{"_id":"68d1ada844e58ab2270c6d4d","slug":"rams-son-gets-sitas-role-in-his-in-laws-house-badaun-news-c-123-1-sbly1035-147543-2025-09-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: राम की ससुराल में बेटे को मिला सीता का किरदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: राम की ससुराल में बेटे को मिला सीता का किरदार
विज्ञापन
उझानी रामलीला में लगी दुकानें। संवाद
उझानी। करीब एक दशक तक श्रीराम का किरदार निभाने वाले वृंदावन के बनवारी लाल की ससुराल में एक कलाकार के रूप में बेटे नैतिक दीक्षित की एंट्री हो गई है। सीता के किरदार में नैतिक के सामने राम की भूमिका में कोई और नहीं, बल्कि चाचा नंदकिशोर होंगे।
वृंदावन में परिक्रमा मार्ग निवासी 16 वर्षीय नैतिक दीक्षित के पिता बनवारी लाल मंडली के साथ यहां आकर करीब दो दशक से राम का किरदार निभाते रहे हैं। 18 साल पहले बनवारी की शादी कस्बे की रजनी के साथ हुई थी। नैतिक उनका बेटा है। रामलीला मंचन के दौरान रिश्तों की डोर से दूर रहने वाले नैतिक ने बताया कि पिता अब राम की भूमिका नहीं निभाते। चाचा नंदकिशोर ने उनके किरदार को निभाना शुरू कर दिया है। बाबा गिरधारीलाल व्यास गद्दी सुशोभित करते हैं तो नैतिक को रामलीला में इस बार सीता की भूमिका निभाने का मौका मिला है।
दरअसल, नैतिक ने वृंदावन में ही नाट्य कला सीखी है। शुरू के दो- तीन साल तक उन्होंने छोटे- छोटे किरदार निभाए। पिता बनवारी और बाबा गिरधारी को लगा कि नैतिक हुनरमंद है तो उन्हें सीता के किरदार के अनुरूप पाया। नैतिक कहते हैं कि एक कलाकार के रूप में चुनौतियां तो अनेक होती हैं, लेकिन अगर ठान लिया जाए तो कुछ भी नामुमकिन्नहीं होता।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -
रात में रामलीला तो दिन में होती है रासलीला
- उझानी में रामलीला का मंचन नवरात्र के पहले दिन शुरू होता है। पद्मश्री हरगोविंद दास की मंडली के कलाकार भी यहां आकर रामलीला का मंचन कर चुके हैं। हरगोविंद दास की रामलीला देखने आने वाले दर्शक घर से ही नंगे पांव आते थे। गोशाला अध्यक्ष रतन जिंदल कहते हैं कि रामलीला अंग्रेजों के जमाने में भी हुआ करती थी। रामलीला की खास बात यह भी है कि जो कलाकार रात में रामलीला का मंचन करते हैं, वही दिन में सुबह से दो बजे तक रासलीला के मंचन में हिस्सा लेते हैं।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
सेवाभाव से आई दिलचस्पी
पंजाबी कॉलोनी निवासी कृष्ण कुमार वार्ष्णेय उर्फ बॉबी रामलीला आयोजन समिति के अध्यक्ष हैं। 21वीं बार उन्हें यह जिम्मेदारी मिली है। बॉबी ने बताया कि उनके परिवार में उनसे पहले किसी ने आयोजन समिति का मुखिया पद नहीं संभाला। करीब ढाई दशक पहले उन्हें अध्यक्ष चुना गया, तभी से सेवाभाव जागृत हो गया। इसके बाद उनके अंदर दिलचस्पी देख गोशाला कमेटी और व्यापारियों ने जब भी मौका दिया, उसे पूरी शिद्दत के साथ काम किया।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
धनसुख अग्रवाल ने संभाली पिता की विरासत
- पंखा रोड निवासी आढ़ती धनसुख अग्रवाल रामलीला कमेटी के तीन बार अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके पिता चौधरी टेड़ामल अग्रवाल करीब तीन दशक पहले अध्यक्ष रहे हैं। धनसुख कहते हैं कि किसी भी बड़े आयोजन को सफलता बिना मेहनत के नहीं मिल पाती। पिता से विरासत में जो सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में सहभागिता के संस्कार मिले हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में रामलीला को भव्य रूप प्रदान किया था।
विज्ञापन
वृंदावन में परिक्रमा मार्ग निवासी 16 वर्षीय नैतिक दीक्षित के पिता बनवारी लाल मंडली के साथ यहां आकर करीब दो दशक से राम का किरदार निभाते रहे हैं। 18 साल पहले बनवारी की शादी कस्बे की रजनी के साथ हुई थी। नैतिक उनका बेटा है। रामलीला मंचन के दौरान रिश्तों की डोर से दूर रहने वाले नैतिक ने बताया कि पिता अब राम की भूमिका नहीं निभाते। चाचा नंदकिशोर ने उनके किरदार को निभाना शुरू कर दिया है। बाबा गिरधारीलाल व्यास गद्दी सुशोभित करते हैं तो नैतिक को रामलीला में इस बार सीता की भूमिका निभाने का मौका मिला है।
विज्ञापन
दरअसल, नैतिक ने वृंदावन में ही नाट्य कला सीखी है। शुरू के दो- तीन साल तक उन्होंने छोटे- छोटे किरदार निभाए। पिता बनवारी और बाबा गिरधारी को लगा कि नैतिक हुनरमंद है तो उन्हें सीता के किरदार के अनुरूप पाया। नैतिक कहते हैं कि एक कलाकार के रूप में चुनौतियां तो अनेक होती हैं, लेकिन अगर ठान लिया जाए तो कुछ भी नामुमकिन्नहीं होता।
विज्ञापन
रात में रामलीला तो दिन में होती है रासलीला
- उझानी में रामलीला का मंचन नवरात्र के पहले दिन शुरू होता है। पद्मश्री हरगोविंद दास की मंडली के कलाकार भी यहां आकर रामलीला का मंचन कर चुके हैं। हरगोविंद दास की रामलीला देखने आने वाले दर्शक घर से ही नंगे पांव आते थे। गोशाला अध्यक्ष रतन जिंदल कहते हैं कि रामलीला अंग्रेजों के जमाने में भी हुआ करती थी। रामलीला की खास बात यह भी है कि जो कलाकार रात में रामलीला का मंचन करते हैं, वही दिन में सुबह से दो बजे तक रासलीला के मंचन में हिस्सा लेते हैं।
सेवाभाव से आई दिलचस्पी
पंजाबी कॉलोनी निवासी कृष्ण कुमार वार्ष्णेय उर्फ बॉबी रामलीला आयोजन समिति के अध्यक्ष हैं। 21वीं बार उन्हें यह जिम्मेदारी मिली है। बॉबी ने बताया कि उनके परिवार में उनसे पहले किसी ने आयोजन समिति का मुखिया पद नहीं संभाला। करीब ढाई दशक पहले उन्हें अध्यक्ष चुना गया, तभी से सेवाभाव जागृत हो गया। इसके बाद उनके अंदर दिलचस्पी देख गोशाला कमेटी और व्यापारियों ने जब भी मौका दिया, उसे पूरी शिद्दत के साथ काम किया।
धनसुख अग्रवाल ने संभाली पिता की विरासत
- पंखा रोड निवासी आढ़ती धनसुख अग्रवाल रामलीला कमेटी के तीन बार अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके पिता चौधरी टेड़ामल अग्रवाल करीब तीन दशक पहले अध्यक्ष रहे हैं। धनसुख कहते हैं कि किसी भी बड़े आयोजन को सफलता बिना मेहनत के नहीं मिल पाती। पिता से विरासत में जो सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में सहभागिता के संस्कार मिले हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में रामलीला को भव्य रूप प्रदान किया था।

उझानी रामलीला में लगी दुकानें। संवाद

उझानी रामलीला में लगी दुकानें। संवाद

उझानी रामलीला में लगी दुकानें। संवाद