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Budaun News: एंबुलेंस मामले में आज आ सकती रिपोर्ट, चालक व ईएमटी स्टाफ के दर्ज हुए बयान
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बदायूं। उसहैत क्षेत्र में घायल युवक तक समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंचने के मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच तेज हो गई है। सोमवार को विभागीय अधिकारियों ने संबंधित एंबुलेंस चालक और ईएमटी स्टाफ के बयान दर्ज किए। साथ ही पीड़ित परिवार का मोबाइल नंबर लेकर कॉल डिटेल भी खंगाली जा रही है। माना जा रहा है कि मंगलवार को जांच रिपोर्ट सामने आ सकती है।
रविवार को सामने आए इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन सेवाओं की पोल खोल दी थी। उसावां क्षेत्र के गांव सोंधेमई निवासी महेश अपनी बहन के घर गांव अक्टूइयां आए थे। रविवार तड़के छत से गिरने के बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। परिजनों ने 108 एंबुलेंस सेवा को कॉल किया, लेकिन आरोप है कि घंटों तक कोई वाहन मौके पर नहीं पहुंचा।
महेश दर्द से तड़पते रहे और परिजन मदद का इंतजार करते रहे। जब कोई राहत नहीं मिली तो गांव निवासी श्यामपाल के ई-रिक्शा पर चारपाई बांधकर घायल को उसहैत कस्बे तक ले जाया गया। वहां निजी डॉक्टर से प्राथमिक उपचार कराया गया। घटना मीडिया में आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि कॉल रिसीव होने के बाद एंबुलेंस क्यों नहीं भेजी गई और किस स्तर पर लापरवाही हुई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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20 मिनट में पहुंचनी चाहिए थी एंबुलेंस
विभागीय मानकों के अनुसार, इमरजेंसी कॉल मिलने के बाद शहरी क्षेत्र में 20 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में तय समय सीमा के भीतर एंबुलेंस पहुंचाना अनिवार्य है, लेकिन उसहैत मामले में घंटों देरी ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर एंबुलेंस की लेटलतीफी की शिकायतें सामने आती रही हैं।
इस मामले की जांच की जा रही है। सोमवार को ड्राइवर व स्टाफ का बयान दर्ज किया गया है। साथ ही किस नंबर से कॉल किया, इसके बारे में भी पता लगाया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद में कुछ कहा जा सकता है। - इस्लाम सैफी, एंबुलेंस प्रोग्राम प्रभारी
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रविवार को सामने आए इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन सेवाओं की पोल खोल दी थी। उसावां क्षेत्र के गांव सोंधेमई निवासी महेश अपनी बहन के घर गांव अक्टूइयां आए थे। रविवार तड़के छत से गिरने के बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। परिजनों ने 108 एंबुलेंस सेवा को कॉल किया, लेकिन आरोप है कि घंटों तक कोई वाहन मौके पर नहीं पहुंचा।
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महेश दर्द से तड़पते रहे और परिजन मदद का इंतजार करते रहे। जब कोई राहत नहीं मिली तो गांव निवासी श्यामपाल के ई-रिक्शा पर चारपाई बांधकर घायल को उसहैत कस्बे तक ले जाया गया। वहां निजी डॉक्टर से प्राथमिक उपचार कराया गया। घटना मीडिया में आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि कॉल रिसीव होने के बाद एंबुलेंस क्यों नहीं भेजी गई और किस स्तर पर लापरवाही हुई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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20 मिनट में पहुंचनी चाहिए थी एंबुलेंस
विभागीय मानकों के अनुसार, इमरजेंसी कॉल मिलने के बाद शहरी क्षेत्र में 20 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में तय समय सीमा के भीतर एंबुलेंस पहुंचाना अनिवार्य है, लेकिन उसहैत मामले में घंटों देरी ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर एंबुलेंस की लेटलतीफी की शिकायतें सामने आती रही हैं।
इस मामले की जांच की जा रही है। सोमवार को ड्राइवर व स्टाफ का बयान दर्ज किया गया है। साथ ही किस नंबर से कॉल किया, इसके बारे में भी पता लगाया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद में कुछ कहा जा सकता है। - इस्लाम सैफी, एंबुलेंस प्रोग्राम प्रभारी