और बिक्री के लिए बदनाम है। इलाके के करीब तीन दर्जन गांवों में कच्ची शराब बनाने का धंधा होता है। अमूमन हर तीसरे दिन इन गांवों में शराब ठेकेदार के आदमी, पुलिस और आबकारी विभाग की टीमें छापामारी करती है। अधिकांश छापों में मौके पर तैयार शराब, लहन और दहकती भट्ठियां मिलती हैं। इनमें ज्यादातर मामले गांव में ही निपटा दिए जाते हैं। जो मामले थाने-कोतवाली तक आ भी जाते हैं तो वहां पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने में खेल कर देती है। भट्ठी के साथ शराब बनाना दिखाने पर धारा 60/62 लगती है। इसमें आरोपी को जेल जाना होता है। पुलिस को भी लंबी लिखा-पढ़ी करनी होती।
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इसकी जगह पुलिस आरोपी पर शराब लाने-ले जाने का आरोप दिखाती है। इसमें जमानत थाने से ही दे दी जाती है। आरोपी को जेल भी नहीं जाना पड़ता। इतना ही नहीं इसमें लिखापढ़त का काफी पचड़ा भी खत्म हो जाता है। अपवाद के लिए कुछ मामलों को छोड़कर बाकी में आरोपी के पक्ष में दमदार सिफारिश आ ही जाती है। इससे पुलिस सिफारिश करने वाले को खुश करने के साथ ही मौके पर जमानत के नाम पर अपना भला भी कर लेती है। यही वजह है कि शराब बनाने वालों के दिल में कानून का खौफ नहीं रहता और वह इस धंधे को छोडने के लिए मन से कभी तैयार नहीं होते। कारोबार खात्मे के प्रति पुलिस की सुस्ती की पोल विभागीय आंकड़े ही खोल देते हैं।
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प्रभारी निरीक्षक ब्रजेश यादवका कहना है कि शराब बनाने वालों से बेचने वालों की संख्या ज्यादा होती है। कुछ समय से महिलाएं भी शराब बेचती और बनाती हुई पकड़ी गई हैं। महिलाओं को जेल भेजने में ज्यादा औपचारिकता करनी पड़ती है। इसलिए तत्काल जमानत दे देते हैं।