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सैंपल देने तक ही सीमित रह गई फर्म, कपड़ा देने से इंकार
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बदायूं। परिषदीय विद्यालय में यूनिफॉर्म के लिए कई फर्मों ने कपड़ा देने के लिए आवेदन किया था। जिला प्रशासन ने इसमें से 33 फर्मों को सही मानते हुए नामित किया, ताकि उन फर्म के माध्यम से समूह की महिलाओं को कपड़ा उपलब्ध कराया जाए, जिससे वह सिलकर स्कूली बच्चों को दे सकें, लेकिन अंतिम समय पर फर्मों ने विभाग को कपड़ा उपलब्ध कराने से मना कर दिया है। उनका कहना है कि अभी उनके पास कपड़ा नहीं है। ऐसे में विभाग के सामने संकट खड़ा हो गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बार सरकारी स्कूलों में यूनिफॉर्म के लिए दी जाने वाली धनराशि को बढ़ा दिया है। इसके पीछे उनकी मंशा स्कूली बच्चों को बेहतर कपड़े की यूनिफॉर्म देने की है। योजना में रुपये बढ़ने का जिक्र होतेे ही यूनिफॉर्म माफिया सक्रिय हो गए, लेकिन शासन ने इस बार एक और बदलाव किया, जिसकी वजह से इन माफिया की परेशानी बढ़ गई। इस वजह से पहले ड्रेस माफिया ने जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन जब बात नहीं बनी तो उन्होंने शासन की गाइड लाइन के अनुरूप काम करना शुरू करते हुए मानक के अनुरूप कपड़े का सैंपल दिखाकर खुद की फर्म को नामित करा लिया। जब जिला प्रशासन से हामी भर दी, तो फर्म मालिकों ने अंतिम समय में विभाग के सामने कपड़ा नहीं होने की असमर्थता जाहिर करते हुए कपड़ा देने से इंकार कर दिया। ऐसे में विभाग के सामने संकट है कि अब यूनिफॉर्म कैसे बनवाई जाए।
डीएम ने तीन दिन का दिया समय
- ड्रेस को लेकर माफिया की मनमानी की खबर लगातार डीएम के पास पहुंच रही है। इसको लेकर गुरुवार को डीएम ने अधिकारियों की बैठक ली। इसमें साफ निर्देश दिए कि तीन दिन के अंदर बताएं कि यूनिफॉर्म के मामले में क्या निर्णय हुआ है। इसके बाद में वह खुद ही इस प्रकरण को देखेंगे।
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जिन फर्म ने आवेदन किया था, उनके कपड़े के सैंपल को ठीक मानते हुए नामित किया गया था। अब उन फर्मों के मालिकों की ओर से कपड़ा उपलब्ध कराने से मना किया जा रहा है। शासन की ओर से जो निर्देश हैं, उनका पालन पूरी तरह से किया जाएगा। इसके बारे में डीएम और सीडीओ को अवगत कराया गया है। कपड़ा उपलब्ध कराने की भी प्रक्रिया चल रही है।
-रामपाल सिंह राजपूत, बीएसए
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बार सरकारी स्कूलों में यूनिफॉर्म के लिए दी जाने वाली धनराशि को बढ़ा दिया है। इसके पीछे उनकी मंशा स्कूली बच्चों को बेहतर कपड़े की यूनिफॉर्म देने की है। योजना में रुपये बढ़ने का जिक्र होतेे ही यूनिफॉर्म माफिया सक्रिय हो गए, लेकिन शासन ने इस बार एक और बदलाव किया, जिसकी वजह से इन माफिया की परेशानी बढ़ गई। इस वजह से पहले ड्रेस माफिया ने जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन जब बात नहीं बनी तो उन्होंने शासन की गाइड लाइन के अनुरूप काम करना शुरू करते हुए मानक के अनुरूप कपड़े का सैंपल दिखाकर खुद की फर्म को नामित करा लिया। जब जिला प्रशासन से हामी भर दी, तो फर्म मालिकों ने अंतिम समय में विभाग के सामने कपड़ा नहीं होने की असमर्थता जाहिर करते हुए कपड़ा देने से इंकार कर दिया। ऐसे में विभाग के सामने संकट है कि अब यूनिफॉर्म कैसे बनवाई जाए।
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डीएम ने तीन दिन का दिया समय
- ड्रेस को लेकर माफिया की मनमानी की खबर लगातार डीएम के पास पहुंच रही है। इसको लेकर गुरुवार को डीएम ने अधिकारियों की बैठक ली। इसमें साफ निर्देश दिए कि तीन दिन के अंदर बताएं कि यूनिफॉर्म के मामले में क्या निर्णय हुआ है। इसके बाद में वह खुद ही इस प्रकरण को देखेंगे।
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जिन फर्म ने आवेदन किया था, उनके कपड़े के सैंपल को ठीक मानते हुए नामित किया गया था। अब उन फर्मों के मालिकों की ओर से कपड़ा उपलब्ध कराने से मना किया जा रहा है। शासन की ओर से जो निर्देश हैं, उनका पालन पूरी तरह से किया जाएगा। इसके बारे में डीएम और सीडीओ को अवगत कराया गया है। कपड़ा उपलब्ध कराने की भी प्रक्रिया चल रही है।
-रामपाल सिंह राजपूत, बीएसए