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दुर्लभ संयोगों ने बनाया महाशिवरात्रि को विशेष : आचार्य राजेश

Fri, 13 Feb 2026 11:35 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 13 Feb 2026 11:35 PM IST
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Rare coincidences make Mahashivratri special: Acharya Rajesh
आचार्य राजेश कुमार शर्मा। ज्योतिषविद
बदायूं। इस वर्ष महाशिवरात्रि पर शिव योग, आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग, साध्य योग, शुक्ल योग, ध्रुव योग, व्यतिपात, शोभन योग और वरियान योग रहेगा। इसी के साथ बुध और शुक्र लक्ष्मी नारायण राजयोग बना रहे हैं।
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ज्योतिषविद आचार्य राजेश कुमार शर्मा बताते हैं कि बुधादित्य राजयोग बना रहे हैं। सूर्य और शुक्र के मेल से शुक्रादित्य योग बन रहा है। कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र, शनि और राहु पंचग्रह भी राजयोग बना रहे हैं। ज्योतिष के अनुसार, इन पांच विशेष योगों का एक साथ बनना दुर्लभ संयोग है।
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आचार्य ने बताया कि महाशिवरात्रि पर 15 फरवरी को भद्रा सायं 5:04 बजे शुरू होगी। समापन 16 फरवरी की सुबह 5:32 बजे होगा। करीब 12 घंटे तक भद्रा काल रहेगा। हालांकि भद्रा पाताल लोक की है। जब भद्रा पाताल में रहती है तब इसका प्रभाव पृथ्वी पर नहीं पड़ता। ऐसे में भक्तगण बिना किसी अवरोध के भगवान शिव की पूजा कर पाएंगे।
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महाशिवरात्रि के मुहूर्त

सुबह के मुहूर्त
चर - प्रातः 8:24 से 9:48 बजे तक
लाभ - प्रातः 9:48 से पूर्वाह्न 11:11 बजे तक
अमृत - पूर्वाह्न 11:11 से दोपहर 12:35 बजे तक

सायं कालीन मुहूर्त
शुभ - 6:11 से रात्रि 7:47 बजे तक
अमृत - रात्रि 7:47 से 9:23 बजे तक
चर - रात्रि 9:23 से 10:59 बजे तक

शिव पूजा विधि
दिनभर शिव का ध्यान करते हुए मौन रहें। सायंकाल के समय शिव मंदिर में जाकर पूर्व या उत्तर मुखी होकर बैठें और पूजन करें। शिवलिंग का गंगा जल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर से अभिषेक करें। भगवान महाकाल को धतूरे और मदार के फूल, बेलपत्र, चंदन, अक्षत आदि समर्पित करते हुए उनका ध्यान करें और मन ही मन 108 बार ‘ओम् नम: शिवाय’ का जाप करें। पूरे दिन निर्जल रहकर व्रत करें तो विशेष पुण्य प्राप्त होता है।


महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
महाशिवरात्रि के चार प्रहर की पूजा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। रात्रि काल में ही नकारात्मकता और व्याधियां सक्रिय होती हैं। ये सभी भगवान शिव के वशीभूत रहती हैं। इसलिए उन सभी का नाश करने के लिए विशेष रूप से महाशिवरात्रि पर विशेष शिव साधना की जाती है।
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