फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   sehar ki Shaan

गागर में सागर भर दिखाया डॉ. इसहाक तबीब ने

Sun, 19 Dec 2021 01:28 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 19 Dec 2021 01:28 AM IST
विज्ञापन
sehar ki Shaan
डॉ. इसहाक तबीब की पुस्तकें। संवाद - फोटो : BADAUN
बदायूं। शहर निवासी बुजुर्ग लेखक डॉ. इसहाक तबीब ने बिहारी की तरह ‘गागर में सागर’ भरने का काम किया है। हिंदी साहित्य सृजन के साथ ही दोहा, छंद से जुड़ी उनकी रचनाएं बेमिसाल हैं। आयुर्वेदाचार्य डॉ. तबीब ने बाल साहित्य के साथ ही बच्चों के पाठ्यक्रम से जुड़ी पुस्तकों की भी रचना की है। डॉ. तबीब की 162 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
विज्ञापन

डॉ. इसहाक तबीब का जन्म 22 जुलाई 1951 को मोहल्ला सोथा में हुआ था। उनके पिता इकबाल हुसैन डॉक्टर थे। इसी पेशे को उन्होंने आजीविका के तौर पर अपनाया। स्थानीय दास कॉलेज से अर्थशास्त्र और उर्दू में एमए करने के साथ ही उन्होंने दिल्ली से आयुर्वेदाचार्य का कोर्स किया। पढ़ाई के दौरान ही उन्हें लेखन का शौक लगा जो आज तक जारी है। पहले उनके लेख पत्र पत्रिकाओं में छपते रहे। शुरुआती लेखन में उर्दू की रचनाएं लिखीं जिनमें गद्य, पद्य के साथ ही हास्य व्यंग्य भी शामिल था।
विज्ञापन

सन 2007 में उन्होंने हिंदी लेखन प्रारंभ किया और ‘दोहे तबीब के’ नाम की पहली पुस्तक प्रकाशित हुई।
डॉ. तबीब बताते हैं कि सात सौ दोहे की तबीब सतसई उनकी प्रमुख रचनाओं में से एक है। इसी तरह पर्याय सतसई है। इसमें दोहों के रूप में सात सौ पर्यायवाची शब्द हैं जो बच्चों को पढ़ाई के लिहाज से काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं। छंदों के तीस रूपों दोहा, सोरठा, गजल, मुकरी, चौपाई, कुंडलिया आदि में उनकी रचनाएं हैं। कुल 162 रचनाओं में 100 पुस्तकें बच्चों से ही संबंधित हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

-
देश और महिलाओं को प्राथमिकता
डॉ. तबीब की 110 पुस्तकें महिला शक्ति को समर्पित हैं। यानि खबरों की प्रस्तावना में सुभद्रा कुमारी चौहान, महादेवी वर्मा जैसी हस्तियों को पुस्तक समर्पित की गई है। लेखक ने संबंधित महिला लेखिका या कवयित्री का परिचय देकर यह भी बताया है कि उन्हें यह पुस्तक क्यों समर्पित की गई है। इसी तरह 137 रचनाओं का प्रारंभ देश को समर्पित पंक्तियों या दोहों के साथ किया गया है।

-
तबीब बोले- हिंदी वाले ही कर रहे हिंदी का नुकसान
डॉ. तबीब का दर्द है कि हिंदुस्तान में हिंदी का सर्वाधिक नुकसान हिंदीभाषी ही कर रहे हैं। उनका कहना है कि हिंदी के बड़े साहित्यकार व कवि और राष्ट्रवाद की बात करने वाले नेता ही अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पढ़ाते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी एक ही बेटी है। पर्याप्त संसाधनों के बाद भी उन्होंने बेटी की एमए तक की पढ़ाई हिंदी माध्यम से ही कराई। परिवार में लोग हिंदी में ही बात करते हैं। हम हिंदुस्तानी हैं तो हमें हिंदी को अपनाने से झिझक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अफसोस जताया कि कवि सम्मेलन व मुशायरों के मंच अब फूहड़ता के लिए चर्चित होते हैं। बैंडबाजों की संस्कृति कवि सम्मेलन में आ गई है।
-
अपना प्यारा देश ही भारतवर्ष कहाय...
डॉ. तबीब के दोहों में देश प्रेम की अनूठी छाप देखने को मिलती है-
अपना प्यारा देश ही भारतवर्ष कहाय
वैभवशाली लोक में इसको माना जाए।
अहित बंधु निज देश का करते जो इंसान
अड़ जा उनकी राह में बनकर तू चट्टान।
डॉ. तबीब ने प्रेम की परिभाषा दोहों में कुछ ऐसे दी है-
किस्सा सारा प्रेम तो बिना कहे कह जाए
हो वाणी यदि बंद तो आंखों से बतियाय। संवाद

डॉ. इसहाक तबीब। संवाद

डॉ. इसहाक तबीब। संवाद- फोटो : BADAUN

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed