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बरसात में रोडवेज का सफर भीगे कपड़े बनेंगे हमसफर
बदायूं।
Updated Mon, 25 Sep 2017 12:13 AM IST
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बस
- फोटो : अमर उजाला
-टूटे शीशे, टपकती छत, फिर भी सफर कर रहे यात्री
-कमाई में नंबर वन, सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं
बेहतर सुविधा और आसान सफर। यह दावा है राज्य सड़क परिवहन निगम का। महकमे के इस दावे की कलई दो-तीन दिन से हो रही बरसात ने खोल दी है। असलियत पर गौर करें तो रोडवेज की ज्यादातर बसों में यात्रियों को सफर के दौरान भीग जाने की सुविधा से रूबरू होना पड़ रहा है। वजह, टूटे शीशे और छतों से टपकता पानी यात्रियों का हमसफर बन गया है।
बारिश के दिनों में रोडवेज बसों की हालत दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। इसका नजारा रविवार को रोडवेज बस स्टैंड पर देखने को मिला। कई बसों के शीशे टूटे मिले तो सीटें भी ऐसी नहीं थीं कि आराम मिल पाए। कुछेक बसों की छत भी इस कदर जर्जर दिखी, उसके ऊपर कोई यात्री लगेज लोड करने को चढ़ जाए तो नीचे पैर निकल आए। निगम के एक कर्मचारी ने बताया कि अधिकतर बसें ऐसी हैं, जिन्हें स्टार्ट करने के लिए धक्का लगाना पड़ता है तो ड्राइवर के सामने लगे शीशे पर लगा वाइपर तक नहीं चलता है। और तो और ऐसी बसों को लांग रूट पर चलाया जाता है। चालकों का कहना था कि बस की मरम्मत न होने के कारण बारिश का पानी छत से टपकता है, ऐसे में सवारियां सफर के दौरान परिचालक से भिड़ जाती हैं। कई बार तो परिचालक भी उकता कर अफसर की भूमिका पर सवाल उठाने लगते हैं। उनका भी दबी जुबान कहना है कि उन्हें तो ड्यूटी से मतलब, आगे क्या होगा, यह अफसरों से पूछिए। सफर के दौरान यात्रियों और परिचालकों से नोकझोंक भी आम बात हो गई है।
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जिन बसों के शीशे टूटे है, उनमें मरम्मत का काम चल रहा है। वर्कशाप में पहुंचने के बाद बस को ठीक कराया जाता है। अगर चालक परिचालक की कोई समस्या है तो वह कार्यालय में आकर शिकायत करे।
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-राजेश कुमार, एआरएम, बदायूं डिपो
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-कमाई में नंबर वन, सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं
बेहतर सुविधा और आसान सफर। यह दावा है राज्य सड़क परिवहन निगम का। महकमे के इस दावे की कलई दो-तीन दिन से हो रही बरसात ने खोल दी है। असलियत पर गौर करें तो रोडवेज की ज्यादातर बसों में यात्रियों को सफर के दौरान भीग जाने की सुविधा से रूबरू होना पड़ रहा है। वजह, टूटे शीशे और छतों से टपकता पानी यात्रियों का हमसफर बन गया है।
बारिश के दिनों में रोडवेज बसों की हालत दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। इसका नजारा रविवार को रोडवेज बस स्टैंड पर देखने को मिला। कई बसों के शीशे टूटे मिले तो सीटें भी ऐसी नहीं थीं कि आराम मिल पाए। कुछेक बसों की छत भी इस कदर जर्जर दिखी, उसके ऊपर कोई यात्री लगेज लोड करने को चढ़ जाए तो नीचे पैर निकल आए। निगम के एक कर्मचारी ने बताया कि अधिकतर बसें ऐसी हैं, जिन्हें स्टार्ट करने के लिए धक्का लगाना पड़ता है तो ड्राइवर के सामने लगे शीशे पर लगा वाइपर तक नहीं चलता है। और तो और ऐसी बसों को लांग रूट पर चलाया जाता है। चालकों का कहना था कि बस की मरम्मत न होने के कारण बारिश का पानी छत से टपकता है, ऐसे में सवारियां सफर के दौरान परिचालक से भिड़ जाती हैं। कई बार तो परिचालक भी उकता कर अफसर की भूमिका पर सवाल उठाने लगते हैं। उनका भी दबी जुबान कहना है कि उन्हें तो ड्यूटी से मतलब, आगे क्या होगा, यह अफसरों से पूछिए। सफर के दौरान यात्रियों और परिचालकों से नोकझोंक भी आम बात हो गई है।
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जिन बसों के शीशे टूटे है, उनमें मरम्मत का काम चल रहा है। वर्कशाप में पहुंचने के बाद बस को ठीक कराया जाता है। अगर चालक परिचालक की कोई समस्या है तो वह कार्यालय में आकर शिकायत करे।
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-राजेश कुमार, एआरएम, बदायूं डिपो