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परिवार वालों की लापरवाही बनी मासूमों की मौत की वजह
बदायूं।
Updated Mon, 17 Jul 2017 11:24 PM IST
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परिवार वालों की लापरवाही बनी मासूमों की मौत की वजह
- फोटो : परिवार वालों की लापरवाही बनी मासूमों की मौत की वजह
अक्सर देखने में आता है कि परिवार के लोग छोटे बच्चों की शरारतों को नजरंदाज कर देते हैं। रविवार को दो बच्चों की शरारत नजरंदाज करना भारी पड़ गया। बच्चे खेलते-खेलते भूसे की बुर्जी में पहुंच गए। किसी का इस ओर ध्यान नहीं गया। बुर्जी ढह गई और दोनों बच्चे इसमें दब गए। इसके बाद भी काफी देर तक किसी का ध्यान इन पर नहीं गया। अगर परिवार के लोग दोनों बच्चों पर नजर रखे होते तो शायद बच्चों की जान न जाती।
मूसाझाग के गांव मोहम्मदनगर सुलरा में रविवार को हुई घटना ने गांव के लोगों के दिल को दहला दिया। दो साल की निधि अपनी मां के साथ यहां ननिहाल में आई थी। पड़ोस में रहने वाले वीरेंद्र के दो साल के बेटे अंशुल से वह काफी घुल-मिल गई थी। दोनों बच्चे अक्सर साथ में खेला करते थे। कभी निधि अंशुल के घर चली जाती तो कभी अंशुल निधि के पास आ जाता। रविवार को अंशुल निधि के घर आ गया था। किसी का ध्यान इस ओर नहीं गया कि बच्चे खेलते-खेलते उस कमरे में चले जाएंगे जहां भूसे की बुर्जी है। कमरे का दरवाजा भी खुला हुआ था। खेल रहे बच्चों की शरारतों को परिवार के लोग नजरअंदाज करते रहे। गौर करने वाली बात यह है कि भूसे में दबने के बाद परिवार के लोगों को करीब एक घंटे के बाद बच्चों की याद आई, तब तक काफी देरी हो चुकी थी। निधि के नाना चंद्रभान का भी कहना है कि उसे नहीं पता था कि भूसे की बुर्जी वाले कमरे का खुला हुआ दरवाजा बच्चों की मौत की वजह बन जाएगा। गांव के लोगों में भी इस बात की चर्चा रही।
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मूसाझाग के गांव मोहम्मदनगर सुलरा में रविवार को हुई घटना ने गांव के लोगों के दिल को दहला दिया। दो साल की निधि अपनी मां के साथ यहां ननिहाल में आई थी। पड़ोस में रहने वाले वीरेंद्र के दो साल के बेटे अंशुल से वह काफी घुल-मिल गई थी। दोनों बच्चे अक्सर साथ में खेला करते थे। कभी निधि अंशुल के घर चली जाती तो कभी अंशुल निधि के पास आ जाता। रविवार को अंशुल निधि के घर आ गया था। किसी का ध्यान इस ओर नहीं गया कि बच्चे खेलते-खेलते उस कमरे में चले जाएंगे जहां भूसे की बुर्जी है। कमरे का दरवाजा भी खुला हुआ था। खेल रहे बच्चों की शरारतों को परिवार के लोग नजरअंदाज करते रहे। गौर करने वाली बात यह है कि भूसे में दबने के बाद परिवार के लोगों को करीब एक घंटे के बाद बच्चों की याद आई, तब तक काफी देरी हो चुकी थी। निधि के नाना चंद्रभान का भी कहना है कि उसे नहीं पता था कि भूसे की बुर्जी वाले कमरे का खुला हुआ दरवाजा बच्चों की मौत की वजह बन जाएगा। गांव के लोगों में भी इस बात की चर्चा रही।
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